औरंगजेब की कृष्णभक्त पुत्रीः नाम पड़ा ‘मुगलों की मीरा’, जिससे प्रेम किया उसे हाथियों से कुचलवा दिया गया
औरंगजेब की पुत्री जेबुन्निसा महान कृष्ण भक्त थी। कृष्ण से उसके प्रेम की कोई सीमा नहीं थी, इसलिए उसे मुगलों की मीरा कहा जाने लगा। पिता को उससे घृणा होती थी। औरंगजेब ने उसके कृष्ण भक्त होने की वजह से उसे किला में कैद कर दिया था।
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उसकी कजरे की रेख में अप्रितम सौंदर्य की झलक दिखती थी। पायल के घुघरुंओं में जीवन का संगीत और उसकी हर अदा में उसे प्रेमी की चितवन नजर आती थी। जब भी वह उस मोहन, मन-मोहन को याद करती उसे सामने दिखते थे। पिता को पुत्री का यह कृष्ण प्रेम रास नहीं आया। नाराज होकर उसे सलीमगढ़ के किले में कैद की सजा दी। यहां वह सदैव के लिए अपने प्रियतम श्रीकृष्ण की बाहों विलीन हो गई।
जी, हां हम बात कर रहे हैं कृष्ण के नाम तक से भी वैर करने वाले औरंगजेब की पहली पुत्री जेबुन्निसा की। जिसे मुगलों की मीरा भी कहा जाता है। 15 फरवरी 1638 को जन्म लेने वाली कृष्ण की भक्त जेबुन्निसा औरंगजेब की बेगम दिलरस बानो की पहली संतान थी। सुंदर होने के साथ ही वह विद्वान भी थी। उसने तीन वर्ष में कुरान याद कर लिया और सात वर्ष में हाफिजा बन गई।
जिससे प्यार किया, पिता ने उसे हाथियों से कुचलवा दिया
शायरी-गजल लिखना शुरू कर दिया। पिता औरंगजेब से छुपकर मुशायरों में जाने लगी। नाम छिपाकर मख्फी के नाम से लिखना शुरू किया। उसने जिससे प्यार किया, उस शायर को पिता ने हाथियों से कुचलवा दिया। वक्त के साथ-साथ कृष्ण भक्ति में लीन हो गई। पिता को यह सब नागवार गुजरने लगा।
मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मस्थान का मंदिर जो अपने विराट स्वरूप के चलते आगरा से दिखता था, जेबुन्निसा वहीं से प्रभु को याद करती । बार-बार समझाने के बाद जब पुत्री ने रास्ता नहीं बदला तो उसे दिल्ली के सलीमगढ़ के किले में कैद की सजा दी। किले उसे सिर्फ और सिर्फ प्रभु श्रीकृष्ण का दीदार होने लगा। उसकी सांसों से छंद और शायरी बनकर प्रेम बाहर निकलता रहा।
उसे मुगलों की मीरा कहा जाने लगा
कृष्ण प्रेम के कारण ही उसे मुगलों की मीरा कहा जाने लगा। इसी बीच औरंगजेब ने वर्ष 1669 में ओरछा राजा वीर बुंदेला द्वारा बनवाए गए विराट कृष्ण मंदिर को तहस-नहस कर डाला। जेबुन्निसा के संबंध में यह वर्णन जदुनाथ सरकार सहित कई इतिहासकारों ने किया है। 26 मई 1702 में उसने शरीर त्याग दिया। इसके मात्र पांच वर्ष बाद 1707 औरंगजेब की भी मृत्य हो गई।
औरंगजेब की पुत्री जेबुन्निसा भगवान श्रीकृष्ण की भक्त थी
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि औरंगजेब की पुत्री जेबुन्निसा भगवान श्रीकृष्ण की भक्त थी। यह औरंगजेब को अच्छा नहीं लगाता था। इस कारण उसने जेबुन्निसा को दिल्ली के सलीमगढ़ के किले में कैद की सजा दी। जेबुन्निसा ने वर्ष 1702 में कैद खाने में ही शरीर त्याग दिया। इस संबंध में हम श्रीकृष्ण जन्मस्थान ईदगाह प्रकरण के दावे में जदुनाथ सरकार और अन्य कई लेखकों की पुस्तकों को अदालत में पेश करेंगे।