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रिफाइनरी अफसरों ने बेच डाला था करोड़ों का कोलतार
अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 26 Feb 2017 12:11 AM IST
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इंडियन ऑयल कारपोरेशन की मथुरा रिफाइनरी घोटालों का हब बनी हुई है। सीबीआई ने यहां एक बड़े कोलतार घोटाले का पर्दाफाश किया था। इस घोटाले में रिफाइनरी के सप्लाई अफसरों के साथ एकाउंटेंट और सुरक्षा गार्ड तक लिप्त पाए गए थे। कइयों को सीबीआई ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है जबकि कुछ अभी फरार हैं।
मथुरा की रिफाइनरी में पेट्रोल और डीजल के साथ बिटुमिन (कोलतार) भी तैयार किया जाता है। बिटुमिन की सप्लाई टैंकर के माध्यम से प्रदेश भर में की जाती है। जहां भी सरकारी एजेंसियां सड़कों का निर्माण करती हैं वहीं मथुरा रिफाइनरी से कोलतार पहुंचता है।
वर्ष 2013 में 15 से 19 फरवरी के बीच एक बड़ा कोलतार घोटाला हुआ था। रिफाइनरी के बीडीएफ प्लांट से कोलतार से भरे टैंकर अवैध तरीके से बाहर निकाल दिए गए। इन टैंकरों को कहीं रिकार्ड में दर्ज नहीं किया गया। टैंकर को फर्जी नंबर प्लेट के आधार पर रिफाइनरी से बाहर निकाला गया था। इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी। 87 लाख का घोटाला माना गया था।
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इसमें बीडीएफई के सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन आपरेशन के अफसर अनिमेश वर्मा के साथ एकाउंटेंट अशोक कुमार, अवधेश कुमार, फोरमैन किताब सिंह, अमृतलाल गुप्ता, सिक्योरिटी गार्ड हरी सिंह के साथ दो बाहरी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया था। जब कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ सम्मन जारी किए तो सभी रिफाइनरी कर्मियों ने सरेंडर कर दिया था। फिलहाल सभी डासना जेल में बंद हैं।
रिफाइनरी में इसके बाद भी कई कोलतार घोटाले प्रकाश में आए। एक बार कोलतार डिपो से रात को चुपके से ट्रकों में लादकर कोलतार बाहर निकाल दिया गया था। कोलतार की चोरी के लिए सीसीटीवी से भी छेड़छाड़ की गई थी। रिफाइनरी से कोलतार सड़क निर्माण कराने वाले ठेकेदारों को बेच दिया गया था। यह पूरा खेल भी माफिया के माध्यम से ही हुआ था।
रास्ते में ही गायब कर दिया था 24 करोड़ का बिटुमिन
रिफाइनरी से तारकोल जिस जनपद के लिए भेजा गया वहां नहीं पहुंचकर रास्ते में ही बेच दिया गया। रिफाइनरी से जिस जनपद के लिए ट्रक की रवानगी दर्ज थी वह वहां पहुंचा ही नहीं। फर्जी रिसीव स्लिप रिफाइनरी में उपलब्ध करा दी जाती थी। जब कुछ एजेंसियों ने तारकोल न मिलने की शिकायत की तो जांच कराई गई। पता चला कि 2012 में 24 करोड़ का तारकोल गायब कर दिया गया था। घोटाला इस तरह से किया गया कि किसी को पता ही नहीं चला। अगर किसी जनपद के लिए 10 टैंकर जाने हैं तो वहां नौ तो पहुंचा दिए मगर एक नहीं पहुंचाया। उसे प्राइवेट ठेकेदार को बेच दिया गया।
करोड़ों का तेल यूं ही बह जाता है
अगर पेट्रोल के रेट बढ़ जाएं तो हर कोई बेचैन हो जाएगा। डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई आ जाती है। लेकिन यहां हर साल करोड़ों का तेल यूं ही बह जाता है। खेत के खेत डीजल से भर जाते हैं। कभी पाइप लाइन लीक हो जाती है तो कभी तेल चोरी के लिए सेंधमारी कर ली जाती है। रिफाइनरी की पेट्रोलिंग टीम को जब तक पता चलता है तब तक करोड़ों का तेल बह चुका होता है। मथुरा रिफाइनरी से जाने वाली पाइप लाइन कोसीकलां, फरह और मथुरा में कई दफा लीक हो चुकी हैं। कोसीकलां में जेसीबी ने पाइप लाइन तोड़ दी थी। नालों में डीजल बह गया था। तत्काल सूचना के बाद भी रिफाइनरी की टीम पांच घंटे से अधिक में मौके पर पहुंची थी। फरह में खेतों में डीजल भर गया था। एक खेत में डीजल की पाइप लाइन लीक हो गई थी।
