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अधिकारियों की टूटी नींद, अब घाटों किनारे यमुना में हो रही सिल्ट सफाई
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वृंदावन (मथुरा)। वृंदावन कुंभ की पहली आवश्यकता पर सबसे बाद में काम शुरू हुआ है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की नींद संतों की नाराजगी और बात लखनऊ तक पहुंचने के बाद टूटी है। अब कुंभ क्षेत्र में बने यमुना के घाट किनारे की सिल्ट को निकालने के लिए मशीन लगाई गई हैं। समय रहते इस सिल्ट को हटाने या फिर दबाने का काम होता तो यह स्थिति पैदा न होती और यमुना का पानी गंदा होने की फजीहत न झेलनी पड़ती। यहां तक कि यूपी सदन में भी यमुना में गंदे पानी की बात उठ चुकी है।
यमुना की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। वृंदावन कुंभ इसी यमुना के तट पर आयोजित हो रहा है। इसमें देशभर से हजारों वैष्णव संत डेरा डाले हुए हैं। संत-महंतों के साथ श्रद्धालु भी प्रतिदिन पुण्य की कामना के साथ यमुना जल में डुबकी लगा रहे हैं, लेकिन जल में कदम रखते ही उठती सिल्ट भावनाओं को आहत कर रही हैं। कुंभ के पहले शाही स्नान के दौरान भी इसी स्थिति ने संत-महंत और भक्तों के समझ उलझन खड़ी कर दी थी।
अनेक संत बगैर स्नान किए ही अपने शिविरों में लौट गए थे। यह बात लखनऊ तक पहुंची तो अधिकारियों ने द्वितीय स्नान से चंद दिन पहले सफाई का काम शुरू किया है। सिंचाई विभाग की जेसीबी आदि यमुना के घाट किनारे की सिल्ट निकाल रही हैं। सबसे पहले शाही घाट के किनारे की सिल्ट निकाली गई है। इस कार्य का एसडीएम सदर क्रांतिशेखर ने जायजा भी लिया। देवरहा बाबा घाट पर भी सफाई की उम्मीद है।
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यमुना में अतिरिक्त जल की उम्मीद नहीं
वृंदावन कुंभ के लिए अब और अतिरिक्त जल की उम्मीद नहीं है। गोकुल बैराज से आगरा के लिए डिस्चार्ज कम कर दिया गया है। 400-500 क्यूसेक पानी ही आगरा की ओर छोड़ा जा रहा है, जो कुछ दिन पूर्व 1000 क्यूसेक से भी ऊपर था। इसके अलावा यमुना को गंगाजल के रूप 600 क्यूसेक और ओखला से 350 क्यूसेक यमुना जल मिल रहा है। अब इसमें सिंचाई अधिकारी किसी प्रकार की वृद्धि की संभावना नहीं बता रहे हैं।
- यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है। कुछ पुराना जल निकालने के बाद ऊपर से आ रहे जल को फिर रोका जा रहा है। इसमें गंगाजल और यमुना जल भी है। घाटों के किनारे सिल्ट की सफाई कराई गई है। द्वितीय स्नान के दौरान अच्छा जल मिलेगा। सिंचाई अधिकारियों को और भी दिशा-निर्देश दिए हैं। - नगेंद्र प्रताप, मेलाधिकारी वृंदावन कुंभ।
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यमुना की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। वृंदावन कुंभ इसी यमुना के तट पर आयोजित हो रहा है। इसमें देशभर से हजारों वैष्णव संत डेरा डाले हुए हैं। संत-महंतों के साथ श्रद्धालु भी प्रतिदिन पुण्य की कामना के साथ यमुना जल में डुबकी लगा रहे हैं, लेकिन जल में कदम रखते ही उठती सिल्ट भावनाओं को आहत कर रही हैं। कुंभ के पहले शाही स्नान के दौरान भी इसी स्थिति ने संत-महंत और भक्तों के समझ उलझन खड़ी कर दी थी।
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अनेक संत बगैर स्नान किए ही अपने शिविरों में लौट गए थे। यह बात लखनऊ तक पहुंची तो अधिकारियों ने द्वितीय स्नान से चंद दिन पहले सफाई का काम शुरू किया है। सिंचाई विभाग की जेसीबी आदि यमुना के घाट किनारे की सिल्ट निकाल रही हैं। सबसे पहले शाही घाट के किनारे की सिल्ट निकाली गई है। इस कार्य का एसडीएम सदर क्रांतिशेखर ने जायजा भी लिया। देवरहा बाबा घाट पर भी सफाई की उम्मीद है।
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यमुना में अतिरिक्त जल की उम्मीद नहीं
वृंदावन कुंभ के लिए अब और अतिरिक्त जल की उम्मीद नहीं है। गोकुल बैराज से आगरा के लिए डिस्चार्ज कम कर दिया गया है। 400-500 क्यूसेक पानी ही आगरा की ओर छोड़ा जा रहा है, जो कुछ दिन पूर्व 1000 क्यूसेक से भी ऊपर था। इसके अलावा यमुना को गंगाजल के रूप 600 क्यूसेक और ओखला से 350 क्यूसेक यमुना जल मिल रहा है। अब इसमें सिंचाई अधिकारी किसी प्रकार की वृद्धि की संभावना नहीं बता रहे हैं।
- यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है। कुछ पुराना जल निकालने के बाद ऊपर से आ रहे जल को फिर रोका जा रहा है। इसमें गंगाजल और यमुना जल भी है। घाटों के किनारे सिल्ट की सफाई कराई गई है। द्वितीय स्नान के दौरान अच्छा जल मिलेगा। सिंचाई अधिकारियों को और भी दिशा-निर्देश दिए हैं। - नगेंद्र प्रताप, मेलाधिकारी वृंदावन कुंभ।