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जागेंगे देव, शादियों के लिए करना होगा इंतजार
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मथुरा। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान या फिर देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। इसी के साथ मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। इस बार विवाह आदि का मुहूर्त १५ दिन बाद शुरू हो रहा है। इस दिन केवल तुलसी-सालिगराम के विवाह का शुभ संयोग है।
ज्योतिषाचार्य अजय कुमार तैलंग ने बताया कि एकादशी तिथि 3 नवंबर को शाम 07:30 बजे शुरू हो रही है। समापन अगले दिन 4 नवंबर को शाम 06:08 बजे होगा। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर एकादशी का व्रत शुक्रवार को रखा जाएगा और इसी दिन देवों को जगाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि देवों के जगने पर तुलसी-शालिगराम विवाह से मंदिरों की अनुपम छटा देखने को मिलेगी। शुक्र उदय होने पर विवाह आदि के मुहूर्त प्रारंभ हो जाएंगे। बताया कि प्राचीन गणित के कुछ पंचांग के अनुसार 24, 25, 26 नवंबर को भी विवाह के मुहूर्त हैं। अधिकांश पंचांग 27-28 नवंबर तथा दिसंबर मास में 2,3,4 7, 8 ,9 ,14, तारीख के विवाह आदि के मुहूर्त दर्शा रहे हैं। कु छ पंचांग 20 ,21 नवंबर की रात्रि में तथा कुछ पंचांग 23-24 में शुक्र उदय लिखते हैं।
ज्योतिषाचार्य आलोक गुप्ता के अनुसार 5 नवंबर शनिवार को तुलसी विवाह किया जाएगा। इसके बाद विवाह मुहूर्तों के लिए लोगों को 15 दिन से ज्यादा समय तक इंतजार करना होगा। तुलसी विवाह का दिन अबूझ मुहूर्त शादी-विवाह के लिए माना जाता है लेकिन इस साल ऐसा संभव नहीं हो पाएगा। ज्योतिषों के अनुसार विवाह तब ही हो सकते हैं जब शुक्र उदित हो। शुक्र तारे का उदय विवाह के शुभ मुहूर्त के लिए जरूरी है, 2 अक्तूबर को अस्त हुए शुक्र ग्रह 23 नवंबर को उदित होंगे। शुक्र के डूबने के कारण 23 नवंबर 2022 तक विवाह नहीं हो सकेंगे।
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मथुरा। चंद्रग्रहण पर आठ नवंबर को श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मंदिर के समय में परिवर्तन किया गया। श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को सभी मंदिर प्रात: 5:00 बजे मंगला आरती के साथ खुलेंगे। तदोपरांत ठाकुरजी को माखन-मिश्री भोग, बाल-भोग एवं राजभोग अर्पित करने के पश्चात प्रात: 8:00 बजे मंदिर के पट बंद हो जाएंगे। सायंकाल ग्रहण मोक्ष के पश्चात श्रीठाकुरजी को स्नान आदि के बाद नूतन वस्त्र, आभूषण धारण कराए जाएंगे। सायं 7:30 बजे से ठाकुरजी के दर्शन भक्तों को पुन: प्राप्त होंगे। शयन आरती के उपरांत मंदिर के पट रात्रि 9:00 बजे बंद होंगे। लीलामंच पर भजन-गायन होगा जो ग्रहण मोक्ष सायं 6:18 बजे तक चलेगा। गायक जगदीश ब्रजवासी दोपहर 2:00 बजे से भजन प्रस्तुत करेंगे। प्रात: 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक श्रीकृष्ण संकीर्तन मंडल के रसिक भक्तजन भजन गायन करेंगे। संवाद
मथुरा। मंदिर ठाकु र द्वारिकाधीश के दर्शन का समय देवोत्त्थान एकादशी से परिवर्तित होने जा रहा है। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि देवोत्थान एकादशी के दिन से दर्शन के सायंकाल के समय में परिवर्तन हो रहा है।
मंगला, शृंगार, ग्वाल और राजभोग के दर्शन नियमानुसार पूर्ववत रहेंगे। उध्यापन के दर्शन शाम 7:30 बजे, मंडप के दर्शन रात्रि 8:15 बजे, जागरण की झांकी रात्रि 10:00 और 11:45 बजे तुलसी शालिग्राम का विवाह होगा। तत्पश्चात मंगला, शृंगार, ग्वाल, राजभोग के दर्शन प्रात: काल को सुबह 4:30 बजे से 5:00 बजे तक अर्थात 5 नवंबर को सुबह की कोई झांकी नहीं होगी। सायंकाल से दर्शन का परिवर्तित समय प्रभावी होगा। इसमें 3:30 बजे से 3:50 बजे तक अध्यापन के दर्शन होंगे। भोग के दर्शन 4:20 से 4:40 तक, संध्या आरती 4:55 से 5:10 तक और शयन के दर्शन 6:00 बजे से 7:00 बजे तक होंगे।