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मथुरा की रिफाइनरी में पेट्रोल और डीजल के साथ बिटुमिन (कोलतार) भी तैयार किया जाता है। बिटुमिन की सप्लाई टैंकर के माध्यम से प्रदेश भर में की जाती है। जहां भी सरकारी एजेंसियां सड़कों का निर्माण करती हैं वहीं मथुरा रिफाइनरी से कोलतार पहुंचता है।
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वर्ष 2013 में 15 से 19 फरवरी के बीच एक बड़ा कोलतार घोटाला हुआ था। रिफाइनरी के बीडीएफ प्लांट से कोलतार से भरे टैंकर अवैध तरीके से बाहर निकाल दिए गए। इन टैंकरों को कहीं रिकार्ड में दर्ज नहीं किया गया। टैंकर को फर्जी नंबर प्लेट के आधार पर रिफाइनरी से बाहर निकाला गया था। इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी। 87 लाख का घोटाला माना गया था।
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इसमें बीडीएफई के सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन आपरेशन के अफसर अनिमेश वर्मा के साथ एकाउंटेंट अशोक कुमार, अवधेश कुमार, फोरमैन किताब सिंह, अमृतलाल गुप्ता, सिक्योरिटी गार्ड हरी सिंह के साथ दो बाहरी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया था। जब कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ सम्मन जारी किए तो सभी रिफाइनरी कर्मियों ने सरेंडर कर दिया था। फिलहाल सभी डासना जेल में बंद हैं।
रिफाइनरी में इसके बाद भी कई कोलतार घोटाले प्रकाश में आए। एक बार कोलतार डिपो से रात को चुपके से ट्रकों में लादकर कोलतार बाहर निकाल दिया गया था। कोलतार की चोरी के लिए सीसीटीवी से भी छेड़छाड़ की गई थी। रिफाइनरी से कोलतार सड़क निर्माण कराने वाले ठेकेदारों को बेच दिया गया था। यह पूरा खेल भी माफिया के माध्यम से ही हुआ था।
रास्ते में ही गायब कर दिया था 24 करोड़ का बिटुमिन
रिफाइनरी से तारकोल जिस जनपद के लिए भेजा गया वहां नहीं पहुंचकर रास्ते में ही बेच दिया गया। रिफाइनरी से जिस जनपद के लिए ट्रक की रवानगी दर्ज थी वह वहां पहुंचा ही नहीं। फर्जी रिसीव स्लिप रिफाइनरी में उपलब्ध करा दी जाती थी। जब कुछ एजेंसियों ने तारकोल न मिलने की शिकायत की तो जांच कराई गई। पता चला कि 2012 में 24 करोड़ का तारकोल गायब कर दिया गया था। घोटाला इस तरह से किया गया कि किसी को पता ही नहीं चला। अगर किसी जनपद के लिए 10 टैंकर जाने हैं तो वहां नौ तो पहुंचा दिए मगर एक नहीं पहुंचाया। उसे प्राइवेट ठेकेदार को बेच दिया गया।
करोड़ों का तेल यूं ही बह जाता है
अगर पेट्रोल के रेट बढ़ जाएं तो हर कोई बेचैन हो जाएगा। डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई आ जाती है। लेकिन यहां हर साल करोड़ों का तेल यूं ही बह जाता है। खेत के खेत डीजल से भर जाते हैं। कभी पाइप लाइन लीक हो जाती है तो कभी तेल चोरी के लिए सेंधमारी कर ली जाती है। रिफाइनरी की पेट्रोलिंग टीम को जब तक पता चलता है तब तक करोड़ों का तेल बह चुका होता है। मथुरा रिफाइनरी से जाने वाली पाइप लाइन कोसीकलां, फरह और मथुरा में कई दफा लीक हो चुकी हैं। कोसीकलां में जेसीबी ने पाइप लाइन तोड़ दी थी। नालों में डीजल बह गया था। तत्काल सूचना के बाद भी रिफाइनरी की टीम पांच घंटे से अधिक में मौके पर पहुंची थी। फरह में खेतों में डीजल भर गया था। एक खेत में डीजल की पाइप लाइन लीक हो गई थी।