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बच्ची की हत्या के आरोपी को सजा-ए-मौत
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 10 Feb 2017 12:25 AM IST
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श्ययामजीत
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बलदेव थाना क्षेत्र में बच्ची (6) को अगवा कर उसके साथ हैवानियत की कोशिश करने और उसकी हत्या करने करने के दोषी श्यामजीत उर्फ कलूटा को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है, साथ ही 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बालिका के साथ हैवानियत घृणित कार्य है और ऐसे शख्स के प्रति किसी तरह की दया नहीं की जा सकती। यह घटना 25 अगस्त 2016 को थाना बलदेव क्षेत्र में हुई थी और बच्ची आरोपी के दोस्त की बेटी थी।
घटना के संबंध में गांव सालवान निवासी श्यामजीत उर्फ कलूटा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। उस दिन कलूटा नशे में था और शाम के वक्त गांव में ही अपने दोस्त के घर गया था। कलूटा चारपाई पर बैठा था जबकि उसका दोस्त किसी बात पर पत्नी से झगड़ते हुए घर से बाहर आ गया। इसी बीच कलूटा चारपाई पर सो रही बच्ची को चारपाई से उठाकर एक खंडहर नुमा मकान में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की, बच्ची रोने लगी तो कलूटा ने उसे गला दबाकर मार डाला और फरार हो गया।
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बच्ची की तलाश कर रहे घरवालों को पूर्व प्रधान कालीचरन ने उसे कलूटा के साथ देखने की बात कही थी। वह घर से भी गायब था। बाद में पुलिस ने बच्ची का शव बरामद कर लिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता रविंद्र कुमार ने बताया चार दिन बाद पुलिस ने कलूटा को गिरफ्तार कर लिया था और वह तभी से जेल में है।
इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (नवम) पॉस्को कोर्ट विवेकानंद शरण त्रिपाठी की अदालत में हुई। गवाह और सबूत पेश किए गए। इसके बाद श्यामजीत उर्फ कलूटा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए फांसी फांसी की सजा सुनाई है।
सजा सुनते ही घुटनों के बल बैठ गया कलूटा
न्यायाधीश ने दोष सिद्ध होने के बाद जैसे ही श्यामजीत उर्फ कलूटा को मरने तक फंदे से लटकाने (फांसी) की सजा सुनाई तो वो सन्न रह गया। मौत के भय के मारे कलूटा घुटनों के बल बैठ गया। पुलिस उसे जेल में ले जाने लगी तो उसने बस इतना कहा कि वो उस दिन नशे में था उसे कुछ नहीं पता ये सब कैसे हो गया।
पुलिस को दी थी सख्त हिदायत, 6 महीने में कर दिया फैसला
घटना के बाद मृतका का पिता थाने तहरीर लेकर पहुंचा। लेकिन पुलिस आरोपी को पकड़ नहीं सकी। कोर्ट ने अखबारों में छपी खबरों का संज्ञान लेते हुए एसओ को बुलाकर सख्त निर्देश दिये। तब कहीं जाकर श्यामजीत उर्फ कलूटा की गिरफ्तारी हुई। आरोपी तभी से जेल में था।
परिवार ने तोड़ लिया नाता
श्यामजीत उर्फ कलूटा के इस घिनौने कृत्य के बाद उसके परिवारीजनों ने उससे लगभग अपना नाता तोड़ लिया था। गुरुवार को जब उसे सजा सुनाई गई तब भी उसके परिवार का कोई सदस्य न्यायालय में नहीं था। बताया जाता है कि जेल में उसकी मिलाई करने के लिए भी कोई नहीं जाता था।
19 दिन में दाखिल कर दी थी चार्जशीट
मथुरा,ब्यूरो। इस मामले में पुलिस ने मृतका के पिता की तहरीर मिलने के बाद मात्र 19 दिन में न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी। एडीजीसी रविंद्र कुमार ने बताया कि इस मामले में प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आने में थोड़ा वक्त लग गया अन्यथा ये फैसला और भी जल्दी हो जाता।
मां बोली, समाज का कलंक है दरिंदा
न्यायालय के फैसला सुना तो बालिका की मां फफक कर रो पड़ी। बोली ये सत्य की जीत है। ये दरिंदा समाज के लिये एक कलंक है। कोर्ट के निर्णय से उसकी बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी।
बेटी के साथ हुए अत्याचार के बाद मां का जज्बा भी सलाम के काबिल है। दरअसल इस घटना के दो महीने बाद ही पिता की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। उसके बाद मां ने अपनी बेटी की हत्या करने वाले श्यामजीत को सजा दिलाने की ठानी।
