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कोर्ट ने कहा, पुलिस ने बरती लापरवाही

Fri, 21 Apr 2017 12:16 AM IST
ब्यूूराो अमर उजाला
ब्यूूराो अमर उजाला Updated Fri, 21 Apr 2017 12:16 AM IST
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court said, police was careless
ramvriksha yadav mathura 2 - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा-बरेली
जवाहर बाग हिंसा में नामजद रामवृक्ष के बेटे विवेक यादव उर्फ लखू को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्पना शुक्ला की अदालत से जमानत मिल गई है। 90 दिन की अवधि में पुलिस के चार्जशीट दाखिल करने में विफल हो जाने को न्यायालय के निर्णय का आधार बनाया गया है। मामले में न्यायालय ने पुलिस की लापरवाही पर तल्ख टिप्पणी करते हुए आदेश की प्रति सीबीआई के निदेशक, डीजीपी को भी भेजी है।
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पुलिस ने रामवृक्ष के बेटे गाजीपुर निवासी विवेक यादव को 17 जनवरी को गिरफ्तार किया था। अभियुक्त का प्रथम रिमांड 18 जनवरी को दिया गया। इस तिथि से अब तक 90 दिन का समय पूरा होने के बाद भी जांच एजेंसी ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल नहीं किया। इसी आधार पर न्यायालय ने विवेक यादव को पांच लाख की नकद धनराशि के बांड और इतनी ही धनराशि की दो अलग-अलग स्थानीय जमानतों पर रिहा करने का आदेश दिया।
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न्यायालय ने ये कहा
लोक महत्व और गंभीर प्रकृति के जवाहर बाग हिंसा के मामले में विवेचक ने उपेक्षा और लापरवाही की है। जिसके कारण विधिक उपबंधों के तहत न्यायालय को उक्त अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने के लिए बाध्य होना पड़ा है।
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इन शर्तों पर मिली जमानत
-अभियुक्त न्यायालय, विवेचक की ओर से तलब किए जाने पर संबंधित के समक्ष उपस्थित होगा और अन्वेषण में सहयोग करेगा।
-अभियुक्त साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करेगा, न ही गवाहों को धमकाएगा।
-अभियुक्त बिना न्यायालय की अनुमति के देश से बाहर नहीं जाएगा।
-अभियुक्त शर्तों का उल्लंघन करता है तो अभियोजन को जमानत निरस्त करने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने का अधिकार होगा।

भारी पड़ सकती है ये लापरवाही
जवाहर बाग कांड के मुख्य आरोपियों में शामिल विवेक यादव के मामले में पुलिस की लापरवाही कई अफसरों पर भारी पड़ेगी। अब सीबीआई की निगाहें उन अफसरों पर भी गढ़ेंगी जो अब भी मामले के आरोपियों को लाभ पहुंचाने से नहीं चूक रहे है। माना जा रहा है कि अब सीबीआई की जांच का एक बिंदु ये भी होगा कि आखिर पुलिस की इस लापरवाही के पीछे की कहानी क्या है।
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