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Mathura News: शिक्षक कैसे करें बजट खर्च, बैंक का सर्वर दे रहा है दगा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 30 Mar 2025 12:37 AM IST
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How can teachers spend their budget, bank server is failing
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय। - फोटो : mathura
मथुरा। परिषदीय विद्यालयों में विभिन्न कार्यों के लिए मिला बजट खर्च करने का शिक्षकों पर दबाव है, लेकिन बैंक के सर्वर के आगे शिक्षकों की एक नहीं चल रही है। शिक्षकों ने तो अपनी कार्रवाई पूरी कर दी है, लेकिन फिर भी बजट लैप्स होने का डर सता रहा है। वहीं विभागीय अधिकारी लगातार शिक्षकों को पत्र पर पत्र जारी कर रहे हैं।
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जिले में संचालित 1536 परिषदीय विद्यालयों को कंपोजिट ग्रांट समेत अन्य मदों में शासन ने एन वक्त पर स्कूलों को बजट उपलब्ध कराया। मार्च के दूसरे पखवाड़े में ये बजट विद्यालय प्रबंध समिति के खातों में भेजा गया। इसके साथ ही अधिकारियों ने बजट खत्म करने का दबाव बनाने के लिए पत्र भी जारी कर दिए।
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दबाव में आकर शिक्षकों ने तो अपना काम किया, लेकिन अब बैंक का सर्वर दगा दे गया है। दरअसल स्कूलों के सभी खाते बैंक ऑफ बड़ौदा में संचालित हैं। शिक्षकों ने पीएफएमएस पोर्टल से प्रिंट पेमेंट एडवाइस जनरेट कर बैंक में जमा करा दी। लेकिन बैंकों से भुगतान नहीं हो पा रहा है। दरअसल बैंक का सर्वर ठप होने के कारण ये समस्या आ रही है।
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शिक्षक नेता अतुल सारस्वत ने बताया कि भुगतान के लिए ऑनलाइन जनरेट की गई प्रिंट पेमेंट एडवाइस 10 दिन तक ही मान्य है। इसके बाद स्वत: निरस्त हो जाएगा। वित्तीय वर्ष समापन में अब दो दिन ही बचे हैं, ऐसे में दो दिन में अगर भुगतान न हुआ तो पूरा बजट लैप्स हो जाएगा। शिक्षक परेशान हैं, बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
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न्यूनतम 25 हजार और अधिकतम 75 हजार की मिली है धनराशि
विद्यालय में कार्य कराए जाने के लिए वैसे तो सभी 1536 स्कूलों को ग्रांट भेजी गई है, लेकिन इसकी धनराशि अलग-अलग है। न्यूनतम 25 हजार रुपये तो अधिकतम 50 हजार रुपये की ग्रांट भेजी गई है। बीएसए सुनील दत्त ने पत्र जारी कर शिक्षकों को ग्रांट खर्च न करने पर वेतन रोकने की चेतावनी भी दी है।
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साल भर बजट देने में क्यों की लापरवाही
स्कूलों को बजट देने में साल भर लापरवाही की जाती रही। वित्तीय वर्ष समाप्त होने से कुछ देने पहले बजट देने से समस्या खड़ी हुई है। हर बार यही किया जाता है, बाद में शिक्षकों का बजट लैप्स होने पर उत्पीड़न किया जाता है।

गौरव यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्राशिसं
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शिक्षकों पर कार्रवाई का बनाते हैं दबाव

चाहे कोई भी काम हो शिक्षकों पर अनैतिक दबाव बनाया जाता है। अब बजट देर से मिलने पर भी शिक्षकों ने पीपीए बनाकर बैंक में दे दिए हैं। बैंक अगर भुगतान नहीं कर पा रहा है तो इसमें शिक्षकों की कोई गलती नहीं है।
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