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Mathura News: मासूम की मौत के बाद अवैध क्लिनिक सील
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नौहझील। लालपुर निवासी छह वर्षीय मासूम देव की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस के साथ बाजना स्थित प्रिया पॉली क्लिनिक पर कार्रवाई की है। सीएचसी प्रभारी डॉ. हेमराज सिंह की अगुवाई में टीम ने अस्पताल की जांच की, जिसमें अस्पताल अवैध और अपंजीकृत पाया गया। इसके बाद टीम ने तुरंत क्लिनिक को सील करते हुए आरोपी संचालक के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस संचालक की तलाश में जुट गई है।
शनिवार दोपहर करीब एक बजे सीएचसी प्रभारी नौहझील डॉ. हेमराज सिंह, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक रामबाबू सिंह, रविंद्र सिंह और अरुणेश कुमार गुप्ता के साथ थाना प्रभारी अंजीश कुमार व बाजना चौकी प्रभारी रूपचंद सिंह प्रिया पॉली क्लिनिक अस्पताल पहुंचे। दस्तावेजों की पड़ताल करने पर पता चला कि अस्पताल का पंजीकरण मनीष कुमार सिंह के नाम से था, जिसकी वैधता 30 अप्रैल को ही समाप्त हो चुकी थी। निरीक्षण के दौरान मौके पर कोई भी अधिकृत डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं मिला। दस्तावेजों में डॉक्टर नीरेश कुमार का नाम क्लिनिक से संबद्ध दर्ज था, लेकिन वे भी जांच के समय नदारद रहे।अस्पताल के भीतर बाजना निवासी गीता नाम की महिला चिंडौली निवासी मरीज राजकुमार का उपचार करते हुए पकड़ी गई। अवैध संचालन और बिना योग्यता के मरीजों की जान से खिलवाड़ किए जाने की पुष्टि होने पर प्रशासनिक टीम ने क्लिनिक को सील कर दिया। सीएचसी प्रभारी की तहरीर पर पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से क्लिनिक चलाने और लापरवाही के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
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- सरकारी शिक्षक पर अस्पताल संचालन का आरोप, रेड पड़ते ही भागे अपंजीकृत चिकित्सक
- सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बाजना स्थित इस अवैध प्रिया पॉली क्लिनिक अस्पताल का मुख्य संचालन एक सरकारी अध्यापक द्वारा किया जा रहा था। अस्पताल में शिक्षक के साथ मिलकर कई अपंजीकृत चिकित्सक मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे थे। शनिवार दोपहर जब सीएचसी प्रभारी और पुलिस की संयुक्त टीम क्लिनिक पर पहुंची तो इसकी भनक पहले ही संचालक को लग गई। पकड़े जाने के डर से उपचार कर रहे कथित अपंजीकृत चिकित्सक आनन-फानन में भर्ती मरीज को मौके पर ही छोड़कर भाग खड़े हुए।
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बड़े-बड़े बोर्डों पर बड़े दावे
- प्रिया पॉली क्लिनिक अस्पताल के बाहर मरीजों को आकर्षित करने के लिए संचालक ने बड़े-बड़े साइनबोर्ड लगा रखे थे। इन बोर्डों पर बाल रोग विशेषज्ञ, नैदानिक सेवाओं में विशिष्ट विशेषज्ञता और जहर खाने के इलाज जैसी गंभीर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे लिखे गए थे। बाहर से अस्पताल की चमक-धमक देखकर मरीज और उनके तीमारदार आसानी से झांसे में आ जाते थे। हालांकि, हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली।
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सरकारी अस्पताल में कराएं मुफ्त इलाज : सीएचसी प्रभारी
