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अवैध बनी रशियन बिल्डिंग की शिकायत पीएम-सीएम से
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वृंदावन। रमणरेती में गैरकानूनी रूप से निर्मित श्री वृंदावन धाम ट्रस्ट की सात मंजिला रशियन इमारत को प्रशासन ने अवैध घोषित कर इमारत को खाली करने के जिलाधिकारी के आदेश प्रकरण में केंद्र और प्रदेश सरकार तक पहुंचा है। अधिवक्ता प्रहलादकृष्ण शुक्ला ने अपने ट्विटर एकाउंट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत सरकार के आवासन एवं शहरी विकास मंत्रालय के सचिव मनोज जोशी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश सरकार के मंत्री एके शर्मा, प्रदेश के मुख्यसचिव, गृह विभाग, उत्तर ब्रज तीर्थ विकास परिषद् के साथ जिलाधिकारी, एसएसपी मथुरा एवं मथुरा-वृंदावन नगर निगम को आधिकारिक ट्विटर पर शिकायत भेजी हैं।
उन्होंने अवैध सात मंजिला रशियन हाउस को ध्वस्त करने एवं समय-समय पर इस अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने लिखा है कि शुरू से ही रशियन हाउस को लेकर स्थानीय लोगों ने शिकायतें की थीं। इस पर विकास प्राधिकरण ने अवैध निर्माण को उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के विरूद्ध अवैध बताते हुए सीलिंग की कार्रवाई भी की थी।
इसके बाद सीलिंग को दरकिनार कर सात मंजिला इमारत को खड़ा कर लिया गया। उन्होंने लिखा है कि वर्ष 2020 इसी निर्माण में हुए अग्निकांड के चलते विकास प्राधिकरण की ओर से दोबारा इस इमारत के ऊपरी तीन मंजिल को अवैध बताते हुए सीलिंग की कार्रवाई की एवं अग्निशमन के नियमों का अनुपालन न किए जाने के चलते ट्रस्टियों पर मुकदमा भी दर्ज करवाया गया था। सीलिंग की कई बार हुई कार्रवाई के बावजूद भी इमारत बनकर तैयार हो जाती हैं, यह अधिकारियों की कार्यशैली पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता हैं।
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उन्होंने अवैध सात मंजिला रशियन हाउस को ध्वस्त करने एवं समय-समय पर इस अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने लिखा है कि शुरू से ही रशियन हाउस को लेकर स्थानीय लोगों ने शिकायतें की थीं। इस पर विकास प्राधिकरण ने अवैध निर्माण को उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के विरूद्ध अवैध बताते हुए सीलिंग की कार्रवाई भी की थी।
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इसके बाद सीलिंग को दरकिनार कर सात मंजिला इमारत को खड़ा कर लिया गया। उन्होंने लिखा है कि वर्ष 2020 इसी निर्माण में हुए अग्निकांड के चलते विकास प्राधिकरण की ओर से दोबारा इस इमारत के ऊपरी तीन मंजिल को अवैध बताते हुए सीलिंग की कार्रवाई की एवं अग्निशमन के नियमों का अनुपालन न किए जाने के चलते ट्रस्टियों पर मुकदमा भी दर्ज करवाया गया था। सीलिंग की कई बार हुई कार्रवाई के बावजूद भी इमारत बनकर तैयार हो जाती हैं, यह अधिकारियों की कार्यशैली पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता हैं।
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