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बयान से मुकरे चश्मदीद, अटल के धेवते का हत्यारोपी बरी
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 02 Apr 2015 11:53 PM IST
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के धेवते को चलती ट्रेन से फेंकने के आरोपी के खिलाफ जीआरपी के साक्ष्य कमजोर पड़े। चश्मदीद गवाही से मुकर गए और संदेह का लाभ आरोपी रामजी को देते हुए न्यायालय ने उसे दोषमुक्त करार दिया है। अभियोजन पक्ष ने आदेश के अध्ययन के बाद उच्च न्यायालय में अपील की बात कही है।
24 जनवरी 2004 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के धेवते मनीष मिश्रा अपने दोस्त राकेश के साथ मथुरा से कोसी छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से जा रहे थे। वृंदावन रोड और छाता के बीच ट्रेन में उनका कुछ लोगों से झगड़ा हो गया था। इसमें कुछ लोगों ने मनीष और राकेश के साथ मारपीट कर दी और मनीष को चलती ट्रेन से धक्का दिया। इसके चलते मनीष की मृत्यु हो गई।
मारपीट में दोस्त राकेश घायल हो गए थे। मामले में आठ फरवरी को बिलासपुर जीआरपी ने गजा पाइसा निवासी रामजी वर्मा को मनीष की हत्या के आरोप मेें गिरफ्तार किया। उसे मथुरा जीआरपी के हवाले कर दिया। आरोपी कोरबा छत्तीसगढ़ में काम करता है। अपर सत्र न्यायधीश-9 रमेश चंद्र दिवाकर ने मामले की अंतिम सुनवाई में आरोपी को दोषमुक्त करार दिया है।
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अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी कर रहे सहायक शासकीय अधिवक्ता रविंद्र कुमार ने बताया उन्होंने छह चश्मदीद गवाह और 28 पुलिस व अन्य गवाहों को न्यायालय में पेश किया था। गवाहों के मुकरने के कारण आरोपी को लाभ मिल गया। अब वह आदेश का अध्ययन कर रहे हैं। जल्द ही उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
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24 जनवरी 2004 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के धेवते मनीष मिश्रा अपने दोस्त राकेश के साथ मथुरा से कोसी छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से जा रहे थे। वृंदावन रोड और छाता के बीच ट्रेन में उनका कुछ लोगों से झगड़ा हो गया था। इसमें कुछ लोगों ने मनीष और राकेश के साथ मारपीट कर दी और मनीष को चलती ट्रेन से धक्का दिया। इसके चलते मनीष की मृत्यु हो गई।
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मारपीट में दोस्त राकेश घायल हो गए थे। मामले में आठ फरवरी को बिलासपुर जीआरपी ने गजा पाइसा निवासी रामजी वर्मा को मनीष की हत्या के आरोप मेें गिरफ्तार किया। उसे मथुरा जीआरपी के हवाले कर दिया। आरोपी कोरबा छत्तीसगढ़ में काम करता है। अपर सत्र न्यायधीश-9 रमेश चंद्र दिवाकर ने मामले की अंतिम सुनवाई में आरोपी को दोषमुक्त करार दिया है।
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अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी कर रहे सहायक शासकीय अधिवक्ता रविंद्र कुमार ने बताया उन्होंने छह चश्मदीद गवाह और 28 पुलिस व अन्य गवाहों को न्यायालय में पेश किया था। गवाहों के मुकरने के कारण आरोपी को लाभ मिल गया। अब वह आदेश का अध्ययन कर रहे हैं। जल्द ही उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।