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Mathura News: एडवोकेट कमीशन को तथ्य देने के लिए एक हजार से अधिक पन्नों की फाइल तैयार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 17 Dec 2023 12:57 AM IST
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File of more than one thousand pages ready to give facts to Advocate Commission
एडवोकेट कमीशन को तथ्य देने के लिए एक हजार से अधिक पन्नों की फाइल तैयार
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- जन्मभूमि पक्ष ने तैयार कराई फाइल, 50 से अधिक किताबों का किया है उल्लेख
- डॉक्यूमेंट्री साक्ष्य के तौर पर पेश की जाएगी फाइल
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा एडवोकेट कमीशन को मंजूरी दिए जाने के बाद जन्मभूमि पक्ष दस्तावेज की फाइल तैयार करने में जुट गया है। करीब एक हजार पन्नों की फाइल तैयार की जा रही है, जिसे बतौर साक्ष्य एडवोकेट कमीशन को सौंपा जाएगा।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि राजस्व अभिलेखों की एक अलग फाइल तैयार की गई है, जिसमें खसरा, खतौनी के दस्तावेज शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कि कटरा केशव देव की 13.37 एकड़ जमीन का उल्लेख, चकबंदी 1395 व फसली दस्तावेज में है। इसके अलावा खसरा रिपोर्ट की प्रमाणित नकल भी जुटाई है। इसमें खेवट संख्या 255 एवं खसरा संख्या 825 में यह भूमि दर्ज है। इसका मालिकाना हक श्री ठाकुर कृष्ण जन्मभूमि के पास होने का उल्लेख है। वहीं, खतौनी 1424 फसली संख्या का भी मालिकाना हक श्री ठाकुर कृष्ण जन्मभूमि के नाम पर है। इन सभी को फाइलबंद किया जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न लेखकों द्वारा लिखित पुस्तकों, जिनमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख है, उन्हें भी जुटा लिया है। धार्मिक शास्त्रों, जिनमें श्रीकृष्ण का जन्म कटरा केशव देव भूमि पर होने का उल्लेख है, उसे भी एडवोकेट कमीशन को उपलब्ध कराया जाएगा। यह सभी डॉक्यूमेंट्री दस्तावेज के तौर पर मान्य कराए जाएंगे।
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मराठों ने किया था नजूल की भूमि घोषित



