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द्रुपद धमार एवं समाज गायन के साथ कत्थक प्रस्तुति से गूंजा कुंभ सांस्कृतिक पंडाल
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वृंदावन (मथुरा)। स्वामी हरिदास, राधा वल्लभ संप्रदाय के आचार्य हित हरिवंश महाप्रभु और हरिराम व्यास तीनों ऐसे संत हुए, जिनकी वाणी एवं भक्ति से आस्थावजान लोगों को ईश्वर उपासना में शक्ति प्राप्त हुई। यह बात वृंदावन के यमुना तट पर आयोजित कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक के सांस्कृतिक पंडाल में आयोजित हरित्रयी समारोह के उद्घाटन पर एमआर ग्रुप के सीएमडी सुनील अग्रवाल ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि कुंभ के माध्यम से देश में सनातन, वैदिक, देव वाणी और आचार्यों की वाणी का प्रचार प्रसार हो रहा है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी हरिदास के द्रुपद धमार और समाज गायन से हुआ। इसके बाद लखनऊ घराने के आचार्य आशीष द्वारा कत्थक की प्रस्तुति दी गई। उन्होंने पद्मभूषण छन्नू महाराज द्वारा गाई ‘रंग डालूंगी नंद के लालन’ पर सुंदर कत्थक की प्रस्तुति दी। इसके बाद कुमारी भावना ने ‘राधे रानी दे डारो बंसी मोरी’ गीत पर उप शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में शास्त्री संगीत गायक बलराम एवं उनके साथियों ने स्वामी हरिदास जी के पदों का गायन किया।
उन्होंने ‘भानु की किशोरी श्यामा प्यारी राधे राधे’ गीत गाया। आचार्य आदित्य गोस्वामी ने कलाकारों का सम्मान किया। इससे पूर्व मंच पर वैदिक यात्रा गुरुकुल के छात्रों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। संयोजक देवेंद शर्मा ने बताया कि कुंभ के सांस्कृतिक पंडाल में दी जा रही प्रस्तुति का उद्देश्य ब्रज की सांस्कृतिक धरोहर एवं प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लोक संगीत को जन-जन तक पहुंचाना है। रोमेक्स स्कूल, श्रीजी विद्या मंदिर, आरएम सरस्वती विद्या निकेतन, ममता मोंटेसरी ममता जूनियर हाईस्कूल, सुवटी देवी स्कूल के बच्चों ने भी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में संजय शर्मा व अनूप शर्मा का सहयोग रहा।
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सांस्कृतिक पंडाल में नहीं जुट रहे लोग
कुंभ मेले में बनाए गए विशाल सांस्कृतिक ग्राम और पंडाल में दर्शकों की मौजूदगी चिंताजनक है। यहां अधिकांश समय सीट खाली रहती हैं। कलाकारों का उत्साह के लिए ताली बजाने वाला भी कोई नहीं है। यही कारण है कि दो दिन से कार्यक्रमों का आयोजन नहीं हो रहा है।
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उन्होंने कहा कि कुंभ के माध्यम से देश में सनातन, वैदिक, देव वाणी और आचार्यों की वाणी का प्रचार प्रसार हो रहा है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी हरिदास के द्रुपद धमार और समाज गायन से हुआ। इसके बाद लखनऊ घराने के आचार्य आशीष द्वारा कत्थक की प्रस्तुति दी गई। उन्होंने पद्मभूषण छन्नू महाराज द्वारा गाई ‘रंग डालूंगी नंद के लालन’ पर सुंदर कत्थक की प्रस्तुति दी। इसके बाद कुमारी भावना ने ‘राधे रानी दे डारो बंसी मोरी’ गीत पर उप शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में शास्त्री संगीत गायक बलराम एवं उनके साथियों ने स्वामी हरिदास जी के पदों का गायन किया।
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उन्होंने ‘भानु की किशोरी श्यामा प्यारी राधे राधे’ गीत गाया। आचार्य आदित्य गोस्वामी ने कलाकारों का सम्मान किया। इससे पूर्व मंच पर वैदिक यात्रा गुरुकुल के छात्रों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। संयोजक देवेंद शर्मा ने बताया कि कुंभ के सांस्कृतिक पंडाल में दी जा रही प्रस्तुति का उद्देश्य ब्रज की सांस्कृतिक धरोहर एवं प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लोक संगीत को जन-जन तक पहुंचाना है। रोमेक्स स्कूल, श्रीजी विद्या मंदिर, आरएम सरस्वती विद्या निकेतन, ममता मोंटेसरी ममता जूनियर हाईस्कूल, सुवटी देवी स्कूल के बच्चों ने भी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में संजय शर्मा व अनूप शर्मा का सहयोग रहा।
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सांस्कृतिक पंडाल में नहीं जुट रहे लोग
कुंभ मेले में बनाए गए विशाल सांस्कृतिक ग्राम और पंडाल में दर्शकों की मौजूदगी चिंताजनक है। यहां अधिकांश समय सीट खाली रहती हैं। कलाकारों का उत्साह के लिए ताली बजाने वाला भी कोई नहीं है। यही कारण है कि दो दिन से कार्यक्रमों का आयोजन नहीं हो रहा है।