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मास्क जरूरी, दो गज दूरी का कहीं पालन, कहीं उड़ रही हैं धज्जियां
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जिला पूर्ति कार्यालय में मास्क लगाए बिना बैठे अधिकारी और कर्मचारी।
- फोटो : MATHURA
मथुरा। अनलॉक-2 शुरू हो गया है, पर कोरोना संक्रमण को लेकर जनपद में सरकारी कार्यालय गंभीर दिखाई नहीं दे रहे। कलक्ट्रेट, राजीव भवन और तहसील में अफसर ही नदारद थे। फरियादी चक्कर लगाकर परेशान होकर लौट रहे थे। कहीं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा था तो कहीं, बिना मास्क लगाए ही कर्मचारी कार्य कर रहे थे।
अनलॉक-2 के पहले दिन अमर उजाला टीम बुधवार को कलक्ट्रेट पर पहुंचकर हाल जाना। डीएम कार्यालय पर यहां सन्नाटा पसरा हुआ था। कोई भी फरियादी यहां नहीं दिखा। सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी मास्क लगाकर ड्यूटी दे रहे थे। यहां आने वालों की थर्मल स्क्रीनिंग के साथ सैनिटाइजर का इंतजाम था। तहसील कार्यालय में फरियादी जरूर दिखे, लेकिन उनकी समस्या समाधान के लिए कोई अफसर नहीं था।
राजीव भवन के मुख्यद्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग व सैनिटाइजर की व्यवस्था थी। अंदर कई अफसरों के कार्यालय पर ताले लटके हुए थे। समाज कल्याण अधिकारी और डीपीआरओ की कुर्सियां खाली थीं। कर्मचारी दबी जुबां कह रहे थे कि दोनों अफसर आ ही नहीं रहे। यहां कर्मचारी मास्क लगाकर काम निपटा रहे थे। डीएसओ कार्यालय में बेफिक्री देखने को मिली। यहां कर्मचारी हो या फिर इंस्पेक्टर सभी बिना मास्क के पंचायत में व्यस्त थे। यहां सामाजिक दूरी का भी पालन नहीं हो रहा था।
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तहसील के काट रहे किसान चक्कर
तहसील में फरह के गांव परखम निवासी राकेश और हरिश्चंद्र को तहसील के चक्कर काटते हुए 16 दिन हो चुके हैं, बस उनके चार ट्रैक्टर रिलीज नहीं हो सके। दोनों का कहना था कि 15 जून को उनके ट्रैक्टर बंद किए थे, जिन्हें छुड़वाने के लिए लगातार वह चक्कर काट रहे हैं, पर कोई अफसर ही मिलता नहीं। सुबह आ जाते हैं, फिर शाम को लौट जाते हैं।
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अनलॉक-2 के पहले दिन अमर उजाला टीम बुधवार को कलक्ट्रेट पर पहुंचकर हाल जाना। डीएम कार्यालय पर यहां सन्नाटा पसरा हुआ था। कोई भी फरियादी यहां नहीं दिखा। सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी मास्क लगाकर ड्यूटी दे रहे थे। यहां आने वालों की थर्मल स्क्रीनिंग के साथ सैनिटाइजर का इंतजाम था। तहसील कार्यालय में फरियादी जरूर दिखे, लेकिन उनकी समस्या समाधान के लिए कोई अफसर नहीं था।
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राजीव भवन के मुख्यद्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग व सैनिटाइजर की व्यवस्था थी। अंदर कई अफसरों के कार्यालय पर ताले लटके हुए थे। समाज कल्याण अधिकारी और डीपीआरओ की कुर्सियां खाली थीं। कर्मचारी दबी जुबां कह रहे थे कि दोनों अफसर आ ही नहीं रहे। यहां कर्मचारी मास्क लगाकर काम निपटा रहे थे। डीएसओ कार्यालय में बेफिक्री देखने को मिली। यहां कर्मचारी हो या फिर इंस्पेक्टर सभी बिना मास्क के पंचायत में व्यस्त थे। यहां सामाजिक दूरी का भी पालन नहीं हो रहा था।
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तहसील के काट रहे किसान चक्कर
तहसील में फरह के गांव परखम निवासी राकेश और हरिश्चंद्र को तहसील के चक्कर काटते हुए 16 दिन हो चुके हैं, बस उनके चार ट्रैक्टर रिलीज नहीं हो सके। दोनों का कहना था कि 15 जून को उनके ट्रैक्टर बंद किए थे, जिन्हें छुड़वाने के लिए लगातार वह चक्कर काट रहे हैं, पर कोई अफसर ही मिलता नहीं। सुबह आ जाते हैं, फिर शाम को लौट जाते हैं।