उनकी इस लड़ाई में गांव के ही पूर्व प्रधान कालीचरन ने भी पूरा साथ दिया। निर्णय के बाद अमर उजाला से बातचीत में मां फफक पड़ी। बताया कि बालिका घर में अपने चार भाई बहिनों में सबसे छोटी थी और सबकी लाडली थी। घटना के बाद मासूम का चेहरा आज भी उनके जेहन में है। न्यायालय ने दरिंदे को फांसी की सजा दी है ये न्याय की जीत है।
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कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बालिका के साथ हैवानियत घृणित कार्य है और ऐसे शख्स के प्रति किसी तरह की दया नहीं की जा सकती। यह घटना 25 अगस्त 2016 को थाना बलदेव क्षेत्र में हुई थी और बच्ची आरोपी के दोस्त की बेटी थी।
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घटना के संबंध में गांव सालवान निवासी श्यामजीत उर्फ कलूटा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। उस दिन कलूटा नशे में था और शाम के वक्त गांव में ही अपने दोस्त के घर गया था। कलूटा चारपाई पर बैठा था जबकि उसका दोस्त किसी बात पर पत्नी से झगड़ते हुए घर से बाहर आ गया। इसी बीच कलूटा चारपाई पर सो रही बच्ची को चारपाई से उठाकर एक खंडहर नुमा मकान में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की, बच्ची रोने लगी तो कलूटा ने उसे गला दबाकर मार डाला और फरार हो गया।
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बच्ची की तलाश कर रहे घरवालों को पूर्व प्रधान कालीचरन ने उसे कलूटा के साथ देखने की बात कही थी। वह घर से भी गायब था। बाद में पुलिस ने बच्ची का शव बरामद कर लिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता रविंद्र कुमार ने बताया चार दिन बाद पुलिस ने कलूटा को गिरफ्तार कर लिया था और वह तभी से जेल में है।
इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (नवम) पॉस्को कोर्ट विवेकानंद शरण त्रिपाठी की अदालत में हुई। गवाह और सबूत पेश किए गए। इसके बाद श्यामजीत उर्फ कलूटा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए फांसी फांसी की सजा सुनाई है।
सजा सुनते ही घुटनों के बल बैठ गया कलूटा
न्यायाधीश ने दोष सिद्ध होने के बाद जैसे ही श्यामजीत उर्फ कलूटा को मरने तक फंदे से लटकाने (फांसी) की सजा सुनाई तो वो सन्न रह गया। मौत के भय के मारे कलूटा घुटनों के बल बैठ गया। पुलिस उसे जेल में ले जाने लगी तो उसने बस इतना कहा कि वो उस दिन नशे में था उसे कुछ नहीं पता ये सब कैसे हो गया।
पुलिस को दी थी सख्त हिदायत, 6 महीने में कर दिया फैसला
घटना के बाद मृतका का पिता थाने तहरीर लेकर पहुंचा। लेकिन पुलिस आरोपी को पकड़ नहीं सकी। कोर्ट ने अखबारों में छपी खबरों का संज्ञान लेते हुए एसओ को बुलाकर सख्त निर्देश दिये। तब कहीं जाकर श्यामजीत उर्फ कलूटा की गिरफ्तारी हुई। आरोपी तभी से जेल में था।
परिवार ने तोड़ लिया नाता
श्यामजीत उर्फ कलूटा के इस घिनौने कृत्य के बाद उसके परिवारीजनों ने उससे लगभग अपना नाता तोड़ लिया था। गुरुवार को जब उसे सजा सुनाई गई तब भी उसके परिवार का कोई सदस्य न्यायालय में नहीं था। बताया जाता है कि जेल में उसकी मिलाई करने के लिए भी कोई नहीं जाता था।
19 दिन में दाखिल कर दी थी चार्जशीट
मथुरा,ब्यूरो। इस मामले में पुलिस ने मृतका के पिता की तहरीर मिलने के बाद मात्र 19 दिन में न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी। एडीजीसी रविंद्र कुमार ने बताया कि इस मामले में प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आने में थोड़ा वक्त लग गया अन्यथा ये फैसला और भी जल्दी हो जाता।
मां बोली, समाज का कलंक है दरिंदा
न्यायालय के फैसला सुना तो बालिका की मां फफक कर रो पड़ी। बोली ये सत्य की जीत है। ये दरिंदा समाज के लिये एक कलंक है। कोर्ट के निर्णय से उसकी बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी।
बेटी के साथ हुए अत्याचार के बाद मां का जज्बा भी सलाम के काबिल है। दरअसल इस घटना के दो महीने बाद ही पिता की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। उसके बाद मां ने अपनी बेटी की हत्या करने वाले श्यामजीत को सजा दिलाने की ठानी।
उनकी इस लड़ाई में गांव के ही पूर्व प्रधान कालीचरन ने भी पूरा साथ दिया। निर्णय के बाद अमर उजाला से बातचीत में मां फफक पड़ी। बताया कि बालिका घर में अपने चार भाई बहिनों में सबसे छोटी थी और सबकी लाडली थी। घटना के बाद मासूम का चेहरा आज भी उनके जेहन में है। न्यायालय ने दरिंदे को फांसी की सजा दी है ये न्याय की जीत है।