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प्यारा मुझे बहुत था मगर छोड़ के आयी, हंसते हुए बचपन का नगर छोड़ आयी
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मथुरा। आरसीए बालिका स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना के स्वर्णिम वर्ष का शुभारंभ हवन यज्ञ के साथ हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. प्रीति जौहरी एवं प्रबंध समिति के अध्यक्ष रमेश मीतल, सचिव गिरीश अग्रवाल, उपाध्यक्ष रामबाबू अग्रवाल, राजेंद्र सराफ, आनंद मित्तल व विजय प्रकाश अग्रवाल ने किया। साध्वी ऋतंभरा ने छात्राओं को आशीर्वचन दिए। काव्यांजलि कार्यक्रम में पद्मिनी शर्मा ने ‘प्यारा मुझे बहुत था मगर छोड़ के आयी, हंसते हुए बचपन का नगर छोड़ आयी’ गीत सुनाया।
साध्वी ने कहा कि इस महाविद्यालय की छात्राओं में भविष्य को संवारने की अनेक संभावनाएं निहित हैं। भारत का भविष्य भारत की पुत्रियों एवं स्त्रियों के हाथ में है और अपने लिए नहीं अपितु अपने लोगों के लिए जिएं। महाविद्यालय के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में काव्यांजलि में डॉ. सरिता शर्मा के कविता पाठ ‘सारी दुनिया से दूर हो जाऊं तेरी आँखों का नूर हो जाऊं, तेरी राधा बनू ना बनू, तेरी मीरा हो जाऊं पर जमकर तालियां बजीं। गोपाल प्रसाद गोप ने ऊपरी मुस्कराओं नहीं बेवजह किसी का दिल दुखाओं नहीं’।
डॉ. रमाशंकर पांडेय ने ‘बलिदान देकर वरदान देश को दिया ऐसे मेरे देश को प्रणाम है’। कवि मनवीर ‘मधुर’ ने राष्ट्रप्रेम एवं ओज रस से युक्त काव्यपाठ करते हुए‘स्वार्थ सोच घर कर जाने पर, जीवन रण हो जाता है, मन में राम नहीं हो तो तन रावण हो जाता है’ को सराहा गया। डॉ. नीतू गोस्वामी ने ‘चाहे दौलत न दो चाहे शोहरत न दो, तुम जरा मुस्करा दो बहुत हो गया’का पाठ किया। अध्यक्षता करते हुए राधा गोविंद पाठक ने बेटी कविता का पाठ किया। डॉ. अनिल गहलौत, नारायण सिंह ने काव्यपाठ किया। संचालन डॉ. अर्चनापाल ने किया। डॉ. अशोक जौहरी, ओपी अग्रवाल, डॉ. यशपाल बघेल, पूर्व विधायक हुकुम चंद्र तिवारी, पूर्व विधायक चौधरी प्रणत पाल आदि उपस्थित रहे।
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साध्वी ने कहा कि इस महाविद्यालय की छात्राओं में भविष्य को संवारने की अनेक संभावनाएं निहित हैं। भारत का भविष्य भारत की पुत्रियों एवं स्त्रियों के हाथ में है और अपने लिए नहीं अपितु अपने लोगों के लिए जिएं। महाविद्यालय के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में काव्यांजलि में डॉ. सरिता शर्मा के कविता पाठ ‘सारी दुनिया से दूर हो जाऊं तेरी आँखों का नूर हो जाऊं, तेरी राधा बनू ना बनू, तेरी मीरा हो जाऊं पर जमकर तालियां बजीं। गोपाल प्रसाद गोप ने ऊपरी मुस्कराओं नहीं बेवजह किसी का दिल दुखाओं नहीं’।
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डॉ. रमाशंकर पांडेय ने ‘बलिदान देकर वरदान देश को दिया ऐसे मेरे देश को प्रणाम है’। कवि मनवीर ‘मधुर’ ने राष्ट्रप्रेम एवं ओज रस से युक्त काव्यपाठ करते हुए‘स्वार्थ सोच घर कर जाने पर, जीवन रण हो जाता है, मन में राम नहीं हो तो तन रावण हो जाता है’ को सराहा गया। डॉ. नीतू गोस्वामी ने ‘चाहे दौलत न दो चाहे शोहरत न दो, तुम जरा मुस्करा दो बहुत हो गया’का पाठ किया। अध्यक्षता करते हुए राधा गोविंद पाठक ने बेटी कविता का पाठ किया। डॉ. अनिल गहलौत, नारायण सिंह ने काव्यपाठ किया। संचालन डॉ. अर्चनापाल ने किया। डॉ. अशोक जौहरी, ओपी अग्रवाल, डॉ. यशपाल बघेल, पूर्व विधायक हुकुम चंद्र तिवारी, पूर्व विधायक चौधरी प्रणत पाल आदि उपस्थित रहे।
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