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Mathura News: अधिक शोर कर रहा सुनने की क्षमता को कमजोर
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मथुरा। शहर में बढ़ता ध्वनि प्रदूषण लोगों की सुनने की क्षमता पर असर डाल रहा है। 150 से 200 डेसिबल तक की आवाज के संपर्क में आने वाले लोग बहरापन और कान से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल के ईएनटी (कान, नाक और गला) विभाग में रोजाना ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें सुनाई कम देना, कान में तेज दर्द, झनझनाहट और चक्कर आने जैसी शिकायतें हैं।
जिला अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ पांडेय ने बताया कि कई मामलों में मरीजों के कान के पर्दे (ईयरड्रम) में छेद तक पाया गया है जो तेज ध्वनि के सीधे प्रभाव का परिणाम है। कुछ मरीज ऐसे भी हैं, जिनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हो चुकी है। डीजे, लाउडस्पीकर, बारात, धार्मिक आयोजनों और औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार बढ़ता शोर इसका मुख्य कारण बन रहा है।
उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य मानकों के मुताबिक 45 डेसिबल से अधिक ध्वनि के संपर्क में लंबे समय तक रहना भी कानों के लिए नुकसानदेह है, जबकि शहर में कई स्थानों पर यह स्तर कई गुना अधिक दर्ज किया जा रहा है। युवा वर्ग तेज संगीत और हेडफोन के अधिक उपयोग के कारण तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है।
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चेतावनी दी कि यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो आने वाले समय में सुनने की समस्या एक बड़ी जनस्वास्थ्य चुनौती बन सकती है। तेज आवाज से दूरी बनाना, इयरप्लग का इस्तेमाल करना और हेडफोन की आवाज सीमित रखना बेहद जरूरी है।
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जिला अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ पांडेय ने बताया कि कई मामलों में मरीजों के कान के पर्दे (ईयरड्रम) में छेद तक पाया गया है जो तेज ध्वनि के सीधे प्रभाव का परिणाम है। कुछ मरीज ऐसे भी हैं, जिनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हो चुकी है। डीजे, लाउडस्पीकर, बारात, धार्मिक आयोजनों और औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार बढ़ता शोर इसका मुख्य कारण बन रहा है।
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उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य मानकों के मुताबिक 45 डेसिबल से अधिक ध्वनि के संपर्क में लंबे समय तक रहना भी कानों के लिए नुकसानदेह है, जबकि शहर में कई स्थानों पर यह स्तर कई गुना अधिक दर्ज किया जा रहा है। युवा वर्ग तेज संगीत और हेडफोन के अधिक उपयोग के कारण तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है।
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चेतावनी दी कि यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो आने वाले समय में सुनने की समस्या एक बड़ी जनस्वास्थ्य चुनौती बन सकती है। तेज आवाज से दूरी बनाना, इयरप्लग का इस्तेमाल करना और हेडफोन की आवाज सीमित रखना बेहद जरूरी है।