{"_id":"5fb40ad78ebc3e9bd85a12ae","slug":"crackers-mathura-news-agr468309918","type":"story","status":"publish","title_hn":"वायु प्रदूषण का असर दिखा अस्पतालों में, बढ़ी मरीजों की संख्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वायु प्रदूषण का असर दिखा अस्पतालों में, बढ़ी मरीजों की संख्या
विज्ञापन
मथुरा। दिवाली के पटाखों से फैले वायु प्रदूषण का असर दिखना शुरू हो गया है। इसकी वजह से अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
आंखों में जलन, खांसी, गले में दर्द के मरीज अधिक संख्या में जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। रोगियों में किसी का सीना जकड़ रहा है तो किसी को सांस लेने में परेशानी हो रही है। काफी संख्या में मरीज निजी चिकित्सकों के पास गए। पिछले सप्ताह तक 10 से 15 रोगी पहुंच रहे थे, वहीं मंगलवार को संख्या बढ़कर दोगुनी हो गई। रोगियों में बच्चों और वृद्धजनों की संख्या अधिक देखी गई।
- अधिकांश रोगी गले में दर्द, खांसी और सांस लेने में परेशानी वाले पहुंचे हैं। प्रदूषण के साथ सर्दी से भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। - डॉ. अमिताभ पांडेय, ईएनटी विशेषज्ञ।
- वातावरण में सल्फर डाई ऑक्साइड और कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाने से पर्यावरण ही नहीं सेहत को भी काफी नुकसान होता है। पटाखों में कई खतरनाक पदार्थ रहते हैं। इनके फूटने से वातावरण में यह धुएं के साथ भरपूर मात्रा में फैल जाते हैं। सांस नलिकाओं में पहुंचने के बाद नलिकाएं संकुचित हो जाती हैं। - डॉ. पीयूष चतुर्वेदी, मेडिकल ऑफिसर, संयुक्त जिला अस्पताल।
विज्ञापन
विज्ञापन
आंखों में जलन, खांसी, गले में दर्द के मरीज अधिक संख्या में जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। रोगियों में किसी का सीना जकड़ रहा है तो किसी को सांस लेने में परेशानी हो रही है। काफी संख्या में मरीज निजी चिकित्सकों के पास गए। पिछले सप्ताह तक 10 से 15 रोगी पहुंच रहे थे, वहीं मंगलवार को संख्या बढ़कर दोगुनी हो गई। रोगियों में बच्चों और वृद्धजनों की संख्या अधिक देखी गई।
- अधिकांश रोगी गले में दर्द, खांसी और सांस लेने में परेशानी वाले पहुंचे हैं। प्रदूषण के साथ सर्दी से भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। - डॉ. अमिताभ पांडेय, ईएनटी विशेषज्ञ।
विज्ञापन
- वातावरण में सल्फर डाई ऑक्साइड और कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाने से पर्यावरण ही नहीं सेहत को भी काफी नुकसान होता है। पटाखों में कई खतरनाक पदार्थ रहते हैं। इनके फूटने से वातावरण में यह धुएं के साथ भरपूर मात्रा में फैल जाते हैं। सांस नलिकाओं में पहुंचने के बाद नलिकाएं संकुचित हो जाती हैं। - डॉ. पीयूष चतुर्वेदी, मेडिकल ऑफिसर, संयुक्त जिला अस्पताल।
विज्ञापन