Mathura Holi: दिव्य चंदन रथ में भक्तों को दर्शन देंगे गोदारंगमन्नार, प्रसाद रूपी रंग और गुलाल लेने की रही होड़
मथुरा के वृंदावन स्थित रंगनाथ मंदिर के ब्रह्मोत्सव के बाद यहां 40 दिवसीय होली महोत्सव का समापन हो गया। अब गुरुवार को ठाकुर गोदारंमन्नार विशाल और दिव्य रथ में विराजित होकर भक्तों को दर्शन देंगे। भगवान के दर्शन को देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे हैं।
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उत्तर प्रदेश की तीर्थनगरी मथुरा के वृंदावन स्थित रंगनाथ मंदिर के ब्रह्मोत्सव के अंतर्गत बुधवार को भगवान गोदारंगमन्नार ने भक्तों के साथ होली खेली। होली के इस आयोजन से संपूर्ण वातावरण होलीमय हो गया। भक्तों में ठाकुरजी के प्रसाद रूपी रंग और गुलाल को लेने की होड़ रही। इसी के साथ वृंदावन में चल रहे 40 दिवसीय होली महोत्सव का समापन हो गया।
दिव्य चंदन रथ में विराजेंगे गोदारंगमन्नार
रंगनाथ मंदिर के 10 दिवसीय ब्रह्मोत्सव के अंतर्गत बृहस्पतिवार को ठाकुर गोदारंमन्नार विशाल और दिव्य रथ में विराजित होकर भक्तों को दर्शन देंगे। मंदिर प्रबंधन द्वारा मेले की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गईं हैं। ठाकुर गोदारंगमन्नार दिव्य अलौकिक छवि के अनुरूप उत्तर भारत में अपनी तरह इकलौते चंदन लकड़ी से निर्मित 53 फुट ऊंचे रथ में विराजमान हो भक्तों को दर्शन देंगे।
इस विशाल रथ की सफाई, साज, सज्जा के कार्य को अंतिम रूप दिया गया। मंदिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि इस दिव्य रथ की खासियत यह है कि विशाल रथ किसी यंत्र से नहीं बल्कि हजारों भक्तों द्वारा रस्सों से खींचा जाता है। मान्यता है कि ठाकुरजी की सवारी को खींचने का अक्षय पुण्य लाभ होता है।
ब्रह्मोत्सव पर देखने को मिला अभूतपूर्व रूप
ब्रज की पारंपरिक होली का उत्साह रंगनाथ मंदिर के ब्रह्मोत्सव में भी अभूतपूर्व रूप में देखने को मिला। बुधवार सुबह 9 बजे मंदिर प्रांगण से ठाकुर गोदारंगमन्नार कांच के विमान में विराजमान होकर भक्तों के साथ होली खेलने के लिए मंदिर से निकले। इससे पहले ही ठाकुरजी के होली खेलने के लिए निकलने वाले मार्ग पर भक्तों का तांता लग गया। मंदिर से निकाली गई शोभायात्रा में रंगजी का बगीचा जाते और लौटते हुए ठाकुरजी ने श्रद्धालुओं के साथ गुलाल और रंगों की होली खेली।
भक्तों पर डाला गया प्रसादी रंग
होली महोत्सव में सेवायतों द्वारा चांदी की पिचकारियों से ठाकुर गोदारंगमन्नार का प्रसादी रंग भक्तों पर डाला जा रहा था। हजारों भक्त होली के रंग में सराबोर हो अपने को कृतार्थ मान रहे थे। मंदिर के पुरोहित पंडित विजय मिश्र ने बताया कि होली खेलने के बाद ठाकुर रंगमन्नार, माता गोदा को होली का फहुआ भी देते हैं। फहुआ में विभिन्न प्रकार के व्यंजन एवं सुहाग-शृंगार का सामान दिया जाता है। देर शाम भगवान गोदारंमन्नार न हाथी पर सवार होकर दर्शन दिए।