श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कटरा केशव देव की भूमि के संबंध में अंग्रेज कलेक्टर एफएस ग्राउज द्वारा लिखित मथुरा मैमायर एवं अन्य कई पुस्तकों में वर्णन है कि 1618 ईसवी में ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला ने कटरा केशव देव की भूमि पर जन्मभूमि मंदिर निर्माण कराया था। औरंगजेब ने 1670 में मंदिर को ध्वस्त कर शाही मस्जिद ईदगाह का निर्माण करा दिया। इसके बाद 4 अप्रैल 1770 को गोवर्धन युद्ध हुआ, जिसे दौलतराव सिंधिया ने जीता था। उस वक्त मराठा पेशवा महाजी सिंधिया थे। उन्होंने जीत के बाद आगरा-मथुरा पर आधिपत्य जमा लिया। इन्होंने कटरा केशव देव की भूमि पर पोतरा कुंड का निर्माण कराया था। सन् 1803 में इसे नजूल की भूमि यानी सरकारी जमीन घोषित किया गया। इसी वर्ष ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठों का युद्ध हुआ। जिसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने जीत लिया। सन् 1815 में इस जमीन की ईस्ट इंडिया कंपनी ने नीलामी कराई। बनारस के राजा पटनीमल ने इसे अंग्रेजों से 13400 रुपये में खरीद लिया। 1832 में मुस्लिम पक्ष कोर्ट चला गया। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष का दावा खारिज कर दिया और संपत्ति का स्वामित्व राजा पटनीमल के वारिसों का ही माना गया। 1860 में बनारस के राजा के वारिस राजा नरसिंह दास के पक्ष में डिक्री हो गई। इस दौरान हिन्दू-मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद चलता रहा। 1920 के हाईकोर्ट के फैसले में मुस्लिम पक्ष को फिर से निराशा मिली। कोर्ट ने कहा कि 13.37 एकड़ जमीन पर मुस्लिम पक्ष का कोई अधिकार नहीं है। 1944 में 13.37 एकड़ जमीन पटनीमल के वारिस राय किशनदास ने पं मदनमोहन मालवीय और गणेश दत्त गोस्वामी व भीखनलाल अत्रे के नाम 13400 रुपये लेकर कर दी थी। जेके बिड़ला ने इस राशि का भुगतान किया था। इसी जमीन पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर का निर्माण हुआ। विवादित संपत्ति पर कभी भी मुस्लिम पक्ष के स्वामित्व का कोई उल्लेख इतिहास में नहीं मिलता है। यही राजस्व व अन्य अभिलेखों में दर्ज है।
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कांग्रेस ने जन्मभूमि विवाद से किनारा किया
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह प्रकरण से कांग्रेस ने किनारा कर लिया है। जिलाध्यक्ष भगवान सिंह वर्मा ने कहा कि यह मामला कोर्ट में लंबित है। खुले मंच पर अब इस पर चर्चा या बयानबाजी का कोई औचित्य नहीं है। दोनों पक्षों में से चाहे कोई भी पक्ष, उसके समर्थक हों। कांग्रेस न्याय व्यवस्था में आस्था रखने वाली पार्टी है। किसी के पास कोई दस्तावेज है तो उसे कोर्ट को उपलब्ध कराएं। पार्टी से संबंधित मथुरा जिला कार्यकारिणी का कोई भी पदाधिकारी, कार्यकर्ता बयानबाजी करता है तो उसे उसका निजी बयान माना जाएगा। कांग्रेस की ओर से उठाए गए इस कदम के पीछे आगामी लोकसभा चुनाव में वोटों पर निगाह रखने वाला निर्णय माना जा रहा है।
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कंस किले के कारागार में हुआ था श्रीकृष्ण का जन्म



सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष डा. वकील कुरैशी ने कहा कि पुराणों में उल्लेख है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कंस कारागार में हुआ था, जो कि कुशक गली, स्वामी घाट पर कंस किले में स्थित है। ऐसे में यह बात आधारहीन है कि कटरा केशव देव की भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। 18 दिसंबर को सुनवाई में जो भी आदेश होगा, उसका पालन करेंगे। श्रीराम जन्मभूमि के प्रकरण में भी कोर्ट का आदेश मुस्लिम पक्ष ने मान्य किया था। इस पूरे प्रकरण में मुस्लिम पक्ष विधिक राय ले रहा है। 1968 के समझौते को दोनों पक्षों ने माना था। इसे बरकरार रखना चाहिए। इसके अलावा 1991 में पूजा स्थल अधिनियम लागू हुआ, उसमें कानून बना कि श्रीराम जन्मभूमि को छोड़कर अन्य सभी स्थल, जो कि 1947 के बाद से अस्तित्व में हैं। उनकी यथास्थिति रहेगी। उसका पालन करना चाहिए।


कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष आबिद हुसैन ने कहा कि 1968 में जो समझौता हुआ, उसकी डिक्री कोर्ट में दाखिल है। 1991 में पूजा स्थल अधिनियम आया। इसमें सिर्फ राम जन्मभूमि को अलग रखा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान को अलग रखने का कोई उल्लेख नहीं है। अल्पसंख्यक सभा संगठन की प्रदेश प्रवक्ता शबनम कुरैशी ने कहा है कि इस मुद्दे को लेकर सियासत और राजनीतिक की रोटियां ना पकाएं। शाही ईदगाह कमेटी कानून की बात कानून से करेगी, जो लोग शाही ईदगाह के मुद्दे को लेकर आपस में भ्रम फैलाकर भाईचारा बिगाड़ना चाहते हैं, ऐसे लोगों के खिलाफ प्रशासन सख्त कार्रवाई करें।
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