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इतनी मौत हाेंगी, किसी को नहीं था अहसास
अमर उजाला, रामकुमार राौतेला
Updated Sat, 04 Jun 2016 01:29 AM IST
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आपरेशन जवाहर बाग
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जवाहर बाग को खाली कराने के लिए इतनी मौत होंगी, ये किसी ने सोचा भी नहीं था। महीनों से चल रही आपरेशन की तैयारियों में अनुमान लगाया जा रहा था कि दो-चार लोग इस दौरान मरेंगे। इसमें भी कब्जा जमाए लोगों द्वारा कुछ वृद्ध लोगों को खुद मौत के घाट उतारने का कयास लगाए जा रहे थे।
जवाहर बाग में पुरुषों से ज्यादा संख्या महिला और बच्चों की रही। पुरुषों में भी बहुतायत में वृद्ध थे। प्रशासन जब भी इन्हें जवाहर बाग से बाहर करने के आपरेशन की रणनीति तैयार करता तो इस दौरान जनहानि का भी आंकलन किया जाता।
पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने यह सुनिश्चित मान लिया था कि जवाहर बाग आपरेशन के दौरान दो-चार लोगों की मौत होगी। इसमें भी संभावना यह ज्यादा लगाई जा रही थी दबाव बनाने के लिए नेतृत्वकर्ता कुछ वृद्ध लोगों को खुद ही मौत के घाट उतार सकते हैं।
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लेकिन, ऐसा होगा ये किसी को दूर तक अनुमान नहीं होगा। दो पुलिस अफसरों के साथ दो दर्जन कब्जाधारी की मौत होगी। प्रशासन ये अनुमान लगाने में भी चूक कर गया कि कब्जेधारी इस कदर हमलावर हो जायेंगे। चूक तो डीजीपी जावीद अहमद ने भी स्वीकार कर ली है। उन्होंने स्वीकार किया कि जवाहरबाग आपरेशन अभी दो-चार दिन बाद शुरू करना था। सिर्फ रैकी के दौरान कब्जाधारियों के हमले से यह स्थिति पैदा हो गई।
रातों रात बदली जांच पर उठ रहे सवाल
जवाहर बाग में पुलिस और कब्जाधारियों के बीच हुई फायरिंग में एसपी सिटी और थानाध्यक्ष की मौत के मामले की जांच कमिश्नर प्रदीप भटनागर को सौंपी गई थी लेकिन ऐन वक्त पर बदलकर कमिश्नर अलीगढ़ को सौंप दी गई है। अचानक होने वाले इस बदलाव पर भी सवाल खड़े होते रहे।
पुलिस अधिकारियों की मौत के बाद प्रदेश में सियासी बवाल शुरू हो गया है। सीबीआई जांच की मांग गूंज रही है। पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल की कमी बताई जा रही है।
ढाई साल के भीतर कार्रवाई क्यों नहीं की गई इसे भी मुद्दा बनाकर प्रशासन को घेरा जा रहा है। इन सब मामलों की जांच के लिए कमिश्नर प्रदीप भटनागर को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने यहां पहुंचकर प्रारंभिक पड़ताल शुरू कर भी दी थी। लेकिन अचानक जांच अधिकारी बदल दिए गए। कमिश्नर आगरा की जगह अब कमिश्नर अलीगढ़ चंद्रकांत को जांच अधिकारी बना दिया गया है। वह पूरे मामले की पड़ताल शुरू करेंगे।
रामवृक्ष कहां है कोई नहीं जानता
जवाहर बाग के कब्जाधारियों का प्रमुख नेता रामवृक्ष यादव आपरेशन के दौरान कहां गया पता नहीं चल पा रहा है। आपरेशन के शुरूआत में पुलिस पर पेड़ों से गोली चलाने वाला रामवृक्ष यादव खुद के बचाव में भागने लगा था। इसके बाद उसका पता नहीं चल सका।
