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मथुरा: देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चले जाएंगे निद्रा में
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मथुरा। देवशयनी एकादशी व्रत मंगलवार को रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी, विष्णु-शयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। सभी मांगलिक कार्य बंद रहेंगे। भगवान विष्णु भी निद्रा में चले जाएंगे।
दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि इस दिन से चातुर्मास की भी शुरूआत हो जाएगी, जिसमें किसी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी का व्रत सब व्रतों में उत्तम है। इस व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत के करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर के लिए और पितामह ब्रह्मा जी ने नारद जी के लिए इस देवशयनी एकादशी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा है कि इसके करने से घर में धन-धान्य, सुख, समृद्धि मिलती है एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। राजा मांधाता ने महर्षि अंगिरस के आदेश के अनुसार यह हरिशयनी एकादशी व्रत किया था।
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उन्होंने बताया कि इस वर्ष 20 जुलाई को देवता गण शयन करेंगे और कार्तिक शुक्ला एकादशी 14 नवंबर को जग जाएंगे। इस बीच सभी नैमित्तिक विवाह आदि मांगलिक कार्य बंद रहेंगे। इस समय अवधि में चातुर्मास के सभी व्रत नियम करते रहने का विधान है।
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दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि इस दिन से चातुर्मास की भी शुरूआत हो जाएगी, जिसमें किसी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी का व्रत सब व्रतों में उत्तम है। इस व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत के करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
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उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर के लिए और पितामह ब्रह्मा जी ने नारद जी के लिए इस देवशयनी एकादशी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा है कि इसके करने से घर में धन-धान्य, सुख, समृद्धि मिलती है एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। राजा मांधाता ने महर्षि अंगिरस के आदेश के अनुसार यह हरिशयनी एकादशी व्रत किया था।
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उन्होंने बताया कि इस वर्ष 20 जुलाई को देवता गण शयन करेंगे और कार्तिक शुक्ला एकादशी 14 नवंबर को जग जाएंगे। इस बीच सभी नैमित्तिक विवाह आदि मांगलिक कार्य बंद रहेंगे। इस समय अवधि में चातुर्मास के सभी व्रत नियम करते रहने का विधान है।