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मथुरा: पंचतत्व में विलीन हुए कृष्णदास महाराज
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कोसीकलां (मथुरा)। लगातार 12 वर्षों से अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अनी अखाड़ा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे कृष्णदास महाराज शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। वे करीब 80 वर्ष के थे। सैकड़ों नम आंखों ने उन्हें विदाई दी। प्रदेश के दुग्ध विकास, पशुधन एवं मत्स्य मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण समेत तमाम साधु-संत, महंत उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए। कृष्णदास का बृहस्पतिवार की रात में निधन हो गया था।
कृष्णदास का अंतिम संस्कार राजमार्ग स्थित मौनी बाबा आश्रम में किया गया। सुबह 10 बजे से उनका पार्थिव शरीर दर्शनों के लिए रखा गया। उसके बाद गांव कोटवन में उनकी अंतिम यात्रा बैंडबाजों के साथ निकाली गई। कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण, मौनी बाबा, बाबा बालकदास, फूलडोल दास, सर्वेश्वरण दास, भरतदास, रामदत्त दास आदि ने वैदिक मंत्रों के साथ अंतिम संस्कार किया। अंतिम संस्कार में महिलाएं भी शामिल हुईं। अब आश्रम में महाराज का स्मारक बनाया जाएगा। बता दें कि तीन माह पूर्व हरिद्वार में आयोजित कुंभ मेले में बैरागी संतों ने उन्हें अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना था।
संत परंपरा के जानकार थे : लक्ष्मीनारायण
कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि कृष्णदास संत परंपरा के जानकार, बेहद सरल थे, संसार से विदा होना प्रकृति का नियम है, पर हम सब बेहद दुखी हैं। वहीं, मौनी महाराज ने उन्हें बेहद कर्मठी, सहयोगी व हिंदुत्व के प्रति समर्पित व्यक्तित्व बताया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
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कृष्णदास का अंतिम संस्कार राजमार्ग स्थित मौनी बाबा आश्रम में किया गया। सुबह 10 बजे से उनका पार्थिव शरीर दर्शनों के लिए रखा गया। उसके बाद गांव कोटवन में उनकी अंतिम यात्रा बैंडबाजों के साथ निकाली गई। कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण, मौनी बाबा, बाबा बालकदास, फूलडोल दास, सर्वेश्वरण दास, भरतदास, रामदत्त दास आदि ने वैदिक मंत्रों के साथ अंतिम संस्कार किया। अंतिम संस्कार में महिलाएं भी शामिल हुईं। अब आश्रम में महाराज का स्मारक बनाया जाएगा। बता दें कि तीन माह पूर्व हरिद्वार में आयोजित कुंभ मेले में बैरागी संतों ने उन्हें अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना था।
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संत परंपरा के जानकार थे : लक्ष्मीनारायण
कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि कृष्णदास संत परंपरा के जानकार, बेहद सरल थे, संसार से विदा होना प्रकृति का नियम है, पर हम सब बेहद दुखी हैं। वहीं, मौनी महाराज ने उन्हें बेहद कर्मठी, सहयोगी व हिंदुत्व के प्रति समर्पित व्यक्तित्व बताया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
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