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किसान आत्महत्या न करें, धैर्य से लें काम: हेमा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 24 Apr 2015 12:00 AM IST
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गांव अनौड़ा में आयोजित किसान पंचायत में भाजपा नेताओं ने किसानों से सीधा संवाद किया और किसानों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान सांसद हेमा मालिनी ने किसानों के आत्महत्या करने पर दुख: व्यक्त करते हुए कहा कि किसान विश्वास नहीं खोए और धैर्य से काम लें। मानव जीवन बड़े ही भाग्य से मिलता है। भाजपा प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में काम नहीं कर रही है।
पंचायत की मुख्य अतिथि सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि उन्हें जब पता लगा कि मथुरा में किसानों की मेहनत और खून पसीने से तैयार की गई फसल नष्ट हो गई तो बड़ा दु:ख हुआ। जिले के दर्जनों गांवों में किसानों खेतों पर जाकर बर्बाद हुई फसल को देखा। इसके बाद वह किसानों के एक प्रतिनिधि मंडल के साथ जाकर वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिली और किसानों की समस्या से अवगत कराया। उनको मुआवजा दिलाने की मांग की। प्रदेश मुखिया अखिलेश यादव से भी बातचीत की थी। वृंदावन में जाकर किसानों को आपदा राशि के चेक दिए। उन्होंने बताया कि मैंने भी एक फिल्म बनाई थी और वह फ्लाप हो गई थी, लेकिन हिम्मत हराने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने आईटी हब, कंटेनर डिपो और छाता में बंद पड़ी चीनी मिल को चालू कराने का आश्वासन दिया।
प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह ने कहा कि हम भी किसान के बेटे हैं, जानते है कि फसल नष्ट होती है तो क्या होता है। पूरे प्रदेश में घूम कर किसानों के दुख-दर्द को जाना है। प्रदेश सरकार आज गलत बयानबाजी कर रही है। पैसा केंद्र से मिलता है और नाम अपना करते हैं। प्रधानमंत्री ने पहली बार बेमौसम बरसात को दैवी आपदा घोषित कर मुआवजा राशि बढ़ाई है। प्रदेश सरकार चाहती तो किसानों के ऋण माफ कर सकती थी। आज लेखपाल घर पर बैठ कर सर्वे कर रहे हैं। अगर लेखपाल किसानों के पास जाते और उनके नुकसान को देखते तो बर्बाद हुई फसल का ठीक आंकलन होता। दिल्ली में एक पार्टी की सभा में एक किसान पेड़ से लटक कर आत्महत्या कर लेता है और भाषणबाजी चलती रहती है। अन्नदाता के प्रति इतनी संवेदनहीनता ठीक नहीं है।
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कांग्रेस कहती है अब आ गए हैं आने से क्या होगा तुम्हारे आने से पिछला बाकी काम तो पूरा नहीं होगा। सत्ता से हटते ही जनता के दुख दर्द की याद आ जाती है।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष डीपी गोयल, पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, पूर्व विधायक प्रणत पाल सिंह, अजय कुमार पोइया, श्याम सिंह अहेरिया, राजेश चौधरी, रामप्रताप सिंह चौहान, एसके शर्मा, चेतन मलिक, ठा. कारिन्दा सिंह, ठा. मेघश्याम सिंह, देवेन्द्र शर्मा, सत्यपाल चौधरी, राकेश बंसल, बलवीर सिंह, मुकेश पाठक, सुनील चौधरी, महीपाल सिंह, रामकिशन पाठक, मनोज उपाध्याय आदि उपस्थित थे।
स्वागत, मालाओं से दूर रहे नेता
राया। गांव अनौड़ा में आयोजित किसान पंचायत के दौरान भाजपा नेता स्वागत व फूल मालाओं से दूर रहे। किसी को माला नहीं पहनाई गई। प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह ने कहा कि हमारा अन्नदाता परेशान हैं। ऐसे में स्वागत सम्मान अच्छा नहीं। इसलिए यमुना एक्सप्रेस वे से राया और कार्यक्रम स्थल तक कहीं भी मालाएं दिखाई नहीं दी।
किसानों के सवालों पर उलझन में नेता
