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Mathura News: चमक उठेंगे चार प्राचीन देवालय, निखरेगी भव्यता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Apr 2026 01:57 AM IST
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Four Ancient Temples to Shine Bright; Their Grandeur Will Be Enhanced
वृंदावन। मंदिरों की नगरी में प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में बड़ी पहल की गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नगर के चार सबसे प्रमुख और प्राचीन मंदिरों की दशा सुधारने जा रहा है। इनमें मदनमोहन मंदिर, जुगलकिशोर मंदिर, राधावल्लभ और गोविंद देव मंदिर शामिल हैं। मरम्मत और सौंदर्यीकरण के बाद ये स्थल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बनेंगे। संवाद
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राधावल्लभ मंदिर:- ठाकुर राधावल्लभ मंदिर का निर्माण मुगल शासक अकबर के खजांची अब्दुल रहीम खानखाना के दीवान सुंदरदास भटनागर ने पांच सौ वर्ष पूर्व संवत 1564 में कराया था, जो कि लाल बलुआ पत्थरों से बना है। करीब दो सौ साल पहले मंदिर के पास रसोई का निर्माण किया गया। एएसआई संरक्षण सहायक नितिन प्रिया राहुल ने बताया की रसोई की पुरानी छत हटाकर नई छत डालने और दीवारों पर चूना-प्लास्टर का कार्य चल रहा है। इस पर करीब 12 लाख रुपये खर्च होंगे।
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गोविंद देव मंदिर: इतिहास और आधुनिकता के संगम गोविंद देव मंदिर को सन 1590 में अकबर के शासनकाल के 34वें वर्ष में आमेर के राजा मानसिंह द्वारा बनाया गया था। यह मंदिर लगभग 434 साल पुराना है। इसके संरक्षण का कार्य जल्द शुरू होगा साथ ही पूर्व में लगी लाइटों के खराब होने पर उनकी मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।
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जुगलकिशोर मंदिर: केसीघाट स्थित 1570 में बना यह मंदिर लगभग 454 साल पुराना है। यहां बुंदेलखंडी वास्तुकला देखने को मिलती है। एएसआई द्वारा मंदिर के आंतरिक एवं बाहरी हिस्से में आकर्षक लाइटें लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है ताकि रात में भी मंदिर की भव्यता बनी रहे। आने वाले समय में जल्द ही प्राचीन जुगलकिशोर मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगा।

प्राचीन सप्तदेवालयों में एक श्रीमदन मोहन मंदिर लगभग 500 वर्ष पुराना है। जमीन से 70 फीट ऊंचे लाल पत्थर के मंदिर का निर्माण चैतन्य महाप्रभु के पार्षद सनातन गोस्वामी महाराज की प्रेरणा से मुल्तान के व्यापारी रामदास कपूर ने संवत 1647 में कराया था। तभी से यमुना किनारे स्थित मंदिर में ठाकुर की सेवा पूजा सनातन गोस्वामियों द्वारा की जा रही है। संरक्षित मंदिर में वर्तमान में केमिकल से सफाई की जा रही है। पाथवे एवं दीवार निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। यह कार्य लगभग 25 लाख रुपये से किया जाएगा।



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नगर के प्राचीन मंदिरों के संरक्षण के साथ उन्हें आकर्षक बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है। जिस प्रकार गोविंद देव मंदिर को लाइटों से सजाया गया है, उसी तर्ज पर जुगलकिशोर मंदिर का भी सौंदर्यीकरण होगा।
- नितिन प्रिया राहुल, संरक्षण सहायक (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण)
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