- जांच कार्रवाई के बाद सीएचसी प्रभारी डॉ. हेमराज सिंह ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी बीमारी की स्थिति में अपंजीकृत चिकित्सकों के झांसे में न आएं और सीधे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें। उन्होंने बताया कि सीएचसी पर महिला रोग विशेषज्ञ समेत कई अनुभवी डॉक्टर तैनात हैं। अस्पताल में मलेरिया, डेंगू सहित विभिन्न प्रकार की पैथोलॉजी जांचें पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध हैं। मरीजों को इसका लाभ उठाना चाहिए।
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शनिवार दोपहर करीब एक बजे सीएचसी प्रभारी नौहझील डॉ. हेमराज सिंह, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक रामबाबू सिंह, रविंद्र सिंह और अरुणेश कुमार गुप्ता के साथ थाना प्रभारी अंजीश कुमार व बाजना चौकी प्रभारी रूपचंद सिंह प्रिया पॉली क्लिनिक अस्पताल पहुंचे। दस्तावेजों की पड़ताल करने पर पता चला कि अस्पताल का पंजीकरण मनीष कुमार सिंह के नाम से था, जिसकी वैधता 30 अप्रैल को ही समाप्त हो चुकी थी। निरीक्षण के दौरान मौके पर कोई भी अधिकृत डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं मिला। दस्तावेजों में डॉक्टर नीरेश कुमार का नाम क्लिनिक से संबद्ध दर्ज था, लेकिन वे भी जांच के समय नदारद रहे।अस्पताल के भीतर बाजना निवासी गीता नाम की महिला चिंडौली निवासी मरीज राजकुमार का उपचार करते हुए पकड़ी गई। अवैध संचालन और बिना योग्यता के मरीजों की जान से खिलवाड़ किए जाने की पुष्टि होने पर प्रशासनिक टीम ने क्लिनिक को सील कर दिया। सीएचसी प्रभारी की तहरीर पर पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से क्लिनिक चलाने और लापरवाही के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
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- सरकारी शिक्षक पर अस्पताल संचालन का आरोप, रेड पड़ते ही भागे अपंजीकृत चिकित्सक
- सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बाजना स्थित इस अवैध प्रिया पॉली क्लिनिक अस्पताल का मुख्य संचालन एक सरकारी अध्यापक द्वारा किया जा रहा था। अस्पताल में शिक्षक के साथ मिलकर कई अपंजीकृत चिकित्सक मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे थे। शनिवार दोपहर जब सीएचसी प्रभारी और पुलिस की संयुक्त टीम क्लिनिक पर पहुंची तो इसकी भनक पहले ही संचालक को लग गई। पकड़े जाने के डर से उपचार कर रहे कथित अपंजीकृत चिकित्सक आनन-फानन में भर्ती मरीज को मौके पर ही छोड़कर भाग खड़े हुए।
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बड़े-बड़े बोर्डों पर बड़े दावे
- प्रिया पॉली क्लिनिक अस्पताल के बाहर मरीजों को आकर्षित करने के लिए संचालक ने बड़े-बड़े साइनबोर्ड लगा रखे थे। इन बोर्डों पर बाल रोग विशेषज्ञ, नैदानिक सेवाओं में विशिष्ट विशेषज्ञता और जहर खाने के इलाज जैसी गंभीर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे लिखे गए थे। बाहर से अस्पताल की चमक-धमक देखकर मरीज और उनके तीमारदार आसानी से झांसे में आ जाते थे। हालांकि, हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली।
सरकारी अस्पताल में कराएं मुफ्त इलाज : सीएचसी प्रभारी
- जांच कार्रवाई के बाद सीएचसी प्रभारी डॉ. हेमराज सिंह ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी बीमारी की स्थिति में अपंजीकृत चिकित्सकों के झांसे में न आएं और सीधे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें। उन्होंने बताया कि सीएचसी पर महिला रोग विशेषज्ञ समेत कई अनुभवी डॉक्टर तैनात हैं। अस्पताल में मलेरिया, डेंगू सहित विभिन्न प्रकार की पैथोलॉजी जांचें पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध हैं। मरीजों को इसका लाभ उठाना चाहिए।