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Mathura News: गंगाजल के लिए सांसद से आस, जल निगम ने लिखा पत्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Apr 2025 01:27 AM IST
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Hope for Gangajal from MP, Jal Nigam wrote a letter
मथुरा। जल निगम शहर के आसपास व देहात के क्षेत्रों में पीने योग्य पानी की तलाश में सतही जल के भरोसे बैठा है। विभाग के पास यही तीसरा विकल्प बचा है। हालांकि सतही जल स्रोत विलुप्त मिलने से अधिकतर प्रयास विफल हो चुके हैं। विभाग के अधिकारियों ने 24 अप्रैल को सांसद हेमा मालिनी को पत्र लिखकर 132 एमएलडी पेयजल की मांग की है।
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वर्तमान में मथुरा-वृंदावन की 39.59 फीसदी आबादी को विभिन्न संसाधनों के माध्यम से शुद्ध पेयजल आपूर्ति की जा रही है। इसमें 25 एमएलडी गंगाजल आपूर्ति भी शामिल है। यहां की 62.41 प्रतिशत आबादी अपने-अपने संसाधनों से प्यास बुझा रही है। जल निगम ने 62.41 फीसदी आबादी को मीठे पानी की आपूर्ति के लिए भूगर्भ जल की तलाश की, लेकिन प्रयास विफल हो गया।
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दर्जनों क्षेत्रों में टेस्टिंग में टीडीएस की मात्रा तीन हजार से अधिक मिली। इसलिए भूगर्भ जल से पेयजल आपूर्ति का प्रयास विफल हो गया। इसके बाद यमुना के सहारे जल स्रोत टटोले गए। यहां से भी जल निगम को नाकामी हाथ लगी। वर्तमान में 110 एमएलडी गंगाजल आपूर्ति के सापेक्ष 25 एमएलडी गंगाजल आपूर्ति की जा रही है। 85 एमएलडी शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए जल निगम की टीम को निराश ही हाथ लग रही है। ऐसे में गर्मी के मौसम में पेयजल आपूर्ति की तीन गुना मांग बढ़ने से विभागीय अधिकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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सहायक अभियंता नसीम अहमद सिद्दकी ने बताया है कि 24 अप्रैल को सांसद हेमामालिनी को पत्र लिखा है। उन्होंने 132 एमएलडी पेयजल आपूर्ति की मांग की है। अतिरिक्त गंगाजल आपूर्ति बढ़ाने से ही यह समस्या दूर हो सकेगी।

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यमुना के शोधित पानी पीने से लोगों ने किया था इन्कार
अधिकारियों का दावा है कि यमुना नदी के पानी से पेयजल आपूर्ति पूरी करने का प्रयास किया था। जल को संसाधनों के माध्यम से शोधित करके पीने योग्य बनाया गया, लेकिन लोगों व जनप्रतिनिधियों के विरोध के बाद प्रयास विफल हो गया। जिन-जिन क्षेत्रों में इस पानी की सप्लाई की गई। वहां के स्थानीय निवासी शिकायत करने लगे।
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