{"_id":"6733b20bff58fb57ae0b52e4","slug":"if-you-are-having-trouble-breathing-get-yourself-tested-for-pneumonia-immediately-mathura-news-c-369-1-mt11007-120651-2024-11-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: सांस फूल रही है तो तत्काल कराएं निमोनिया की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: सांस फूल रही है तो तत्काल कराएं निमोनिया की जांच
विज्ञापन
मथुरा। बदलते मौसम में सावधान रहने की जरूरत है। तेज बुखार के साथ अगर सांस फूल रही हो तो लापरवाही न बरतें, तत्काल निमोनिया की जांच कराएं। यह एक गंभीर संक्रमण है, जो घातक हो सकता है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 20 से 30 मरीज निमोनिया से पीड़ित पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशान बच्चे और बुजुर्ग हैं। कारण, उनकी मांसपेशियां कमजोर होती हैं।
मौसम में बदलाव आने से एलर्जी के मरीजों की भी संख्या लगातार बढ़ रही है। एलर्जी के मरीजों के चेस्ट एक्स-रे क्लियर आ रहे हैं। इससे माता-पिता को लगता है कि बच्चे को कोई समस्या नहीं है जबकि डॉक्टरों का कहना है कि निमोनिया व एलर्जी में यही अंतर है। निमोनिया वाले बच्चों के चेस्ट एक्स-रे में धब्बे अलग ही दिखाई देते हैं लेकिन एलर्जी में ऐसा में नहीं होता, क्योंकि यह समस्या सांस की नली से संबंधित है।
जिला अस्पताल में डॉक्टर सिद्धार्थ धनगर के अनुसार खांसी व ठंड लगकर बुखार आना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, थकान और कमजोरी, तेजी से सांस लेना आदि निमोनिया के लक्षण हैं जबकि एलर्जी के मामले में खांसी व सांस लेने में परेशानी ज्यादा होती है।
विज्ञापन
पांच साल तक बच्चों के साथ अधिक दिक्कत
पांच साल तक के बच्चे और बुजुर्ग एलर्जी व निमोनिया से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई लोग एलर्जिक इनफेक्शन को निमोनिया समझ रहे हैं। अंतर समझने के लिए चेस्ट एक्स-रे कराना जरूरी हैै। इसके आधार पर उपचार दिया जाता है।
निमोनिया के लक्षण
तेज बुखार, खांसी के साथ बलगम, सीने में दर्द, सांस फूलना, दस्त, उल्टी, भूख न लगना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सर्दी के साथ बुखार आना, सिर दर्द।
बचाव के उपाय
सीएमओ डॉ. अजय जैन ने बताया कि डॉक्टर से सलाह लेकर टीके लगवाएं। इसके अलावा बच्चों के कपड़े गर्म पानी से धोएं। अगर किसी को खांसी, जुकाम है तो बच्चों और बुजुर्गों को खासतौर पर उनसे दूरी बनवाएं। धूल व प्रदूषण के संपर्क में आने से बचने की जरूरत है।
विज्ञापन
मौसम में बदलाव आने से एलर्जी के मरीजों की भी संख्या लगातार बढ़ रही है। एलर्जी के मरीजों के चेस्ट एक्स-रे क्लियर आ रहे हैं। इससे माता-पिता को लगता है कि बच्चे को कोई समस्या नहीं है जबकि डॉक्टरों का कहना है कि निमोनिया व एलर्जी में यही अंतर है। निमोनिया वाले बच्चों के चेस्ट एक्स-रे में धब्बे अलग ही दिखाई देते हैं लेकिन एलर्जी में ऐसा में नहीं होता, क्योंकि यह समस्या सांस की नली से संबंधित है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में डॉक्टर सिद्धार्थ धनगर के अनुसार खांसी व ठंड लगकर बुखार आना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, थकान और कमजोरी, तेजी से सांस लेना आदि निमोनिया के लक्षण हैं जबकि एलर्जी के मामले में खांसी व सांस लेने में परेशानी ज्यादा होती है।
विज्ञापन
पांच साल तक बच्चों के साथ अधिक दिक्कत
पांच साल तक के बच्चे और बुजुर्ग एलर्जी व निमोनिया से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई लोग एलर्जिक इनफेक्शन को निमोनिया समझ रहे हैं। अंतर समझने के लिए चेस्ट एक्स-रे कराना जरूरी हैै। इसके आधार पर उपचार दिया जाता है।
निमोनिया के लक्षण
तेज बुखार, खांसी के साथ बलगम, सीने में दर्द, सांस फूलना, दस्त, उल्टी, भूख न लगना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सर्दी के साथ बुखार आना, सिर दर्द।
बचाव के उपाय
सीएमओ डॉ. अजय जैन ने बताया कि डॉक्टर से सलाह लेकर टीके लगवाएं। इसके अलावा बच्चों के कपड़े गर्म पानी से धोएं। अगर किसी को खांसी, जुकाम है तो बच्चों और बुजुर्गों को खासतौर पर उनसे दूरी बनवाएं। धूल व प्रदूषण के संपर्क में आने से बचने की जरूरत है।