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Mathura News: मैं न-न करती हार गई, रंग डाल गयौ रसिया
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सुरभि होली में थिरकते श्रद्धालु
- फोटो : mathura
बरसाना (मथुरा)। मैं न-न करती हार गई, रंग डाल गयौ रसिया, सुरभि होली में होत यहां रंगन की भरमार, आगे-आगे ग्वाल पीछे-पीछे ब्रजनार। इसी भाव से साढ़े पांच सौ वर्ष पहले श्रील नारायण भट्ट ने राधारानी की प्रधान सखी ललिताजी के गांव ऊंचागांव में सुरभि होली प्रारंभ कराई थी।
बुधवार को श्रील नारायण भट्ट की समाधि स्थल पर इस होली का मंचन किया गया। इसमें ग्रामीण मद मस्त होकर नाच उठे। इस दौरान श्रील नारायण के वशंजों द्वारा उनकी समाधि पर गुलाल अर्पित कर होली प्रांम्भ की। रसियाओं की थाप पर गुर्जर समाज के महिला-पुरुषों ने लोकनृत्य किया। उड़ाए जा रहे अबीर-गुलाल में सराबोर श्रद्धालु अपने आपको धन्य मान रहे थे।
ब्रजाचार्य पीठ के प्रवक्ता घनश्यामराज भट्ट ने बताया कि लठामार होली से पहले श्रील नारायण भट्ट ने सुरभि होली की शुरूआत कराई थी। जब गोपियों के मना करने के बावजूद कृष्ण व उनके सखाओं ने उन पर रंग डाल दिया तो बदला लेने लिए सखियां राधारानी के पास गयीं और उनसे डंडा लेकर होली खेलने को कहा। एक सुर में सखियों ने कान्हा से हास-परिहास किया, इसलिए इसे सुरभि होली कहा जाता है।
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बुधवार को श्रील नारायण भट्ट की समाधि स्थल पर इस होली का मंचन किया गया। इसमें ग्रामीण मद मस्त होकर नाच उठे। इस दौरान श्रील नारायण के वशंजों द्वारा उनकी समाधि पर गुलाल अर्पित कर होली प्रांम्भ की। रसियाओं की थाप पर गुर्जर समाज के महिला-पुरुषों ने लोकनृत्य किया। उड़ाए जा रहे अबीर-गुलाल में सराबोर श्रद्धालु अपने आपको धन्य मान रहे थे।
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ब्रजाचार्य पीठ के प्रवक्ता घनश्यामराज भट्ट ने बताया कि लठामार होली से पहले श्रील नारायण भट्ट ने सुरभि होली की शुरूआत कराई थी। जब गोपियों के मना करने के बावजूद कृष्ण व उनके सखाओं ने उन पर रंग डाल दिया तो बदला लेने लिए सखियां राधारानी के पास गयीं और उनसे डंडा लेकर होली खेलने को कहा। एक सुर में सखियों ने कान्हा से हास-परिहास किया, इसलिए इसे सुरभि होली कहा जाता है।
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