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मानवता: वृद्धा को बेटे के अंतिम संस्कार के लिए दी आर्थिक मदद
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मथुरा। जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग के बाहर स्ट्रेचर पर बेटे का शव लिए खड़ी वृद्धा वहां से गुजर रहे हर किसी की तरफ उम्मीद भरी नजर से देख रही थी। तंग आर्थिक हालात के कारण बेटे के अंतिम संस्कार के लिए उसके पास एक पैसा नहीं था। मदद मांगती इस महिला को देख लोगों की भीड़ लग गई। मानवता का परिचय देते हुए इनमें से अनेक लोगों व अस्पताल स्टाफ ने उसकी आर्थिक मदद की। इसके बाद एंबुलेंस कर्मियों ने वृंदावन के मोक्षधाम में उसके पुत्र का अंतिम संस्कार कराया।
लखनऊ के केसरबाग निवासी वृद्धा रामरती ने बताया कि वह तीन वर्ष पहले 39 वर्षीय बेटे राम सिंह के घुटनों का इलाज कराने के लिए मथुरा आई थी। नया बस स्टैंड के पास गोपाल नगर में झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रहने लगी। बेटे के घुटनों का तो इलाज तो नहीं हुआ, वह बीमार और हो गया। बुधवार को पेट में पानी भरने के कारण जिला अस्पताल में उसकी मौत हो गई। चलने फिरने में अक्षम महिला को पता चला तो उसका कलेजा बैठ गया।
एक तो बेटे को खोने का गम और अंतिम संस्कार के लिए पैसों की चिंता। उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करे। वह जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग गेट पर बैठकर विलाप करने लगी। यह देख आसपास लोगों की भीड़ लग गई। लोगों को पता चला कि बेटे के अंतिम संस्कार के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं तो अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ, डॉक्टर व रोगियों के परिजन मदद को आगे आए। इसके बाद एंबुलेंसकर्मी शव को वृंदावन के मोक्षधाम ले गए और अंतिम संस्कार कराया।
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लखनऊ के केसरबाग निवासी वृद्धा रामरती ने बताया कि वह तीन वर्ष पहले 39 वर्षीय बेटे राम सिंह के घुटनों का इलाज कराने के लिए मथुरा आई थी। नया बस स्टैंड के पास गोपाल नगर में झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रहने लगी। बेटे के घुटनों का तो इलाज तो नहीं हुआ, वह बीमार और हो गया। बुधवार को पेट में पानी भरने के कारण जिला अस्पताल में उसकी मौत हो गई। चलने फिरने में अक्षम महिला को पता चला तो उसका कलेजा बैठ गया।
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एक तो बेटे को खोने का गम और अंतिम संस्कार के लिए पैसों की चिंता। उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करे। वह जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग गेट पर बैठकर विलाप करने लगी। यह देख आसपास लोगों की भीड़ लग गई। लोगों को पता चला कि बेटे के अंतिम संस्कार के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं तो अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ, डॉक्टर व रोगियों के परिजन मदद को आगे आए। इसके बाद एंबुलेंसकर्मी शव को वृंदावन के मोक्षधाम ले गए और अंतिम संस्कार कराया।
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