डीजीपी जावीद अहमद ने रामवृक्ष के सवाल पर कहा कि रामवृक्ष का पता नहीं चल सका है। वह अगर फरार है तो उसे पकड़ लिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर पोस्टमार्टम पर पड़े जवाहरबाग के उपद्रवियों के शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी। उनको 72 घंटे तक के लिए फ्रीजर में रख दिया है।
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जवाहर बाग में पुरुषों से ज्यादा संख्या महिला और बच्चों की रही। पुरुषों में भी बहुतायत में वृद्ध थे। प्रशासन जब भी इन्हें जवाहर बाग से बाहर करने के आपरेशन की रणनीति तैयार करता तो इस दौरान जनहानि का भी आंकलन किया जाता।
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पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने यह सुनिश्चित मान लिया था कि जवाहर बाग आपरेशन के दौरान दो-चार लोगों की मौत होगी। इसमें भी संभावना यह ज्यादा लगाई जा रही थी दबाव बनाने के लिए नेतृत्वकर्ता कुछ वृद्ध लोगों को खुद ही मौत के घाट उतार सकते हैं।
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लेकिन, ऐसा होगा ये किसी को दूर तक अनुमान नहीं होगा। दो पुलिस अफसरों के साथ दो दर्जन कब्जाधारी की मौत होगी। प्रशासन ये अनुमान लगाने में भी चूक कर गया कि कब्जेधारी इस कदर हमलावर हो जायेंगे। चूक तो डीजीपी जावीद अहमद ने भी स्वीकार कर ली है। उन्होंने स्वीकार किया कि जवाहरबाग आपरेशन अभी दो-चार दिन बाद शुरू करना था। सिर्फ रैकी के दौरान कब्जाधारियों के हमले से यह स्थिति पैदा हो गई।
रातों रात बदली जांच पर उठ रहे सवाल
जवाहर बाग में पुलिस और कब्जाधारियों के बीच हुई फायरिंग में एसपी सिटी और थानाध्यक्ष की मौत के मामले की जांच कमिश्नर प्रदीप भटनागर को सौंपी गई थी लेकिन ऐन वक्त पर बदलकर कमिश्नर अलीगढ़ को सौंप दी गई है। अचानक होने वाले इस बदलाव पर भी सवाल खड़े होते रहे।
पुलिस अधिकारियों की मौत के बाद प्रदेश में सियासी बवाल शुरू हो गया है। सीबीआई जांच की मांग गूंज रही है। पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल की कमी बताई जा रही है।
ढाई साल के भीतर कार्रवाई क्यों नहीं की गई इसे भी मुद्दा बनाकर प्रशासन को घेरा जा रहा है। इन सब मामलों की जांच के लिए कमिश्नर प्रदीप भटनागर को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने यहां पहुंचकर प्रारंभिक पड़ताल शुरू कर भी दी थी। लेकिन अचानक जांच अधिकारी बदल दिए गए। कमिश्नर आगरा की जगह अब कमिश्नर अलीगढ़ चंद्रकांत को जांच अधिकारी बना दिया गया है। वह पूरे मामले की पड़ताल शुरू करेंगे।
रामवृक्ष कहां है कोई नहीं जानता
जवाहर बाग के कब्जाधारियों का प्रमुख नेता रामवृक्ष यादव आपरेशन के दौरान कहां गया पता नहीं चल पा रहा है। आपरेशन के शुरूआत में पुलिस पर पेड़ों से गोली चलाने वाला रामवृक्ष यादव खुद के बचाव में भागने लगा था। इसके बाद उसका पता नहीं चल सका।
डीजीपी जावीद अहमद ने रामवृक्ष के सवाल पर कहा कि रामवृक्ष का पता नहीं चल सका है। वह अगर फरार है तो उसे पकड़ लिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर पोस्टमार्टम पर पड़े जवाहरबाग के उपद्रवियों के शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी। उनको 72 घंटे तक के लिए फ्रीजर में रख दिया है।