11 दोषियों को आजीवन कारावासः खनन की शिकायत पर भाइयों को मारी थी गोली, फैसला सुन कोर्ट में फफक पड़ा बूढ़ा पिता
मथुरा में सगे भाइयों की हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपियों को दोषी पाया। सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसला सुनकर बूढ़ा पिता वहीं फफक पड़ा। उसने कोर्ट का शुक्रिया अदा किया।
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दरअसल, मामला 2014 का है। सुहागपुर ग्राम प्रधान बंकट मिट्टी खनन करवा रहा था। इसकी सूचना ग्रामीण कालू और विशम्भर ने नौहझील थाना पुलिस को दे दी। पुलिस के पहुंचने पर दोनों पक्षों में विवाद हुआ। उस समय प्रधान बंकट वहां से भाग गया।
घंटों बाद जब दूसरा पक्ष खेतों से घर पहुंचा तो पहले से ही तैयार बैठे प्रधान पक्ष ने कालू-विशम्भर पक्ष पर हमला कर दिया। इस दौरान महेश और रामकिशन दोनों भाई भी मौजूद थे। गोली लगने से दोनों भाइयों की मौत हो गई। जबकि, कालू, विशंभर, जयप्रकाश और रामऋषि घायल हो गए थे।
वकील ने मांगी फांसी की सजा
सरकारी वकील ने न्यायाधीश से आग्रह किया कि हमलावरों ने गोलियां चलाकर वारदात को अंजाम दिया। इसे जघन्य मानते हुए दोषियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। परंतु अदालत ने सभी को आजीवन कारावास तथा प्रत्येक पर 23 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। एडीजीसी राजू सिंह ने बताया कि प्रधान पक्ष ने भी कालू ओर विशंभर पक्ष के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, परंतु अदालत ने उन्हें दोषी नहीं माना।
फैसले से तसल्ली पर घाव अभी पूरी तरह नहीं भरे
महेश और रामकिशन हत्याकांड में दोषियों को आजीवन कैद मिलने पर परिजनों ने खुशी जताई। कहा कि कानून के घर देर है अंधेर नहीं। उन्होंने न्यायालय का धन्यवाद किया। कहा कि आठ साल बाद ही सही उन्हें न्याय मिला है। फैसला आने के बाद पिता बहादुर सिंह ने कहा कि बेटों को खोने के बाद भी परिवार ने कई झूठे मुकदमे झेले। आज भी वो केस चल रहे हैं, हमें निराश नहीं हुए।
ईश्वर की अदृश्य शक्ति ने कभी मनोबल नहीं टूटने दिया। कानून पर पूरा भरोसा रखा और आज न्याय मिल गया। मां रनवीरी देवी ने भावुक होते हुए कहा कि कानून ने अपना काम किया है। फैसले ने दिल को थोड़ी तसल्ली जरूर दी है, लेकिन घाव अभी भी पूरी तरह भरे नहीं हैं। पत्नी सुमन देवी ने कहा कि पति और देवर के हत्यारों को फांसी की सजा होनी चाहिए थी, फिर भी इस फैसले से भी काफी संतोष मिला है।
घटना के 6 महीने बाद ही ग्राम प्रधान बन गई थी सुमन
दो सगे भाइयों की हत्याकांड के लगभग 6 महीने बाद ही पंचायत चुनाव हुए थे। इस चुनाव में ग्रामीणों ने रामकिशन की पत्नी सुमन देवी को ग्राम प्रधान के रूप में चुना और उन्होंने पांच साल तक दायित्व संभाला।
अभी लंबित हैं दो केस
इस मामले में दोनों पक्षों के बीच तीन केस चल रहे थे। इनमें से एक पर बुधवार को फैसला हो गया, लेकिन अभी भी दो केस लंबित हैं।