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40 करोड़ से सजेंगी बांकेबिहारी की गलियां
अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 17 May 2016 11:10 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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अब अपना वृंदावन और सजेगा। कान्हा उपवन क्षेत्र तो विकसित होगा ही, इस पूरे क्षेत्र के विकास में भी चार चांद लगाने का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया गया है। विश्वबैंक की प्रो-पूअर डेवलपमेंट स्कीम में 80 करोड़ के कार्यों पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। इसमें 40 करोड़ रुपये ठाकुर बांकेबिहारी की कुंज गलियों को सजाने में खर्च होंगे, बाकी 40 करोड़ से कान्हा उपवन क्षेत्र को विकसित किया जाएगा।
मंगलवार को विश्व बैंक की टीम के साथ मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण सभागार में डीएम राजेश कुमार की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें पर्यटन विभाग ने वृंदावन स्थित बांकेबिहारी मंदिर से जुड़ने वाली 13 गलियों के विकास का प्रस्ताव दिया। इसे संशोधित करते हुए सभी 21 गलियों को एक रूप में सजाने के निर्देश दिए गए। साथ ही यहां पर्यटन और श्रद्धालुओं के लिए जनसुविधाएं बढ़ाने के प्रस्तावों पर भी सहमति बनी।
इसके अलावा विश्व बैंक की टीम के साथ वृंदावन में दो पार्किंग स्थल भी विकसित किए जाएंगे। यह पार्किंग कालीदह और दारुख में बनेंगी। इस पर करीब 40 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान लगाया गया है। इसके अतिरिक्त 40 करोड़ का खर्च वन क्षेेत्र के विकास पर होगा। अहिल्यागंज के आसपास वन क्षेत्र को नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा। फिलहाल यहां 25 एकड़ क्षेत्र को इसके लिए प्रस्तावित किया गया है। हालांकि, मथुरा-वृंदावन मार्ग पर वन क्षेत्र का दायरा करीब 300 एकड़ से ज्यादा है, जो यमुना किनारे स्थित है। इस क्षेत्र को पर्यटकों को मंदिर दर्शन समय के अलावा यहां कुछ वक्त ठहरने के उद्देश्य से तैयार किया जाएगा।
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बैठक में दोनों ही प्रोजेक्ट की डीपीआर 15 दिन में तैयार करने की बात तय हुई। जून में टेंडर और अगस्त माह में कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। इस दौरान विश्व बैंक की टीम में शामिल स्टेफिना, एमवीडीए उपाध्यक्ष सीपी सिंह, चीफ इंजीनियर आरके शुक्ला, एक्सईएन डीके शर्मा, एई अमित कादियान, पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव, शालिनी महाजन और सतेन्द्र पांडेय, आर्किटेक्ट मयंक गर्ग, उज्ज्वल ब्रज के सचिव अनंत शर्मा सहित वन, उद्यान सहित विभिन्न विभागों के अफसर मौजूद रहे।
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मंगलवार को विश्व बैंक की टीम के साथ मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण सभागार में डीएम राजेश कुमार की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें पर्यटन विभाग ने वृंदावन स्थित बांकेबिहारी मंदिर से जुड़ने वाली 13 गलियों के विकास का प्रस्ताव दिया। इसे संशोधित करते हुए सभी 21 गलियों को एक रूप में सजाने के निर्देश दिए गए। साथ ही यहां पर्यटन और श्रद्धालुओं के लिए जनसुविधाएं बढ़ाने के प्रस्तावों पर भी सहमति बनी।
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इसके अलावा विश्व बैंक की टीम के साथ वृंदावन में दो पार्किंग स्थल भी विकसित किए जाएंगे। यह पार्किंग कालीदह और दारुख में बनेंगी। इस पर करीब 40 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान लगाया गया है। इसके अतिरिक्त 40 करोड़ का खर्च वन क्षेेत्र के विकास पर होगा। अहिल्यागंज के आसपास वन क्षेत्र को नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा। फिलहाल यहां 25 एकड़ क्षेत्र को इसके लिए प्रस्तावित किया गया है। हालांकि, मथुरा-वृंदावन मार्ग पर वन क्षेत्र का दायरा करीब 300 एकड़ से ज्यादा है, जो यमुना किनारे स्थित है। इस क्षेत्र को पर्यटकों को मंदिर दर्शन समय के अलावा यहां कुछ वक्त ठहरने के उद्देश्य से तैयार किया जाएगा।
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बैठक में दोनों ही प्रोजेक्ट की डीपीआर 15 दिन में तैयार करने की बात तय हुई। जून में टेंडर और अगस्त माह में कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। इस दौरान विश्व बैंक की टीम में शामिल स्टेफिना, एमवीडीए उपाध्यक्ष सीपी सिंह, चीफ इंजीनियर आरके शुक्ला, एक्सईएन डीके शर्मा, एई अमित कादियान, पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव, शालिनी महाजन और सतेन्द्र पांडेय, आर्किटेक्ट मयंक गर्ग, उज्ज्वल ब्रज के सचिव अनंत शर्मा सहित वन, उद्यान सहित विभिन्न विभागों के अफसर मौजूद रहे।