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Mathura: कान्हा की नगरी में गायों की दुर्दशा पर हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, 40 गोवंश की मौत पर मांगी रिपोर्ट
Fri, 14 Feb 2025 02:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 14 Feb 2025 02:43 PM IST
सार
धौरेरा के जंगल में मृत मिले 40 गोवंश मामले में हाईकोर्ट ने तीन मार्च तक कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। मथुरा में गोवंश की ऐसी दुर्दशा पर हाईकोर्ट ने हैरानी व्यक्त की है।
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मार्ग किया जाम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
वृंदावन-मथुरा मार्ग स्थित धौरेरा के जंगल में मृत मिले 40 गोवंश मामले में एसआईटी जांच व न्याय दिलाने की मांग वाली याचिका पर बृहस्पतिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने इस अप्रिय घटना पर हैरानी जताई। साथ ही सरकार से तीन मार्च तक कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अब अगली सुनवाई तीन मार्च को होगी।
केस के वादी व अधिवक्ता प्रहलाद कृष्ण शुक्ला ने बताया है कि जंगल में करीब 50 से अधिक गोवंश मृत एवं क्षत-विक्षत हालत में पड़े मिले थे। शासन-प्रशासन द्यारा आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई न करने पर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया है।
मामले में उन्होंने एसआईटी जांच के साथ-साथ मथुरा-वृंदावन में संचालित गोशालाओं व गोवंश शेल्टर होम की उचित निगरानी एवं उक्त मामले में लिप्त अधिकारियों और गोशाला संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बताया है कि इस घटना से गोप्रेमियों की आस्था को ठेस पहुंची है।
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बृहस्पतिवार को न्यायाधीश अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ताओं को 15 दिन का समय देते हुए पूरे प्रकरण की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट ने अगली तारीख तीन मार्च नियत की है।
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केस के वादी व अधिवक्ता प्रहलाद कृष्ण शुक्ला ने बताया है कि जंगल में करीब 50 से अधिक गोवंश मृत एवं क्षत-विक्षत हालत में पड़े मिले थे। शासन-प्रशासन द्यारा आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई न करने पर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया है।
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मामले में उन्होंने एसआईटी जांच के साथ-साथ मथुरा-वृंदावन में संचालित गोशालाओं व गोवंश शेल्टर होम की उचित निगरानी एवं उक्त मामले में लिप्त अधिकारियों और गोशाला संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बताया है कि इस घटना से गोप्रेमियों की आस्था को ठेस पहुंची है।
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बृहस्पतिवार को न्यायाधीश अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ताओं को 15 दिन का समय देते हुए पूरे प्रकरण की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट ने अगली तारीख तीन मार्च नियत की है।