राया। कार्यक्रम के दौरान किसानों द्वारा बार-बार सवाल दागने तथा अपनी बात रखने पर माहौल खराब होने लगा तो प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह अपने स्थान से उठ कर माइक संभाला। उन्होंने किसानों को समझाया कि वे किसानों की बात करने आए हैं। इस दौरान नीचे से दो चार ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण और जाट आरक्षण जैसे सवाल भी उठाए, बाद में उन्हें समझाया गया कि यह किसान पंचायत है।
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पंचायत की मुख्य अतिथि सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि उन्हें जब पता लगा कि मथुरा में किसानों की मेहनत और खून पसीने से तैयार की गई फसल नष्ट हो गई तो बड़ा दु:ख हुआ। जिले के दर्जनों गांवों में किसानों खेतों पर जाकर बर्बाद हुई फसल को देखा। इसके बाद वह किसानों के एक प्रतिनिधि मंडल के साथ जाकर वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिली और किसानों की समस्या से अवगत कराया। उनको मुआवजा दिलाने की मांग की। प्रदेश मुखिया अखिलेश यादव से भी बातचीत की थी। वृंदावन में जाकर किसानों को आपदा राशि के चेक दिए। उन्होंने बताया कि मैंने भी एक फिल्म बनाई थी और वह फ्लाप हो गई थी, लेकिन हिम्मत हराने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने आईटी हब, कंटेनर डिपो और छाता में बंद पड़ी चीनी मिल को चालू कराने का आश्वासन दिया।
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प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह ने कहा कि हम भी किसान के बेटे हैं, जानते है कि फसल नष्ट होती है तो क्या होता है। पूरे प्रदेश में घूम कर किसानों के दुख-दर्द को जाना है। प्रदेश सरकार आज गलत बयानबाजी कर रही है। पैसा केंद्र से मिलता है और नाम अपना करते हैं। प्रधानमंत्री ने पहली बार बेमौसम बरसात को दैवी आपदा घोषित कर मुआवजा राशि बढ़ाई है। प्रदेश सरकार चाहती तो किसानों के ऋण माफ कर सकती थी। आज लेखपाल घर पर बैठ कर सर्वे कर रहे हैं। अगर लेखपाल किसानों के पास जाते और उनके नुकसान को देखते तो बर्बाद हुई फसल का ठीक आंकलन होता। दिल्ली में एक पार्टी की सभा में एक किसान पेड़ से लटक कर आत्महत्या कर लेता है और भाषणबाजी चलती रहती है। अन्नदाता के प्रति इतनी संवेदनहीनता ठीक नहीं है।
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कांग्रेस कहती है अब आ गए हैं आने से क्या होगा तुम्हारे आने से पिछला बाकी काम तो पूरा नहीं होगा। सत्ता से हटते ही जनता के दुख दर्द की याद आ जाती है।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष डीपी गोयल, पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, पूर्व विधायक प्रणत पाल सिंह, अजय कुमार पोइया, श्याम सिंह अहेरिया, राजेश चौधरी, रामप्रताप सिंह चौहान, एसके शर्मा, चेतन मलिक, ठा. कारिन्दा सिंह, ठा. मेघश्याम सिंह, देवेन्द्र शर्मा, सत्यपाल चौधरी, राकेश बंसल, बलवीर सिंह, मुकेश पाठक, सुनील चौधरी, महीपाल सिंह, रामकिशन पाठक, मनोज उपाध्याय आदि उपस्थित थे।
स्वागत, मालाओं से दूर रहे नेता
राया। गांव अनौड़ा में आयोजित किसान पंचायत के दौरान भाजपा नेता स्वागत व फूल मालाओं से दूर रहे। किसी को माला नहीं पहनाई गई। प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह ने कहा कि हमारा अन्नदाता परेशान हैं। ऐसे में स्वागत सम्मान अच्छा नहीं। इसलिए यमुना एक्सप्रेस वे से राया और कार्यक्रम स्थल तक कहीं भी मालाएं दिखाई नहीं दी।
किसानों के सवालों पर उलझन में नेता
राया। कार्यक्रम के दौरान किसानों द्वारा बार-बार सवाल दागने तथा अपनी बात रखने पर माहौल खराब होने लगा तो प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह अपने स्थान से उठ कर माइक संभाला। उन्होंने किसानों को समझाया कि वे किसानों की बात करने आए हैं। इस दौरान नीचे से दो चार ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण और जाट आरक्षण जैसे सवाल भी उठाए, बाद में उन्हें समझाया गया कि यह किसान पंचायत है।