मथुरा सांझी महोत्सव: विदेशी भक्तों ने समझा संस्कृति कला का महत्व, कभी राधारानी बनाती थीं कलाकृति
इन्द्रद्युम्न स्वामी ने कहा वर्तमान में श्रीकृष्ण भक्ति से जुड़ी इस कला के अंतर्राष्ट्रीय प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। डॉ.सीमा मोरवाल ने ब्रज के लोक जगत में बनने वाली सांझी के संदर्भ में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की।
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विदेशों से आए प्रतिभागियों को दिया प्रशिक्षण
यूक्रेन, उजबेकिस्तान, रशिया, कजाकिस्तान, जर्मनी, बेलारूस, फ्रांस, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, अमेरिका, मालदोवा एवं दक्षिण अफ्रीका आदि देशों से आए प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया। आचार्य शैलेंद्रकृष्ण भट्ट ने कहा सांझी ब्रज की महत्वपूर्ण कला है। श्रीकृष्ण संस्कृति में रची-पगी इस परंपरा को अंतर्राष्ट्रीय फलक पर साझा करने की जरूरत है। आचार्य सुमित गोस्वामी ने कहा सांझी कला देवालयी परंपरा में उपासना का अंग है। आचार्य विभुकृष्ण भट्ट ने कहा ज्यामितीय कला तथा अलंकारिक बेल-बूटों के संयोजन से सांझी का कला पक्ष उत्तरोत्तर समृद्ध हुआ है।
इन्होंने किया प्रतिभाग
इन्द्रद्युम्न स्वामी ने कहा वर्तमान में श्रीकृष्ण भक्ति से जुड़ी इस कला के अंतर्राष्ट्रीय प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। डॉ.सीमा मोरवाल ने ब्रज के लोक जगत में बनने वाली सांझी के संदर्भ में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. अजय कुमार पांडेय डॉ. राजेश शर्मा, मंजरीदासी, नरोत्तमदास, पद्यावलीदासी, मंजुलादासी, चंचल अक्षी, वृंदावनसुंदरी, ब्रजचंद्रिका, वृंदारानी, ऋषिकेश गंगा, विष्णुतत्वदास, कर्तामसी, धनिष्ठा, मनीकुंडला, ब्रजसुंदरी, श्यामाप्रेमी के अलावा हनुमान प्रसाद धानुका विद्यालय की शिक्षिकायें एवं छात्र-छात्रायें अंजलि गुप्ता, शिल्पीरानी, प्रीति सिकरवार, राधिका, रेखा, वर्तिका, नवनीत शर्मा, यशवंत, प्रज्ञा शर्मा ने प्रतिभाग किया।
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