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Vrindavan: 175 वर्ष पुराने 60 फीट ऊंचे रथ में विराजमान होकर निकले भगवान रंगनाथ, दर्शन करने उमड़े भक्त

Sun, 23 Mar 2025 03:32 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अरुन पाराशर Updated Sun, 23 Mar 2025 03:32 PM IST
सार

वृंदावन में भगवान गोदा रंगमन्नार का रथयात्रा उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस दाैरान भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। हर किसी में भगवान के रथ को खींचने की होड़ मची रही।
 

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Lord Ranganath came out seated in 175 year old 60 feet high chariot
रथ पर विराजमान होकर निकले ठाकुरजी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

उत्तर भारत में दक्षिणात्य शैली के सबसे विशाल श्री रंग मंदिर में चैत्र कृष्ण पक्ष नवमी को भव्य ब्रह्मोत्सव के अंतर्गत भगवान गोदा रंगमन्नार का रथ यात्रा उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। ठाकुरजी के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। भक्तों में विशालकाय रथ खींचने की होड़ मच गई।
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60 फीट ऊंचे रथ पर विराजे 
लगभग 175 वर्ष पुराने चंदन से निर्मित 60 फीट ऊंचे रथ में विराजमान होकर भगवान रंगनाथ भक्तों को दर्शन देने निकले। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में वेद मंत्रों के उच्चारण के बीच ठाकुर रंगनाथ भगवान को श्री देवी और भूदेवी संग पालकी में विराजित कर ज्योतिष गणना अनुसार मेष लग्न में रथ यात्रा प्रारंभ की गई। जैसे ही सात कूपे का धमाका और काली के स्वर ने रथ खींचने का संकेत दिया, भक्तों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।
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जयकारों से गुंजायमान हुआ वृंदावन
श्री रंगनाथ भगवान की जय-जयकार से सम्पूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया। विशाल रथ को खींचने के लिए श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। भक्तों की टोली भजन-कीर्तन करती हुई ठाकुरजी के रथ के साथ चल रही थी।
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मध्याह्न बगीचे में विश्राम, फिर मंदिर लौटे ठाकुर जी
रथ यात्रा मध्याह्न में बड़ा बगीचा पहुंची, जहां भगवान को विश्राम दिया गया। इसके बाद पुनः रथ को मंदिर की ओर प्रस्थान कराया गया। रथ घर पहुंचने पर ठाकुरजी को पुनः पालकी में विराजित कर शुक्रवार बगीची में ले जाया गया, जहां भगवान को शीतलता प्रदान करने हेतु रंगीन फव्वारे चलाए गए।


 
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