मथुरा। हाथी-घोड़ा पालकी...जय कन्हैया लाल की, जयकारों के साथ जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर कान्हा की नगरी झूम उठी। चारों ओर अलौकिक, अद्भुत और अकल्पनीय उल्लास नजर आया। हर गली, सड़क पर भजन और भक्ति का रंग बरसता रहा। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के साथ-साथ ब्रजवासी भी उल्लास में सराबोर रहे।
लल्ला के जन्म की पूर्व संध्या पर कान्हा की नगरी दुल्हन की तरह सजी-धजी दिखी। प्रत्येक चौक-चौराहे लाइटिंग से चकाचौंध नजर आए। जन्मोत्सव का उल्लास कैसा है, यह शहर की सड़कें देखकर ही पता चल रहा है। रंग-बिरंगे कपड़ों से चौराहे सज गए और रोशनी चार चांद लगाती रही। शहर की सड़कों पर हर तरफ श्रद्धालु ही श्रद्धालु नजर आते रहे। जन्मस्थान जाने वाले हर रास्ते पर बस भीड़ ही भीड़ रही। अधिक भीड़ के कारण अपनों से बिछुड़े लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।