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ज्योतिषाचार्य अजय कुमार तैलंग ने बताया कि एकादशी तिथि 3 नवंबर को शाम 07:30 बजे शुरू हो रही है। समापन अगले दिन 4 नवंबर को शाम 06:08 बजे होगा। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर एकादशी का व्रत शुक्रवार को रखा जाएगा और इसी दिन देवों को जगाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि देवों के जगने पर तुलसी-शालिगराम विवाह से मंदिरों की अनुपम छटा देखने को मिलेगी। शुक्र उदय होने पर विवाह आदि के मुहूर्त प्रारंभ हो जाएंगे। बताया कि प्राचीन गणित के कुछ पंचांग के अनुसार 24, 25, 26 नवंबर को भी विवाह के मुहूर्त हैं। अधिकांश पंचांग 27-28 नवंबर तथा दिसंबर मास में 2,3,4 7, 8 ,9 ,14, तारीख के विवाह आदि के मुहूर्त दर्शा रहे हैं। कु छ पंचांग 20 ,21 नवंबर की रात्रि में तथा कुछ पंचांग 23-24 में शुक्र उदय लिखते हैं।
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ज्योतिषाचार्य आलोक गुप्ता के अनुसार 5 नवंबर शनिवार को तुलसी विवाह किया जाएगा। इसके बाद विवाह मुहूर्तों के लिए लोगों को 15 दिन से ज्यादा समय तक इंतजार करना होगा। तुलसी विवाह का दिन अबूझ मुहूर्त शादी-विवाह के लिए माना जाता है लेकिन इस साल ऐसा संभव नहीं हो पाएगा। ज्योतिषों के अनुसार विवाह तब ही हो सकते हैं जब शुक्र उदित हो। शुक्र तारे का उदय विवाह के शुभ मुहूर्त के लिए जरूरी है, 2 अक्तूबर को अस्त हुए शुक्र ग्रह 23 नवंबर को उदित होंगे। शुक्र के डूबने के कारण 23 नवंबर 2022 तक विवाह नहीं हो सकेंगे।
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मथुरा। चंद्रग्रहण पर आठ नवंबर को श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मंदिर के समय में परिवर्तन किया गया। श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को सभी मंदिर प्रात: 5:00 बजे मंगला आरती के साथ खुलेंगे। तदोपरांत ठाकुरजी को माखन-मिश्री भोग, बाल-भोग एवं राजभोग अर्पित करने के पश्चात प्रात: 8:00 बजे मंदिर के पट बंद हो जाएंगे। सायंकाल ग्रहण मोक्ष के पश्चात श्रीठाकुरजी को स्नान आदि के बाद नूतन वस्त्र, आभूषण धारण कराए जाएंगे। सायं 7:30 बजे से ठाकुरजी के दर्शन भक्तों को पुन: प्राप्त होंगे। शयन आरती के उपरांत मंदिर के पट रात्रि 9:00 बजे बंद होंगे। लीलामंच पर भजन-गायन होगा जो ग्रहण मोक्ष सायं 6:18 बजे तक चलेगा। गायक जगदीश ब्रजवासी दोपहर 2:00 बजे से भजन प्रस्तुत करेंगे। प्रात: 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक श्रीकृष्ण संकीर्तन मंडल के रसिक भक्तजन भजन गायन करेंगे। संवाद
मथुरा। मंदिर ठाकु र द्वारिकाधीश के दर्शन का समय देवोत्त्थान एकादशी से परिवर्तित होने जा रहा है। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि देवोत्थान एकादशी के दिन से दर्शन के सायंकाल के समय में परिवर्तन हो रहा है।
मंगला, शृंगार, ग्वाल और राजभोग के दर्शन नियमानुसार पूर्ववत रहेंगे। उध्यापन के दर्शन शाम 7:30 बजे, मंडप के दर्शन रात्रि 8:15 बजे, जागरण की झांकी रात्रि 10:00 और 11:45 बजे तुलसी शालिग्राम का विवाह होगा। तत्पश्चात मंगला, शृंगार, ग्वाल, राजभोग के दर्शन प्रात: काल को सुबह 4:30 बजे से 5:00 बजे तक अर्थात 5 नवंबर को सुबह की कोई झांकी नहीं होगी। सायंकाल से दर्शन का परिवर्तित समय प्रभावी होगा। इसमें 3:30 बजे से 3:50 बजे तक अध्यापन के दर्शन होंगे। भोग के दर्शन 4:20 से 4:40 तक, संध्या आरती 4:55 से 5:10 तक और शयन के दर्शन 6:00 बजे से 7:00 बजे तक होंगे।