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Mathura News: महामना ने बाल कृष्ण के दर्द का किया था अहसास
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महामना ने बाल कृष्ण के दर्द का किया था अहसास
मथरा। पंडित मदन मोहन मालवीय को बाल कृष्ण के एक टीले पर सुनसान स्थान के बीच बैठे होने का अहसास उस समय हुआ जब वह पहली दफा वर्ष १९४० में मथुरा आए। उन्होंने टीले पर बने प्राचीन गंगा मंदिर में जाकर कन्हैया के दर्शन भी किए।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि भगवान की जन्म स्थली में महामना को अहसास हुआ कि बाल कृष्ण के बैठने के लिए कोई सुंदर स्थान नहीं हैं। भगवान की जन्मस्थली के ऊपर विशाल ईदगाह बनी हुई है। आसपास भैंस बांधी जा रही हैं। यह सब देख उनका हृदय द्रवित हो उठा। उन्होंने मन ही मन इस स्थान पर भव्य मंदिर की परिकल्पना कर डाली। यहां से लौटने के बाद वह उस समय के देश के प्रमुख उद्योगपति जुगलकिशोर बिड़ला के पास गए और अपनी पीड़ा बताई। जुगल किशोर बिड़ला उस समय मथुरा में एक मंदिर बना रहे थे। मालवीय के भक्ति युक्त दर्द को समझकर बिड़ला ने हां कर दी। इसके बाद उन्होंने सबसे पहले राजा पटनीमल के परिजन रायकृष्ण दास से मुलाकात की और मंदिर के निमित्त इस टीलेनुमा जमीन को जुगल किशोर बिड़ला की आर्थिक सहायता से ७ फरवरी 1944 में 13 हजार रुपये में खरीदा गया।
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मथरा। पंडित मदन मोहन मालवीय को बाल कृष्ण के एक टीले पर सुनसान स्थान के बीच बैठे होने का अहसास उस समय हुआ जब वह पहली दफा वर्ष १९४० में मथुरा आए। उन्होंने टीले पर बने प्राचीन गंगा मंदिर में जाकर कन्हैया के दर्शन भी किए।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि भगवान की जन्म स्थली में महामना को अहसास हुआ कि बाल कृष्ण के बैठने के लिए कोई सुंदर स्थान नहीं हैं। भगवान की जन्मस्थली के ऊपर विशाल ईदगाह बनी हुई है। आसपास भैंस बांधी जा रही हैं। यह सब देख उनका हृदय द्रवित हो उठा। उन्होंने मन ही मन इस स्थान पर भव्य मंदिर की परिकल्पना कर डाली। यहां से लौटने के बाद वह उस समय के देश के प्रमुख उद्योगपति जुगलकिशोर बिड़ला के पास गए और अपनी पीड़ा बताई। जुगल किशोर बिड़ला उस समय मथुरा में एक मंदिर बना रहे थे। मालवीय के भक्ति युक्त दर्द को समझकर बिड़ला ने हां कर दी। इसके बाद उन्होंने सबसे पहले राजा पटनीमल के परिजन रायकृष्ण दास से मुलाकात की और मंदिर के निमित्त इस टीलेनुमा जमीन को जुगल किशोर बिड़ला की आर्थिक सहायता से ७ फरवरी 1944 में 13 हजार रुपये में खरीदा गया।
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