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डाकघर में 77 लाख का घोटाला, पोस्टमास्टर सस्पेंड
ब्यूरो, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Aug 2016 11:59 PM IST
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पोस्ट आफिस
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कृष्णानगर डाकघर में एक बड़ा गोलमाल सामने आया है। यहां के एक लिपिक ने पोस्टमास्टर के नाम से संचालित होने वाले सरकारी खाते से 76.8 लाख रुपये अपने पर्सनल खाते में ट्रांसफर कर लिए। मामला खुला तो हल्ला मच गया। लापरवाही बरतने पर पोस्टमास्टर को सस्पेंड कर दिया गया है। लिपिक पर भी गाज गिरी है।
डाकघर में पोस्टमास्टर के खाते से पैसा पिछले सात महीने से ट्रांसफर हो रहा था। डाकघर का ही बाबू सचिन अग्रवाल अपने पर्सनल खाते में हर महीने एक मोटी रकम ट्रांसफर कर लेता लेकिन किसी को पता ही नहीं चला। पोस्टमास्टर भी इससे अनजान रहे। बताया जाता है कि लिपिक सचिन अग्रवाल पोस्टमास्टर जयपाल सिंह का काफी विश्वासपात्र था।
खुलासा भी तब हुआ जब पोस्टमास्टर के खाते का आडिट किया गया। एक मोटी रकम हर महीने गायब हो रही थी। जांच शुरू हुई तो गबन का पूरा खेल सामने आ गया। क्योंकि पोस्टमास्टर की भी लापरवाही रही लिहाजा उन्हें भी दोषी मानते हुए सस्पेंड कर दिया गया। बाबू पर भी एक्शन हुआ है। भनक लगते ही बाबू फरार हो गया है। इस पूरे प्रकरण के जांच अधिकारी सहायक अधीक्षक वीके गुप्ता ने मुकदमा दर्ज कराने को कोतवाली में तहरीर दी है।
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दिसंबर से जून तक निकाली मोटी रकम
दिसंबर से जून तक सात महीने तक पोस्टमास्टर के खाते से अपने खाते में लिपिक मोटी धनराशि को ट्रांसफर करता रहा, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। ऐसे में डाकघर के अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
87 की बजाए 76.8 का उजागर हुआ घपला
घोटाला पकड़े जाने पर 87 लाख रुपये की धनराशि का मामला सामने आ रहा था, लेकिन मंगलवार को यह 76.8 लाख रुपये तक ही सिमटकर रह गया। इसकी चर्चा विभाग एवं लोगों की जुबां पर आ रही है।
प्रारंभिक जांच में घोटाला उजागर हुआ है। लिपिक सचिन अग्रवाल और पोस्ट मास्टर जयपाल सिंह को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच बैठा दी गई, जिसकी जिम्मेदारी सहायक अधीक्षक वीके गुप्ता को दी गई है। पुलिस थाने में तहरीर दी गई है।
-आरएन यादव, अधीक्षक, मुख्य डाकघर
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डाकघर में पोस्टमास्टर के खाते से पैसा पिछले सात महीने से ट्रांसफर हो रहा था। डाकघर का ही बाबू सचिन अग्रवाल अपने पर्सनल खाते में हर महीने एक मोटी रकम ट्रांसफर कर लेता लेकिन किसी को पता ही नहीं चला। पोस्टमास्टर भी इससे अनजान रहे। बताया जाता है कि लिपिक सचिन अग्रवाल पोस्टमास्टर जयपाल सिंह का काफी विश्वासपात्र था।
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खुलासा भी तब हुआ जब पोस्टमास्टर के खाते का आडिट किया गया। एक मोटी रकम हर महीने गायब हो रही थी। जांच शुरू हुई तो गबन का पूरा खेल सामने आ गया। क्योंकि पोस्टमास्टर की भी लापरवाही रही लिहाजा उन्हें भी दोषी मानते हुए सस्पेंड कर दिया गया। बाबू पर भी एक्शन हुआ है। भनक लगते ही बाबू फरार हो गया है। इस पूरे प्रकरण के जांच अधिकारी सहायक अधीक्षक वीके गुप्ता ने मुकदमा दर्ज कराने को कोतवाली में तहरीर दी है।
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दिसंबर से जून तक निकाली मोटी रकम
दिसंबर से जून तक सात महीने तक पोस्टमास्टर के खाते से अपने खाते में लिपिक मोटी धनराशि को ट्रांसफर करता रहा, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। ऐसे में डाकघर के अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
87 की बजाए 76.8 का उजागर हुआ घपला
घोटाला पकड़े जाने पर 87 लाख रुपये की धनराशि का मामला सामने आ रहा था, लेकिन मंगलवार को यह 76.8 लाख रुपये तक ही सिमटकर रह गया। इसकी चर्चा विभाग एवं लोगों की जुबां पर आ रही है।
प्रारंभिक जांच में घोटाला उजागर हुआ है। लिपिक सचिन अग्रवाल और पोस्ट मास्टर जयपाल सिंह को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच बैठा दी गई, जिसकी जिम्मेदारी सहायक अधीक्षक वीके गुप्ता को दी गई है। पुलिस थाने में तहरीर दी गई है।
-आरएन यादव, अधीक्षक, मुख्य डाकघर