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Mathura News: गहवरवन की जगह ब्रह्मांचल पर्वत होकर पहुंचेंगे मंदिर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Aug 2025 01:19 AM IST
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Instead of Gahvarvan, we will reach the temple through Brahmachal mountain
लाडली जी महल
राम पंडित
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बरसाना (मथुरा)। वृषभानुनंदिनी श्रीराधारानी का जन्मोत्सव इस बार 31 अगस्त को उल्लास के साथ मनाया जाएगा। भक्तों के लिए यह पर्व आस्था की कठिन परीक्षा बनेगा। लाखों श्रद्धालु श्रीजी के दर्शन के लिए बरसाना पहुंचेंगे। इस बार उनका मार्ग पूर्ववत सरल नहीं रहेगा। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए मंदिर तक पहुंचने का जो नया मार्ग निर्धारित किया है, वह भक्तों के लिए साधना का पथ बनेगा। प्रशासन ने इस बार गहवरवन मार्ग को बंद कर नई ब्रह्मांचल परिक्रमा का निर्धारण किया है।

नई व्यवस्था के तहत अब श्रद्धालु पार्किंग स्थल से निकलकर ब्रह्मांचल पर्वत की परिक्रमा करते हुए राधारानी गेट से मंदिर में प्रवेश करेंगे। यह परिक्रमा लगभग 15 किलोमीटर लंबी यात्रा होगी। भले ही यह दूरी गर्मी में तन को तपाने वाली हो, किंतु श्रद्धा और विश्वास की छाया में यह मार्ग भक्तों के लिए साधना का हिस्सा बन जाएगा। जो श्रद्धालु परिक्रमा करने में असमर्थ होंगे, उन्हें भी पार्किंग से लगभग 5 किलोमीटर पैदल चलना होगा।
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अबकी बार श्रद्धालु गहवरवन की परिक्रमा के सौभाग्य से वंचित रह जाएंगे जबकि हर वर्ष लाखों भक्त गहवरवन होकर पहाड़ी मार्ग से मंदिर पहुंचते थे। मटकी फोड़ स्थल, सकरी गली, मोरकुटी, मान बिहारी लाल और दान बिहारी लाल जू जैसे लीला स्थल परिक्रमा के दौरान अद्भुत अनुभूति प्रदान करते थे। प्रशासन ने इस बार गहवरवन मार्ग को बंद कर नई ब्रह्मांचल परिक्रमा का निर्धारण किया है।
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करीब 10 किलोमीटर की परिक्रमा और तीन किलोमीटर के जंगल के रास्ते में श्रद्धालुओं को कहीं भी छांव व बैठने की व्यवस्था नहीं मिलेगी। ऐसे में श्रद्धालु भजन-कीर्तन और नाम-जप की छाया में ही विश्राम करेंगे। रात में परिक्रमा करने वालों के लिए यह यात्रा और भी चुनौतीपूर्ण होगी। अंधेरे में महिलाओं और वृद्धों की सुरक्षा प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी होगी। संवाद


राधाष्टमी से होगा बूढ़ी लीला महोत्सव का आगाज


बरसाना। बरसाना का कण-कण राधाष्टमी के उल्लास में डूबने को आतुर है। राधाष्टमी के साथ ही बूढ़ी लीला महोत्सव का आगाज़ हो जाएगा। दस दिन तक चलने वाला यह महोत्सव बरसाना की अनूठी परंपरा है। इसमें राधाकृष्ण की द्वापर युग में रची गई दिव्य लीलाओं का मंचन किया जाता है। श्याम स्वामी ने बताया कि यह महोत्सव केवल आयोजन नहीं बल्कि भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम है। बताया कि 29 अगस्त को ऊंचागांव में ललिता जन्मोत्सव होगा। 31 अगस्त को लाडिलीजी मंदिर में सुबह 4 बजे राधाष्टमी पर श्रीविग्रह का अभिषेक शाम को सफेद छतरी में राधारानी दर्शन देंगी।

कार्यक्रमों की शृंखला में 1 सितंबर को सुबह मोरकुटी पर मयूर लीला व शाम को लाडिलीजी मंदिर में ढाढ़ी-ढाढ़ीन लीला होगी। 2 सितंबर को सुबह विलासगढ़ पर विलास लीला और शाम को मान मंदिर पर मान लीला होगी। 3 सितंबर को सांकरी खोर में चोटी बंधन लीला व शाम को प्रेम सरोवर (गाजीपुर) में नौका विहार, 4 सितंबर को ऊंचागांव (सखिगिरी पर्वत) पर ब्याहवला लीला व शाम को प्रियाकुंड व नौका विहार, 5 सितंबर दोपहर सांकरी खोर में मटकी फोड़ लीला व शाम को दंगल होगा। सितंबर को राजस्थान के कदंब खंडी में चीरहरण लीला व 7 सितंबर को मडोई, करहला व राधाबाग में महारास लीला होगी। संवाद
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