श्रीराधाकृष्ण की लीला स्थली वृंदावन में फिर हरे-भरे होंगे वन-उपवन और बगीचे
तीर्थनगरी वृंदावन में कभी वन-उपवनों की भरमार थी। इनकी लता-पताओं के बीच ही ठाकुर जी की आराधना के लिए संत महंत यहां आया करते थे। अनेक रियासतों के राजा महाराजाओं ने भी यहां कुंज की परंपरा को मंदिर निर्माण के साथ आगे बढ़ाया। जिनके अब यहां अवशेष ही नजर आते हैं। इस स्थिति को बदलने की पहल ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने की है।
वृंदावन माइनर का जायजा लिया
शुक्रवार को परिषद के सीईओ नगेंद्र प्रताप के नेतृत्व में सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग और विकास प्राधिकरण की टीम वृंदावन पहुंची। टीम में शामिल अधिकारी और कर्मचारियों ने छटीकरा रोड स्थित गणपति आश्रम से कैलाश नगर बाबड़ी तक वृंदावन माइनर का जायजा लिया। इसमें अनेक स्थानों पर अतिक्रमण, कूड़ा और टूटा हुआ मिला। इसमें आगरा कैनाल से पानी का प्रवाह लाने पर विचार किया गया है।
इसके बाद सभी अधिकारियों ने चैतन्य विहार से हरगूलाल गूल को भी देखा, जो दावानल कुंड से होते हुए बिहारीजी की बगीची तक पहुंचती है। करीब 11 किलोमीटर की कैनाल और गूल का निरीक्षण के बाद सिंचाई अधिकारियों को इनमें पानी लाने के लिए योजना तैयार करने के निर्देश दिए। इस दौरान प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता कौशलेंद्र, सिंचाई सहायक अभियंता नवनीत गर्ग, अवर अभियंता पवन उपाध्याय के अलावा कपिल उपाध्याय और अनंत शर्मा भी साथ थे।