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सेवानिवृत्ति के बाद दरोगा को मिली कैद की सजा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 02 Feb 2016 11:43 PM IST
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लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने के आरोपी के हिरासत से लापता होने पर दरोगा को दस साल कारावास की सजा सुनाई गई है। दरोगा फतेहपुर जिले के थाना खागा में तैनात थे।
20 साल पुराने इस मामलेे की रिपोर्ट भी खागा थाने में ही दर्ज थी। आरोपी को कोसीकलां से पकड़कर ले जाने के दौरान वह लापता हो गया। इस दरोगा को अपहरण के मामले में नामजद किया गया। अब दरोगा के सेवानिवृत्त होने के बाद कोर्ट का फैसला आया है।
वादी पक्ष के अधिवक्ता अनिल आजाद सक्सेना के अनुसार 1995 में फतेहपुर के थाना खागा में लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने की रिपोर्ट दर्ज की गई। मामले में कोसीकलां के इंदिरानगर निवासी सियाराम को नामजद किया गया था।
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उसे पकड़ने के लिए तीन जून 1995 को थाना खागा के दरोगा जगदीश भदौरिया कोसीकलां थाने पहुंचे। उन्होंने यहां तैनात दरोगा एसके सिंह को मामले की जानकारी दी और थाने की जीडी में एंट्री कराने के बाद एसके सिंह और जगदीश भदौरिया ने दिन में 11 बजे दबिश देकर सियाराम को पकड़ लिया।
कोसीकलां थाने में लाने के बाद एसके सिंह ने सियाराम को जगदीश भदौरिया के सुपुर्द कर दिया। सुपुर्दगी जीडी में दर्ज कराई गई। इसके बाद जगदीश भदौरिया सियाराम को लेकर थाना खागा चले गए। बताया जाता है कि जगदीश भदौरिया अकेले ही थाना खागा पहुंचे। सियाराम उनके साथ नहीं था।
इस पर सियाराम की पत्नी कल्लो ने दरोगा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। यह रिपोर्ट लखनऊ से आईजी के निर्देश पर छह फरवरी 1996 को कोसीकलां थाने में दरोगा एसके सिंह और जगदीश भदौरिया के खिलाफ दर्ज की गई। इसमें सियाराम का अपहरण कर गायब करने का आरोप दोनों पुलिसकर्मियों पर लगा।
विभागीय जांच में एसके सिंह और जगदीश भदौरिया को निलंबित कर दिया गया। बाद में एसके सिंह बहाल हो गए और कोसीकलां पुलिस ने उन्हें क्लीनचिट दी। जगदीश भदौरिया के खिलाफ चार्जशीट लगा दी गई।
मामले में 20 साल तक चली सुनवाई के बाद एडीजे द्वितीय राजेन्द्र कुमार ने शनिवार को दरोगा जगदीश भदौरिया को जेल भेज दिया था। मंगलवार को उसे 10 साल कारावास और 10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई। सुनवाई के वक्त सियाराम की पत्नी कल्लो और अन्य गवाह मौजूद रहे। मामले में लापता सियाराम का आजतक कुछ पता नहीं चल सका है।
वरिष्ठ अधिकारी जवाबदेह
मथुरा। 10 साल की सजा पाने के बाद दरोगा जगदीश भदौरिया बोले मुझे थाने से अकेले ही सियाराम को पकड़ने को भेजा गया था। 500 किमी से अधिक दूरी तक अपराधी को पकड़ने अकेले भेजने के मामले में पुलिस अधिकारी भी जवाबदेह होने चाहिए थे।
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20 साल पुराने इस मामलेे की रिपोर्ट भी खागा थाने में ही दर्ज थी। आरोपी को कोसीकलां से पकड़कर ले जाने के दौरान वह लापता हो गया। इस दरोगा को अपहरण के मामले में नामजद किया गया। अब दरोगा के सेवानिवृत्त होने के बाद कोर्ट का फैसला आया है।
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वादी पक्ष के अधिवक्ता अनिल आजाद सक्सेना के अनुसार 1995 में फतेहपुर के थाना खागा में लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने की रिपोर्ट दर्ज की गई। मामले में कोसीकलां के इंदिरानगर निवासी सियाराम को नामजद किया गया था।
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उसे पकड़ने के लिए तीन जून 1995 को थाना खागा के दरोगा जगदीश भदौरिया कोसीकलां थाने पहुंचे। उन्होंने यहां तैनात दरोगा एसके सिंह को मामले की जानकारी दी और थाने की जीडी में एंट्री कराने के बाद एसके सिंह और जगदीश भदौरिया ने दिन में 11 बजे दबिश देकर सियाराम को पकड़ लिया।
कोसीकलां थाने में लाने के बाद एसके सिंह ने सियाराम को जगदीश भदौरिया के सुपुर्द कर दिया। सुपुर्दगी जीडी में दर्ज कराई गई। इसके बाद जगदीश भदौरिया सियाराम को लेकर थाना खागा चले गए। बताया जाता है कि जगदीश भदौरिया अकेले ही थाना खागा पहुंचे। सियाराम उनके साथ नहीं था।
इस पर सियाराम की पत्नी कल्लो ने दरोगा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। यह रिपोर्ट लखनऊ से आईजी के निर्देश पर छह फरवरी 1996 को कोसीकलां थाने में दरोगा एसके सिंह और जगदीश भदौरिया के खिलाफ दर्ज की गई। इसमें सियाराम का अपहरण कर गायब करने का आरोप दोनों पुलिसकर्मियों पर लगा।
विभागीय जांच में एसके सिंह और जगदीश भदौरिया को निलंबित कर दिया गया। बाद में एसके सिंह बहाल हो गए और कोसीकलां पुलिस ने उन्हें क्लीनचिट दी। जगदीश भदौरिया के खिलाफ चार्जशीट लगा दी गई।
मामले में 20 साल तक चली सुनवाई के बाद एडीजे द्वितीय राजेन्द्र कुमार ने शनिवार को दरोगा जगदीश भदौरिया को जेल भेज दिया था। मंगलवार को उसे 10 साल कारावास और 10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई। सुनवाई के वक्त सियाराम की पत्नी कल्लो और अन्य गवाह मौजूद रहे। मामले में लापता सियाराम का आजतक कुछ पता नहीं चल सका है।
वरिष्ठ अधिकारी जवाबदेह
मथुरा। 10 साल की सजा पाने के बाद दरोगा जगदीश भदौरिया बोले मुझे थाने से अकेले ही सियाराम को पकड़ने को भेजा गया था। 500 किमी से अधिक दूरी तक अपराधी को पकड़ने अकेले भेजने के मामले में पुलिस अधिकारी भी जवाबदेह होने चाहिए थे।