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धधकते अंगारों से गुजरा हीरालाल पंडा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 26 Mar 2016 12:08 AM IST
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मथुरा में होली
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प्रह्लाद बन हीरालाल ने आखिर साहस जुटा ही लिया। भगवान विष्णु के जयघोष के साथ वह प्रहलाद कुंड से निकले और होली की प्रचंड ज्वाला और दहकते अंगारों से गुजर गए। अंगारों से निकलते ही महंत बालकदास ने उन्हें गोदी में उठा लिया। भक्त प्रहलाद के जयघोष से गांव फालैन गुंजायमान हो उठा।
हीरालाल पंडा के लिए भक्त प्रहलाद बनकर जलती लपटों से गुजरने का ये दूसरा ही मौका रहा। गुरुवार को दिनभर गांव में अबीर-गुलाल उड़ाया गया और चौपाइयों का गायन हुआ।
हीरालाल पंडा प्रह्लाद मंदिर पर पिछले एक माह से अन्न का परित्याग कर फलाहार कर रहे थे। होली में निकलने से पूर्व उन्होंने 24 घंटे तक लगातार हवन-यज्ञ, पूजा-पाठ किया। जैसे ही दीपक की लौ ठंडी लगी हीरालाल पंडा गुरुवार तड़के सवा 4 बजे प्रहलाद कुंड में स्नान के लिए पहुंचा।
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उनकी बहन भी कुंड से लोटा में पानी भरकर होलिका के समीप पहुंच गईं और अग्नि पर जल छिड़का। संकेत मिलते ही हीरालाल होली की प्रचंड लपटों के बीच से आगे बढ़ा और भगवान विष्णु का नाम लेता हुआ अंगारों से गुजर गया।
इस अनूठे दृश्य को देखने वालों को एकाएक अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ। इसके बाद दिन में प्रहलाद मंदिर के चारों ओर मेला सा लगा।
इससे पूर्व प्रहलाद लीला को साकार करने के लिए गांव में भाईचारे के पांच गांवों की होली एकसाथ रखी गई। सभी गांवों के लोग होली नृत्य करते, ढोल-मजीरे बजाते, गुलाल और अबीर की बरसात करते हुए प्रहलाद मंदिर पर पहुंचे। यहां गांव की टोलियों ने फाग और रसिया का गायन किया।
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हीरालाल पंडा के लिए भक्त प्रहलाद बनकर जलती लपटों से गुजरने का ये दूसरा ही मौका रहा। गुरुवार को दिनभर गांव में अबीर-गुलाल उड़ाया गया और चौपाइयों का गायन हुआ।
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हीरालाल पंडा प्रह्लाद मंदिर पर पिछले एक माह से अन्न का परित्याग कर फलाहार कर रहे थे। होली में निकलने से पूर्व उन्होंने 24 घंटे तक लगातार हवन-यज्ञ, पूजा-पाठ किया। जैसे ही दीपक की लौ ठंडी लगी हीरालाल पंडा गुरुवार तड़के सवा 4 बजे प्रहलाद कुंड में स्नान के लिए पहुंचा।
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उनकी बहन भी कुंड से लोटा में पानी भरकर होलिका के समीप पहुंच गईं और अग्नि पर जल छिड़का। संकेत मिलते ही हीरालाल होली की प्रचंड लपटों के बीच से आगे बढ़ा और भगवान विष्णु का नाम लेता हुआ अंगारों से गुजर गया।
इस अनूठे दृश्य को देखने वालों को एकाएक अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ। इसके बाद दिन में प्रहलाद मंदिर के चारों ओर मेला सा लगा।
इससे पूर्व प्रहलाद लीला को साकार करने के लिए गांव में भाईचारे के पांच गांवों की होली एकसाथ रखी गई। सभी गांवों के लोग होली नृत्य करते, ढोल-मजीरे बजाते, गुलाल और अबीर की बरसात करते हुए प्रहलाद मंदिर पर पहुंचे। यहां गांव की टोलियों ने फाग और रसिया का गायन किया।