{"_id":"981482d48dc4362b3029bbe865163fab","slug":"devotees-enlightened-crores-lamp-on-the-bank-of-yamuna-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सवा करोड़ दीप जला शुद्ध यमुना की कामना ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सवा करोड़ दीप जला शुद्ध यमुना की कामना
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Mon, 16 Mar 2015 11:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्राचीन जानकीवल्लभ मंदिर के तत्वावधान में विश्व शांति और यमुना शुद्धीकरण की मंगल कामना के लिए सोमवार को यमुना किनारे सवा करोड़ दीप प्रज्ज्वलित किए गए। नेपाल के काठमांडू, जनकपुर, मुक्तिनारायण, इटारी, विराट नगर, धनगढ़ी आदि स्थानों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
केशी घाट पर जगद्गुरु स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज ने यमुना की आरती उतारी और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। स्वामी अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि नदियों पर ही मानव का अस्तित्व टिका हुआ है। स्वामी गोविंददास ने कहा कि गंगा-यमुना से भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों के भक्तों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। समाजसेवी अंकित वार्ष्णेय ने कहा कि नदियों के संरक्षण के लिए जनमानस को जागरूक होना पड़ेगा। इसके बाद नेपाल और ब्रजमंडल के भक्तों ने संयुक्त रूप से यमुना किनारे सजे सवा करोड़ दीपों को वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य प्रज्ज्वलित किया। इसके बाद दीपों की परिक्रमा की गई और यमुना की आरती उतारी। हरिकृष्णा, हरि प्रपन्नाचार्य, जगन्नाथाचार्य, रामानुज भंडारी, राजकमल ओझा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
केशी घाट पर जगद्गुरु स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज ने यमुना की आरती उतारी और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। स्वामी अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि नदियों पर ही मानव का अस्तित्व टिका हुआ है। स्वामी गोविंददास ने कहा कि गंगा-यमुना से भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों के भक्तों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। समाजसेवी अंकित वार्ष्णेय ने कहा कि नदियों के संरक्षण के लिए जनमानस को जागरूक होना पड़ेगा। इसके बाद नेपाल और ब्रजमंडल के भक्तों ने संयुक्त रूप से यमुना किनारे सजे सवा करोड़ दीपों को वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य प्रज्ज्वलित किया। इसके बाद दीपों की परिक्रमा की गई और यमुना की आरती उतारी। हरिकृष्णा, हरि प्रपन्नाचार्य, जगन्नाथाचार्य, रामानुज भंडारी, राजकमल ओझा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन