{"_id":"67e44f286c398c355307500a","slug":"every-third-patient-suffering-from-pcos-mathura-news-c-369-1-mt11007-127031-2025-03-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: हर तीसरा मरीज पीसीओएस से पीड़ित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: हर तीसरा मरीज पीसीओएस से पीड़ित
विज्ञापन
मथुरा। अनियमित जीवनशैली, खराब खानपान और कम शारीरिक सक्रियता का असर सिर्फ मोटापे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निसंतानता की गंभीर समस्या को भी जन्म दे रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, प्रतिदिन जिला महिला अस्पताल में आने वाले औसतन 120 मरीजों में हर तीसरा मरीज पीसीओएस की समस्या से पीड़ित है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्णा शर्मा के अनुसार, पुरुष और महिला दोनों की सेहत पर अस्वस्थ जीवनशैली का नकारात्मक असर दिख रहा है। खराब खानपान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसे डॉक्टर गले में मोतियों की माला जैसी स्थिति भी कहते हैं। करीब 10 साल पहले तक 15 से 20 प्रतिशत ऐसे मामले देखने में आते थे। अब यह आंकड़ा 40 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है।
उन्होंने बताया कि पुरुषों में भी गलत खानपान का असर स्पर्म काउंट और क्वालिटी पर पड़ता है। बाहर के खाने में मिलाए जाने वाले प्रिजर्वेटिव्स और केमिकल्स टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को प्रभावित कर पुरुषों की फर्टिलिटी पर नकारात्मक असर डालते हैं।
विज्ञापन
असंतुलित होते हार्मोंस
उन्होंने बताया कि बाहर का खाना खाने से शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है, जिससे हार्मोनल असंतुलन होता है। इससे अंडाशय में सिस्ट बनने लगती हैं। इससे पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं और महिलाओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।
शारीरिक निष्क्रियता भी बनी वजह
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहिनी व्यास के अनुसार शारीरिक गतिविधियों की कमी भी बांझपन का एक बड़ा कारण बन रही है। पहले लोग नियमित रूप से शारीरिक श्रम करते थे, लेकिन आज के दौर में घंटों ऑफिस में बैठकर काम करने, एक्सरसाइज न करने और तनाव भरे जीवन ने महिलाओं में पीसीओएस व पुरुषों में शुक्राणु की गुणवत्ता घटाने की समस्या को जन्म दिया है।
विज्ञापन
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्णा शर्मा के अनुसार, पुरुष और महिला दोनों की सेहत पर अस्वस्थ जीवनशैली का नकारात्मक असर दिख रहा है। खराब खानपान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसे डॉक्टर गले में मोतियों की माला जैसी स्थिति भी कहते हैं। करीब 10 साल पहले तक 15 से 20 प्रतिशत ऐसे मामले देखने में आते थे। अब यह आंकड़ा 40 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि पुरुषों में भी गलत खानपान का असर स्पर्म काउंट और क्वालिटी पर पड़ता है। बाहर के खाने में मिलाए जाने वाले प्रिजर्वेटिव्स और केमिकल्स टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को प्रभावित कर पुरुषों की फर्टिलिटी पर नकारात्मक असर डालते हैं।
विज्ञापन
असंतुलित होते हार्मोंस
उन्होंने बताया कि बाहर का खाना खाने से शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है, जिससे हार्मोनल असंतुलन होता है। इससे अंडाशय में सिस्ट बनने लगती हैं। इससे पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं और महिलाओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।
शारीरिक निष्क्रियता भी बनी वजह
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहिनी व्यास के अनुसार शारीरिक गतिविधियों की कमी भी बांझपन का एक बड़ा कारण बन रही है। पहले लोग नियमित रूप से शारीरिक श्रम करते थे, लेकिन आज के दौर में घंटों ऑफिस में बैठकर काम करने, एक्सरसाइज न करने और तनाव भरे जीवन ने महिलाओं में पीसीओएस व पुरुषों में शुक्राणु की गुणवत्ता घटाने की समस्या को जन्म दिया है।