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हां, मेरे सामने साधु ने बर्खास्त सिपाही को मारा था
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 20 Jan 2017 12:27 AM IST
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Murder
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हां, मेरे सामने साधु ने बर्खास्त सिपाही को मारा था। दोनों के बीच विवाद हुआ और साधु ने लोहे की छड़ उठाकर सिर में दे मारी। मुझे लगा कि अब साधु मुझ पर भी हमला कर सकता है लिहाजा मैं वहां से भाग गया था। गुरुवार को पुलिस के पास पहुंचे पीयूष ने घटनाक्रम कुछ इस तरह बताया है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि किसी ने नहीं की है।
गोधूलिपुरम स्थित श्रीमोहन संन्यास आश्रम में एक बर्खास्त सिपाही प्रभास गौतम (60) और आश्रम के साधु राजेंद्रानंदपुरी (55) के शव मिले थे। प्रभास गौतम की हत्या सिर पर भारी चीज मारकर की गई थी जबकि साधु का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साबित हुआ था कि साधु की मौत से 12 घंटे पहले बर्खास्त सिपाही मारा गया था। इस आश्रम में रहने वाला छात्र पीयूष लापता था। पीयूष अलीगढ़ के गांव बेसमां का रहने वाला है। पुलिस मान रही थी पीयूष ही वारदात का खुलासा कर सकता है।
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गुरुवार को पीयूष पुलिस के हाथ लग गया। हालांकि पीयूष ने क्या कहा है इसकी अधिकारिक जानकारी तो किसी ने नहीं दी, लेकिन पुलिस सूत्रों के मुताबिक पीयूष ने बताया कि सोमवार शाम लगभग सात बजे वह रसोई में महंत राजेंद्रानंदपुरी के लिए भोजन तैयार कर रहा था।
उसी समय गुस्से में भरा बर्खास्त सिपाही प्रभास गौतम आश्रम पर आया और गाली गलौज करने लगा। महंत ने उसे समझाने का प्रयास किया पर वह नहीं माना। विवाद बढ़ने पर महंत ने बर्खास्त सिपाही के सिर पर लोहे की छड़ दे मारी। इससे वह जमीन पर गिर गया। यह देख वह डर गया और वहां से भाग निकला। अब साधु कैसे मरा इसकी जानकारी नहीं है।
प्रभास और साधु के रिश्तों को खंगाल रही पुलिस
पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि मृतक प्रभास गौतम और उसके परिवारीजनों को साधु राजेंद्रानंदपुरी के आश्रम में आनाजाना लगा रहता था। सूत्रों के अनुसार पीयूष ने ही पुलिस को यह जानकारी दी है। जबकि अभी तक पुलिस की जांच केवल प्रभास के ही आश्रम में आने-जाने तक सीमित थी।
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गोधूलिपुरम स्थित श्रीमोहन संन्यास आश्रम में एक बर्खास्त सिपाही प्रभास गौतम (60) और आश्रम के साधु राजेंद्रानंदपुरी (55) के शव मिले थे। प्रभास गौतम की हत्या सिर पर भारी चीज मारकर की गई थी जबकि साधु का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला था।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साबित हुआ था कि साधु की मौत से 12 घंटे पहले बर्खास्त सिपाही मारा गया था। इस आश्रम में रहने वाला छात्र पीयूष लापता था। पीयूष अलीगढ़ के गांव बेसमां का रहने वाला है। पुलिस मान रही थी पीयूष ही वारदात का खुलासा कर सकता है।
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गुरुवार को पीयूष पुलिस के हाथ लग गया। हालांकि पीयूष ने क्या कहा है इसकी अधिकारिक जानकारी तो किसी ने नहीं दी, लेकिन पुलिस सूत्रों के मुताबिक पीयूष ने बताया कि सोमवार शाम लगभग सात बजे वह रसोई में महंत राजेंद्रानंदपुरी के लिए भोजन तैयार कर रहा था।
उसी समय गुस्से में भरा बर्खास्त सिपाही प्रभास गौतम आश्रम पर आया और गाली गलौज करने लगा। महंत ने उसे समझाने का प्रयास किया पर वह नहीं माना। विवाद बढ़ने पर महंत ने बर्खास्त सिपाही के सिर पर लोहे की छड़ दे मारी। इससे वह जमीन पर गिर गया। यह देख वह डर गया और वहां से भाग निकला। अब साधु कैसे मरा इसकी जानकारी नहीं है।
प्रभास और साधु के रिश्तों को खंगाल रही पुलिस
पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि मृतक प्रभास गौतम और उसके परिवारीजनों को साधु राजेंद्रानंदपुरी के आश्रम में आनाजाना लगा रहता था। सूत्रों के अनुसार पीयूष ने ही पुलिस को यह जानकारी दी है। जबकि अभी तक पुलिस की जांच केवल प्रभास के ही आश्रम में आने-जाने तक सीमित थी।