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Mathura News: घर-घर किशोरों की हीमोग्लोबिन की जांच करेगी स्वास्थ्य टीमें
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मथुरा। बच्चों से लेकर बड़ों तक हीमोग्लोबिन की कमी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में घर-घर किशोरों की हीमोग्लोबिन की जांच के लिए स्वास्थ्य टीमें दस्तक देंगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की 19 टीमें कार्य करेंगी। इससे पहले इन टीमों को विभाग द्वारा हीमोग्लोबिन मीटर दिए जाएंगे।
मथुरा के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में केंद्र की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत किशोरों में हीमोग्लोबिन की सही स्थिति का पता लगाने के साथ ही कमी होने पर समय पर दवाओं से स्थिति को ठीक करने का प्रयास तेज किए जाएंगे। इस कार्य में स्वास्थ्य विभाग की 19 टीमें लगेंगी। प्रत्येक टीम में दो डॉक्टर, एएनएम और फार्मासिस्ट होंगे। जो कि घर-घर जाकर दस्तक देंगी और दस से 19 वर्ष तक के किशोर-किशोरियों की हीमोग्लोबिन की जांच करेंगी।
हीमोग्लोबिन की जांच की रिपोर्ट मौके पर ही पता चल जाएगी। उसी के अनुसार टीम दवा उपलब्ध कराएगी। इसके लिए सभी 19 टीमों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा हीमोग्लोबिन मीटर दिए जाएंगे।
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मथुरा में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक छह माह से लेकर पांच वर्ष तक के 56.1 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी है, जबकि 15 से 49 वर्ष की 44.9 प्रतिशत महिलाओं में भी खून की कमी पाई गई। इसके अलावा 15 से 49 वर्ष की 44 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। इसके अलावा 15 से 49 वर्ष की उम्र के 22.8 प्रतिशत पुरुष भी खून की कमी झेल रहे हैं एवं 15 से 49 वर्ष की 44.9 महिलाओं में रक्त की कमी है।
डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर मैनेजर ओम शर्मा ने बताया कि जिले में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में कार्य कर रही 19 टीमों को हीमोग्लोबिन मीटर दिए जाएंगे। जिससे कि वह घर-घर जाकर किशोरों की जांच कर सकेंगी। इसकी तैयारी चल रही है।
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मथुरा के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में केंद्र की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत किशोरों में हीमोग्लोबिन की सही स्थिति का पता लगाने के साथ ही कमी होने पर समय पर दवाओं से स्थिति को ठीक करने का प्रयास तेज किए जाएंगे। इस कार्य में स्वास्थ्य विभाग की 19 टीमें लगेंगी। प्रत्येक टीम में दो डॉक्टर, एएनएम और फार्मासिस्ट होंगे। जो कि घर-घर जाकर दस्तक देंगी और दस से 19 वर्ष तक के किशोर-किशोरियों की हीमोग्लोबिन की जांच करेंगी।
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हीमोग्लोबिन की जांच की रिपोर्ट मौके पर ही पता चल जाएगी। उसी के अनुसार टीम दवा उपलब्ध कराएगी। इसके लिए सभी 19 टीमों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा हीमोग्लोबिन मीटर दिए जाएंगे।
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मथुरा में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक छह माह से लेकर पांच वर्ष तक के 56.1 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी है, जबकि 15 से 49 वर्ष की 44.9 प्रतिशत महिलाओं में भी खून की कमी पाई गई। इसके अलावा 15 से 49 वर्ष की 44 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। इसके अलावा 15 से 49 वर्ष की उम्र के 22.8 प्रतिशत पुरुष भी खून की कमी झेल रहे हैं एवं 15 से 49 वर्ष की 44.9 महिलाओं में रक्त की कमी है।
डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर मैनेजर ओम शर्मा ने बताया कि जिले में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में कार्य कर रही 19 टीमों को हीमोग्लोबिन मीटर दिए जाएंगे। जिससे कि वह घर-घर जाकर किशोरों की जांच कर सकेंगी। इसकी तैयारी चल रही है।