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रतनकुंड की रंजिश में तीसरी हत्या
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 01 Mar 2015 12:36 AM IST
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थाना कोतवाली क्षेत्र के डैंपियर नगर इलाके में बाइक सवारों ने रतनकुंड निवासी तुलसीदास उर्फ तोले बाबा की गोली मारकर हत्या कर दी। तोले बाबा हत्या के आरोप में बंद दो पुत्रों की जमानत होने पर बेल बांड बनवाने पड़ोसी युवक के साथ बाइक से कचहरी जा रहे थे।
घटनाक्रम शनिवार सुबह का है। रतनकुंड छौंकापाड़ा निवासी चंद्रप्रकाश (60) उर्फ तुलसीदास उर्फ तोले बाबा सुबह 10:50 बजे पड़ोस के युवक सुमित के साथ बाइक से कचहरी के लिए निकले। उनके दो पुत्र कुलदीप और संदीप हत्या के आरोप में जेल में हैं। बाबा को उनकी जमानत के लिए बेल बांड बनवाने थे। सुबह 10:55 पर जब वे कठौती कुआं क्षेत्र में कोआपरेटिव बैंक के निकट से गुजर रहे थे तभी पीछे से दो बाइक पर आए पांच युवकों ने पीछे से तोले बाबा को निशाना बनाकर पांच फायर किए।
इसमें एक गोली तोले बाबा के पीठ पर लगी और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दौरान सुमित ने बाइक नहीं रोकी और तेजी से बाइक चलाकर सीधे एसएसपी निवास पहुंचे। घायलावस्था में तोले बाबा और सुमित ने एसएसपी को पूरी घटना बताई। इस पर एसएसपी पुलिस जिप्सी घायल को जिला अस्पताल भेजा। अस्पताल में तोले बाबा ने दम तोड़ दिया। तब तक एसएसपी मंजिल सैनी, सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गए थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले में तोले बाबा के रिश्तेदार राकेश चतुर्वेदी निवासी नीम गली ने राकेश उर्फ रंगा, मुकेश उर्फ बिल्ला, नीरज, कामेश्वर उर्फ चीनी, प्रदीप उर्फ गुलगुला के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। खबर लिखे जाने तक मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
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मामूली रंजिश बनी सिलसिलेवार हत्या की कहानी
मथुरा। चार साल पहले मामूली बात पर हुई रंजिश तीन लोगों की सिलसिलेवार हत्या की कहानी बन चुकी है। शुरूआत 2011 से करते हैं। रतनकुंड छोंकावाड़ा निवासी भोलेश्वर चतुर्वेदी गली से गुजर रहे थे। इस दौरान उनके पड़ोसी युवक रंगा बिल्ला की बाइक भोलेश्वर से टकरा गई थी। इससे भोलेश्वर के पैर में चोट आई और भोलेश्वर ने रंगा-बिल्ला को थप्पड़ मार दिए। इसके बाद रंजिश हो गई। 2011 में भोलेश्वर चतुर्वेदी की उनके घर के सामने ही गोली मारकर हत्या की गई। इसमें रंगा और बिल्ला दोनों नामजद हुए।
19 दिसंबर 2013 को रंगा-बिल्ला पक्ष के रतनकुंड निवासी विजय चतुर्वेदी की हत्या हुई। इसमें तोले बाबा के पुत्र कुलदीप और संदीप नामजद हुए। तोले बाबा और भोलेश्वर आपस में भाई हैं। पुलिस ने 31 मई 2014 को कुलदीप और संदीप को पकड़कर जेल भेजा। बताया गया है कि दो माह पहले ही रंगा-बिल्ला जेल से छूट कर आए थे। इधर संदीप और कुलदीप की हाईकोर्ट से जमानत होने वाली थी। जिसके लिए तोले बाबा कचहरी जा रहे थे।
मामले को हल्के में लेती रही पुलिस
मथुरा। कोतवाली क्षेत्र में मामूली रंजिश को लेकर चार साल में हुई तीसरे हत्या और आए दिन होने वाली फायरिंग की घटनाओं को कोतवाली पुलिस हल्के में लेती रही। रतनकुंड इलाके में दो परिवारों में पनप रही रंजिश में पुलिस पर सटीक कार्रवाई न करने का आरोप है। यहां तक कि विजय चतुर्वेदी की हत्या के दौरान बरामद विजय की बाइक भी कोतवाली से गायब हो गई है। इस मामले में दो माह पहले ही एसएसपी की ओर से जांच कराई जा रही है।
बढ़ते अपराध, बेबस पुलिस
- दो साल पहले चौबियापाड़ा में हुई सुधा चतुर्वेदी की हत्या का आज तक खुलासा नहीं।
- 15 फरवरी को छत्ता बाजार बजरिया निवासी गिरीश चतुर्वेदी को मारी थी गोली।
