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लंकेश भक्त मंडल करेगा रावण के दहन का विरोध
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मथुरा। लंकेश भक्त मंडल विजय दशमी को प्रकांड विद्वान महाराज दशानन की महाआरती करते हुए पुतला दहन परंपरा का विरोध करेगा। इसकी तैयारी की जा रही हैं। जिससे बड़ी संख्या में भक्तगण शामिल हों।
लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट ने बताया है कि भगवान श्रीराम के आचार्य और शिव तांडव स्तोत्र के रचयिता प्रकांड विद्वान महाराज रावण के विष्णु लोक जाने के दिन विजयदशमी को उनकी महाआरती करेगा। त्रिकाल दर्शी प्रकांड विद्वान का हर वर्ष पुतला दहन करना एक कुरीति है। हिंदू धर्म में एक बार ही व्यक्ति के अंतिम संस्कार करने की व्यवस्था है, लेकिन हिंदू समाज में पुतला दहन की कुरीति प्राचीन समय से गलत आधारों पर अपनाई जा रही है। लंकेश भक्त मंडल पुतला दहन का विरोध करता है।
ओमवीर सारस्वत ने कहा कि लंकेश की अच्छाइयों से सीख लेनी चाहिए। जिन्होंने एकाग्र चित्त होकर घन घोर तपस्या की थी, जिसके आधार पर शक्ति हासिल की। तभी भगवान राम ने युद्ध में विजय प्राप्ति के समय अपने छोटे भाई लक्ष्मण को राजनीति की शिक्षा लेने के लिय रावण के पास भेजा था। भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्ति के लिए सेतु बंधु रामेश्वरम की स्थापना के लिए जामवंत को रावण के पास आचार्य बनाने के लिए निमंत्रण भेजा था, जिसे रावण ने स्वीकार किया था।
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रामजी को पूजन कराके उन्होंने स्वयं लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए आशीर्वाद दिया था। जब हम लोग भगवान राम में आस्था रखते हैं तो हमें रावण का भी सम्मान करना चाहिए। विजयदशमी के दिन शुक्रवार को दोपहर 12 बजे यमुना पार स्थित यमुना पुल के नीचे तलहटी में शिव मंदिर पर लंकेश भगवान भोले नाथ की पूजा करेंगे। फिर दशानन की महा आरती होगी। कुलदीप अवस्थी ने बताया है कि लंकेश पूजन की तैयारी जोरों पर की जा रही है।
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लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट ने बताया है कि भगवान श्रीराम के आचार्य और शिव तांडव स्तोत्र के रचयिता प्रकांड विद्वान महाराज रावण के विष्णु लोक जाने के दिन विजयदशमी को उनकी महाआरती करेगा। त्रिकाल दर्शी प्रकांड विद्वान का हर वर्ष पुतला दहन करना एक कुरीति है। हिंदू धर्म में एक बार ही व्यक्ति के अंतिम संस्कार करने की व्यवस्था है, लेकिन हिंदू समाज में पुतला दहन की कुरीति प्राचीन समय से गलत आधारों पर अपनाई जा रही है। लंकेश भक्त मंडल पुतला दहन का विरोध करता है।
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ओमवीर सारस्वत ने कहा कि लंकेश की अच्छाइयों से सीख लेनी चाहिए। जिन्होंने एकाग्र चित्त होकर घन घोर तपस्या की थी, जिसके आधार पर शक्ति हासिल की। तभी भगवान राम ने युद्ध में विजय प्राप्ति के समय अपने छोटे भाई लक्ष्मण को राजनीति की शिक्षा लेने के लिय रावण के पास भेजा था। भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्ति के लिए सेतु बंधु रामेश्वरम की स्थापना के लिए जामवंत को रावण के पास आचार्य बनाने के लिए निमंत्रण भेजा था, जिसे रावण ने स्वीकार किया था।
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रामजी को पूजन कराके उन्होंने स्वयं लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए आशीर्वाद दिया था। जब हम लोग भगवान राम में आस्था रखते हैं तो हमें रावण का भी सम्मान करना चाहिए। विजयदशमी के दिन शुक्रवार को दोपहर 12 बजे यमुना पार स्थित यमुना पुल के नीचे तलहटी में शिव मंदिर पर लंकेश भगवान भोले नाथ की पूजा करेंगे। फिर दशानन की महा आरती होगी। कुलदीप अवस्थी ने बताया है कि लंकेश पूजन की तैयारी जोरों पर की जा रही है।