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जीएलए के डॉ. शूरवीर सिंह को ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’
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मथुरा। जीएलए विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. शूरवीर सिंह को पशुओं की टीबी पर किए शोध के लिए आयरलैंड की राजधानी डबलिन में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय पैराट्यूबरकुलोसिस सम्मेलन-2022’ में ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। इस सम्मेलन में दो दर्जन से अधिक देशों के वैज्ञानिकों ने भाग लिया और शोध पत्र प्रस्तुत किए। 2024 में यह आयोजन भारत में जीएलए विवि की ओर से किया जाना प्रस्तावित है।
जीएलए विवि के जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. शूरवीर सिंह ने बताया कि डबलिन में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने व उनके सहयोगी डॉ. जेएस जोहल ने कई शोध पत्र प्रस्तुत किए। उन्हें सम्मेलन को संबोधित करने का भी मौका मिला। एसोसिएसशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. रोड्रिक चिरोदिनी ने उन्हें ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ प्रदान किया।
गौरतलब है कि इससे पूर्व भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय द्वारा डॉ. शूरवीर सिंह को 2016 में वैक्सीन विकसित करने के लिए संयुक्त रूप से पुरस्कृत किया जा चुका है। भारत में विकसित की गई वैक्सीन सभी प्रकार के दुधारू पशुओं के इलाज व रोकथाम दोनों ही मामलों में कारगर है। डॉ. शूरवीर सिंह उप्र दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विवि के छात्र और केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान मखदूम में सेवारत रहे हैं। संवाद
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जीएलए विवि के जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. शूरवीर सिंह ने बताया कि डबलिन में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने व उनके सहयोगी डॉ. जेएस जोहल ने कई शोध पत्र प्रस्तुत किए। उन्हें सम्मेलन को संबोधित करने का भी मौका मिला। एसोसिएसशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. रोड्रिक चिरोदिनी ने उन्हें ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ प्रदान किया।
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गौरतलब है कि इससे पूर्व भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय द्वारा डॉ. शूरवीर सिंह को 2016 में वैक्सीन विकसित करने के लिए संयुक्त रूप से पुरस्कृत किया जा चुका है। भारत में विकसित की गई वैक्सीन सभी प्रकार के दुधारू पशुओं के इलाज व रोकथाम दोनों ही मामलों में कारगर है। डॉ. शूरवीर सिंह उप्र दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विवि के छात्र और केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान मखदूम में सेवारत रहे हैं। संवाद
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