- तीन दिन पहले द्वारिकाधीश इलाके के बजरिया में हुई थी फायरिंग।
- 26 फरवरी को रतनकुंड में छेड़खानी की घटना को लेकर हुई मारपीट।
- 27 को पुराने बस अड्डा के निकट बार में हाथापाई के बाद हुई फायरिंग।
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घटनाक्रम शनिवार सुबह का है। रतनकुंड छौंकापाड़ा निवासी चंद्रप्रकाश (60) उर्फ तुलसीदास उर्फ तोले बाबा सुबह 10:50 बजे पड़ोस के युवक सुमित के साथ बाइक से कचहरी के लिए निकले। उनके दो पुत्र कुलदीप और संदीप हत्या के आरोप में जेल में हैं। बाबा को उनकी जमानत के लिए बेल बांड बनवाने थे। सुबह 10:55 पर जब वे कठौती कुआं क्षेत्र में कोआपरेटिव बैंक के निकट से गुजर रहे थे तभी पीछे से दो बाइक पर आए पांच युवकों ने पीछे से तोले बाबा को निशाना बनाकर पांच फायर किए।
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इसमें एक गोली तोले बाबा के पीठ पर लगी और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दौरान सुमित ने बाइक नहीं रोकी और तेजी से बाइक चलाकर सीधे एसएसपी निवास पहुंचे। घायलावस्था में तोले बाबा और सुमित ने एसएसपी को पूरी घटना बताई। इस पर एसएसपी पुलिस जिप्सी घायल को जिला अस्पताल भेजा। अस्पताल में तोले बाबा ने दम तोड़ दिया। तब तक एसएसपी मंजिल सैनी, सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गए थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले में तोले बाबा के रिश्तेदार राकेश चतुर्वेदी निवासी नीम गली ने राकेश उर्फ रंगा, मुकेश उर्फ बिल्ला, नीरज, कामेश्वर उर्फ चीनी, प्रदीप उर्फ गुलगुला के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। खबर लिखे जाने तक मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
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मामूली रंजिश बनी सिलसिलेवार हत्या की कहानी
मथुरा। चार साल पहले मामूली बात पर हुई रंजिश तीन लोगों की सिलसिलेवार हत्या की कहानी बन चुकी है। शुरूआत 2011 से करते हैं। रतनकुंड छोंकावाड़ा निवासी भोलेश्वर चतुर्वेदी गली से गुजर रहे थे। इस दौरान उनके पड़ोसी युवक रंगा बिल्ला की बाइक भोलेश्वर से टकरा गई थी। इससे भोलेश्वर के पैर में चोट आई और भोलेश्वर ने रंगा-बिल्ला को थप्पड़ मार दिए। इसके बाद रंजिश हो गई। 2011 में भोलेश्वर चतुर्वेदी की उनके घर के सामने ही गोली मारकर हत्या की गई। इसमें रंगा और बिल्ला दोनों नामजद हुए।
19 दिसंबर 2013 को रंगा-बिल्ला पक्ष के रतनकुंड निवासी विजय चतुर्वेदी की हत्या हुई। इसमें तोले बाबा के पुत्र कुलदीप और संदीप नामजद हुए। तोले बाबा और भोलेश्वर आपस में भाई हैं। पुलिस ने 31 मई 2014 को कुलदीप और संदीप को पकड़कर जेल भेजा। बताया गया है कि दो माह पहले ही रंगा-बिल्ला जेल से छूट कर आए थे। इधर संदीप और कुलदीप की हाईकोर्ट से जमानत होने वाली थी। जिसके लिए तोले बाबा कचहरी जा रहे थे।
मामले को हल्के में लेती रही पुलिस
मथुरा। कोतवाली क्षेत्र में मामूली रंजिश को लेकर चार साल में हुई तीसरे हत्या और आए दिन होने वाली फायरिंग की घटनाओं को कोतवाली पुलिस हल्के में लेती रही। रतनकुंड इलाके में दो परिवारों में पनप रही रंजिश में पुलिस पर सटीक कार्रवाई न करने का आरोप है। यहां तक कि विजय चतुर्वेदी की हत्या के दौरान बरामद विजय की बाइक भी कोतवाली से गायब हो गई है। इस मामले में दो माह पहले ही एसएसपी की ओर से जांच कराई जा रही है।
बढ़ते अपराध, बेबस पुलिस
- दो साल पहले चौबियापाड़ा में हुई सुधा चतुर्वेदी की हत्या का आज तक खुलासा नहीं।
- 15 फरवरी को छत्ता बाजार बजरिया निवासी गिरीश चतुर्वेदी को मारी थी गोली।
- तीन दिन पहले द्वारिकाधीश इलाके के बजरिया में हुई थी फायरिंग।
- 26 फरवरी को रतनकुंड में छेड़खानी की घटना को लेकर हुई मारपीट।
- 27 को पुराने बस अड्डा के निकट बार में हाथापाई के बाद हुई फायरिंग।