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अब रामवृक्ष की शनाख्त करने वाला मुकरा
अमर उजाला ब्यूरो, मथुरा
Updated Thu, 20 Apr 2017 12:28 AM IST
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जवाहरबाग हिंसा के दोषी
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जवाहरबाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव की शनाख्त करने वाला हरनाथ अब मुकर गया है। बुधवार को पेशी के दौरान उसने कहा कि उसने कभी कोई पहचान नहीं की। जो शव उसे दिखाए गए थे वह बुरी तरह से जले हुए थे। पहचान करना संभव ही नहीं था।
पुलिस ने जवाहरबाग से 11 जले हुए शव बरामद किए थे। पुलिस ने इनमें से ही एक शव को रामवृक्ष यादव का बताया था। पुलिस ने दावा किया था कि जेल में बंद कब्जाधारी हरनाथ सिंह से पहचान कराई गई थी। हरनाथ सिंह ने शव को देखते ही कह दिया था कि यह रामवृक्ष का है।
लेकिन बुधवार को जब हरनाथ सिंह पेशी पर आया तो उसने मीडिया वालों से कहा कि उसने कभी रामवृक्ष की शनाख्त नहीं की। पुलिस वाले उसे लेकर जरूर गए थे। उससे कहा गया था कि इन शवों में रामवृक्ष की पहचान करो।
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क्योंकि सभी शव बुरी तरह से जल गए थे लिहाजा पहचानना संभव ही नहीं था। हरनाथ सिंह ने कहा कि पुलिस ने ज्यादती की है। लोगों को बेरहमी के साथ मारा है। चंदनबोस ने भी पुलिस पर आरोप लगाए। उसने कहा कि जांच करने वाले उन लोगों को जेल में आकर धमकाते हैं। कहते हैं कि यदि उनके अनुसार नहीं बोला गया तो बुरा हाल होगा। उसने जांच अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं।
जवाहरबाग हिंसा में रामवृक्ष के बेटे को जमानत
जवाहरबाग हिंसा में नामजद रामवृक्ष यादव के बेटे विवेक यादव उर्फ लखू को जमानत मिल गई है। पुलिस 90 दिन बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी थी। इसी को आधार बनाकर बेल मांगी थी। इस पूरे केस में पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।
पुलिस ने रामवृक्ष यादव के बेटे गाजीपुर निवासी विवेक यादव को जनवरी माह में रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दावा किया था 2 जून 2016 को जब जवाहरबाग में हिंसा हुई थी तब विवेक यादव भी अपने पिता रामवृक्ष यादव के साथ था।
विवेक यादव को पुलिस ने एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव की हत्या के मामले में नामजद किया लेकिन 90 दिन बाद भी पुलिस चार्जशीट ही दाखिल नहीं कर सकी, जबकि नब्बे दिन में चार्जशीट हो जानी चाहिए थी।
इसी को आधार बनाकर विवेक यादव के अधिवक्ता एलके गौतम ने जमानत के लिए प्रार्थना पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्पना शुक्ला की अदालत में दाखिल किया। न्यायाधीश ने बुधवार को विवेक की पांच लाख के मुचलके पर जमानत मंजूर कर ली है।
पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई
मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। विवेक यादव को गिरफ्तार करके बड़े खुलासे का दावा करने वाले अधिकारी यह भूल गए कि चार्जशीट भी लगाई जानी है। पुलिस ने विवेक यादव को पूछताछ के लिए रिमांड पर भी लिया था।
लेकिन पुलिस उससे कोई जानकारी ही हासिल नहीं कर पाई थी। एक ऐसा साक्ष्य नहीं मिला जिससे आधार पर केस को मजबूत किया जा सकता है। जानकारों का कहना है कि जवाहरबाग की जांच में पुलिस ने कदम कदम पर लापरवाही बरती है।
पुलिस ने जेल में बंद प्रेमचंद को भी बनाया मुल्जिम
जवाहरबाग कब्जेधारियों द्वारा पुलिस पर किए हमले के मामले में पुलिस की ओर से न्यायालय में दाखिल की गई चार्जशीट पुलिस की मनमानी को बयां कर रही है। बुधवार को हमले के एक आरोपी प्रेमचंद्र ने न्यायालय में घटना वाले दिन लखीमपुर जेल में बंद होने का प्रमाण पेश किया है।
22 जनवरी 2015 को एसओ सदर पर जवाहर बाग कब्जेधारियों ने जानलेवा हमला कर दिया था। पुलिस ने इस मामले में रामवृक्ष यादव, चंदन बोस, हरनाथ सहित सैकड़ों लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई।
