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Mathura News: ब्रज की देवालय परंपरा के संरक्षण की महत्वपूर्ण पहल
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वृंदावन। ब्रज की देवालय परंपरा के संरक्षण के लिए ब्रज वृंदावन देवालय समिति ने महत्वपूर्ण पहल की है। ब्रज के पौराणिक तीर्थ स्थलों, वनों, कुंड, मंदिरोंके संरक्षण को और ब्रज भूमि का मूल स्वरूप बचाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल बुधवार शुरू हुई।
वृंदावन के श्रीरंगनाथ मंदिर में ब्रज देवालय समिति की पहली औपचारिक बैठक में विकास के दिशा भटकाव पर चिंता व्यक्त करते हुए, पधारे विशिष्टजनों ने सामूहिक प्रयासों और सतत जनजागरण द्वारा श्रीकृष्ण की लीला भूमि को सही दिशा देने का संकल्प लिया। बैठक में ब्रज की देवालय परंपरा, संस्कृति, पौराणिक, मूल स्वरुप, और पर्यावरण पर विचार-विमर्श किया गया। संयुक्त सचिव जगननाथ पोद्दार ने बताया कि समिति का उद्देश्य ब्रज की देवालय परंपरा और मूल स्वरूप के संरक्षण व संवर्धन के लिए कार्य करना है।
इसके अलावा, समिति ब्रज के वन, यमुना, कुंड, ब्रजरज, प्राचीन देवालय, साहित्य, और गोवंश संरक्षण के लिए भी कार्य करेगी। ब्रज क्षेत्र में स्थित विभिन्न मंदिर और तीर्थ स्थल हिंदू धर्म के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। इन मंदिरों के अलावा, ब्रज क्षेत्र में कई प्राचीन कुंड और सरोवर भी हैं, जिनको संरक्षण की दरकार है। इन तीर्थ स्थलों के संरक्षण और संवर्धन से न केवल हिंदू धर्म की परंपराओं का संरक्षण होगा, बल्कि पर्यावरण और संस्कृति का भी संरक्षण होगा।
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समिति ने यमुना शुद्धिकरण, ब्रज संरक्षण के लिए कार्य योजना तैयार करना और प्राचीन मंदिरों की सूची तैयार करना जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए। अगले छह महीने की कार्य सूची तैयार की गई। इस मौके पर हरिश्चन्द्र गोस्वामी, भरत गोस्वामी, शम्भू दयाल पंडा, बलराम कृष्ण गोस्वामी, भारत जोशी, और कृष्णन स्वामी शामिल थे। आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने अध्यक्षता की और जगन्नाथ पोद्दार ने संचालन किया।
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वृंदावन के श्रीरंगनाथ मंदिर में ब्रज देवालय समिति की पहली औपचारिक बैठक में विकास के दिशा भटकाव पर चिंता व्यक्त करते हुए, पधारे विशिष्टजनों ने सामूहिक प्रयासों और सतत जनजागरण द्वारा श्रीकृष्ण की लीला भूमि को सही दिशा देने का संकल्प लिया। बैठक में ब्रज की देवालय परंपरा, संस्कृति, पौराणिक, मूल स्वरुप, और पर्यावरण पर विचार-विमर्श किया गया। संयुक्त सचिव जगननाथ पोद्दार ने बताया कि समिति का उद्देश्य ब्रज की देवालय परंपरा और मूल स्वरूप के संरक्षण व संवर्धन के लिए कार्य करना है।
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इसके अलावा, समिति ब्रज के वन, यमुना, कुंड, ब्रजरज, प्राचीन देवालय, साहित्य, और गोवंश संरक्षण के लिए भी कार्य करेगी। ब्रज क्षेत्र में स्थित विभिन्न मंदिर और तीर्थ स्थल हिंदू धर्म के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। इन मंदिरों के अलावा, ब्रज क्षेत्र में कई प्राचीन कुंड और सरोवर भी हैं, जिनको संरक्षण की दरकार है। इन तीर्थ स्थलों के संरक्षण और संवर्धन से न केवल हिंदू धर्म की परंपराओं का संरक्षण होगा, बल्कि पर्यावरण और संस्कृति का भी संरक्षण होगा।
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समिति ने यमुना शुद्धिकरण, ब्रज संरक्षण के लिए कार्य योजना तैयार करना और प्राचीन मंदिरों की सूची तैयार करना जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए। अगले छह महीने की कार्य सूची तैयार की गई। इस मौके पर हरिश्चन्द्र गोस्वामी, भरत गोस्वामी, शम्भू दयाल पंडा, बलराम कृष्ण गोस्वामी, भारत जोशी, और कृष्णन स्वामी शामिल थे। आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने अध्यक्षता की और जगन्नाथ पोद्दार ने संचालन किया।