बुधवार को अपर सत्र न्यायालय-6 में इस मामले के आरोप तय होने थे। इसमें हरनाथ, चंदन बोस और प्रेमचंद्र न्यायालय में पेश हुए। प्रेमचंद्र की ओर से उनके अधिवक्ता एलके गौतम ने न्यायालय के समक्ष लखीमपुर जेल का वो प्रमाणपत्र रखा जिसमें घटना वाले दिन प्र्रेमचंद्र को जेल में बंद होने की तिथि अंकित है। न्यायालय ने इस मामले में अगली तिथि पांच मई नियत की है।
पुलिस ने जवाहरबाग से 11 जले हुए शव बरामद किए थे। पुलिस ने इनमें से ही एक शव को रामवृक्ष यादव का बताया था। पुलिस ने दावा किया था कि जेल में बंद कब्जाधारी हरनाथ सिंह से पहचान कराई गई थी। हरनाथ सिंह ने शव को देखते ही कह दिया था कि यह रामवृक्ष का है।
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लेकिन बुधवार को जब हरनाथ सिंह पेशी पर आया तो उसने मीडिया वालों से कहा कि उसने कभी रामवृक्ष की शनाख्त नहीं की। पुलिस वाले उसे लेकर जरूर गए थे। उससे कहा गया था कि इन शवों में रामवृक्ष की पहचान करो।
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क्योंकि सभी शव बुरी तरह से जल गए थे लिहाजा पहचानना संभव ही नहीं था। हरनाथ सिंह ने कहा कि पुलिस ने ज्यादती की है। लोगों को बेरहमी के साथ मारा है। चंदनबोस ने भी पुलिस पर आरोप लगाए। उसने कहा कि जांच करने वाले उन लोगों को जेल में आकर धमकाते हैं। कहते हैं कि यदि उनके अनुसार नहीं बोला गया तो बुरा हाल होगा। उसने जांच अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं।
जवाहरबाग हिंसा में रामवृक्ष के बेटे को जमानत
जवाहरबाग हिंसा में नामजद रामवृक्ष यादव के बेटे विवेक यादव उर्फ लखू को जमानत मिल गई है। पुलिस 90 दिन बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी थी। इसी को आधार बनाकर बेल मांगी थी। इस पूरे केस में पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।
पुलिस ने रामवृक्ष यादव के बेटे गाजीपुर निवासी विवेक यादव को जनवरी माह में रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दावा किया था 2 जून 2016 को जब जवाहरबाग में हिंसा हुई थी तब विवेक यादव भी अपने पिता रामवृक्ष यादव के साथ था।
विवेक यादव को पुलिस ने एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव की हत्या के मामले में नामजद किया लेकिन 90 दिन बाद भी पुलिस चार्जशीट ही दाखिल नहीं कर सकी, जबकि नब्बे दिन में चार्जशीट हो जानी चाहिए थी।
इसी को आधार बनाकर विवेक यादव के अधिवक्ता एलके गौतम ने जमानत के लिए प्रार्थना पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्पना शुक्ला की अदालत में दाखिल किया। न्यायाधीश ने बुधवार को विवेक की पांच लाख के मुचलके पर जमानत मंजूर कर ली है।
पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई
मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। विवेक यादव को गिरफ्तार करके बड़े खुलासे का दावा करने वाले अधिकारी यह भूल गए कि चार्जशीट भी लगाई जानी है। पुलिस ने विवेक यादव को पूछताछ के लिए रिमांड पर भी लिया था।
लेकिन पुलिस उससे कोई जानकारी ही हासिल नहीं कर पाई थी। एक ऐसा साक्ष्य नहीं मिला जिससे आधार पर केस को मजबूत किया जा सकता है। जानकारों का कहना है कि जवाहरबाग की जांच में पुलिस ने कदम कदम पर लापरवाही बरती है।
पुलिस ने जेल में बंद प्रेमचंद को भी बनाया मुल्जिम
जवाहरबाग कब्जेधारियों द्वारा पुलिस पर किए हमले के मामले में पुलिस की ओर से न्यायालय में दाखिल की गई चार्जशीट पुलिस की मनमानी को बयां कर रही है। बुधवार को हमले के एक आरोपी प्रेमचंद्र ने न्यायालय में घटना वाले दिन लखीमपुर जेल में बंद होने का प्रमाण पेश किया है।
22 जनवरी 2015 को एसओ सदर पर जवाहर बाग कब्जेधारियों ने जानलेवा हमला कर दिया था। पुलिस ने इस मामले में रामवृक्ष यादव, चंदन बोस, हरनाथ सहित सैकड़ों लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई।
बुधवार को अपर सत्र न्यायालय-6 में इस मामले के आरोप तय होने थे। इसमें हरनाथ, चंदन बोस और प्रेमचंद्र न्यायालय में पेश हुए। प्रेमचंद्र की ओर से उनके अधिवक्ता एलके गौतम ने न्यायालय के समक्ष लखीमपुर जेल का वो प्रमाणपत्र रखा जिसमें घटना वाले दिन प्र्रेमचंद्र को जेल में बंद होने की तिथि अंकित है। न्यायालय ने इस मामले में अगली तिथि पांच मई नियत की है।