Mathura: श्रीधाम एक्सप्रेस गोलीकांड में कमजोर पड़ीं 35 गवाही, हरेंद्र राणा हुआ बरी, अब हाईकोर्ट में अपील
वर्ष 2012 में श्रीधाम एक्सप्रेस हुई इस वारदात को जीआरपी ने इतने हल्के में लिया कि अदालत में कोई भी गवाही जीआरपी के खुलासे पर मुहर नहीं लगा सकी। जिसके चलते एडीजे पंचम कमलेश कुमार पाठक ने हरेंद्र राणा व उसके साथियों को वारदात से बरी कर दिया था।
विस्तार
एक अक्तूबर 2012 को अभियुक्त मोहित भारद्वाज को कांस्टेबल योगेश, अमित और फैज मोहम्मद श्रीधाम एक्सप्रेस से दिल्ली से आगरा ला रहे थे। मथुरा में फरह के पास पुलिस वर्दी में आए बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं और मोहित भारद्वाज की हत्या कर दी। इस हमले में साथ मौजूद दो सिपाही गोली लगने से घायल हो गए। एक सिपाही फैज मोहम्मद का शव रेलवे लाइन के किनारे अगले दिन मिला।
जीआरपी ने दोनों की हत्या का आरोपी कुख्यात हरेंद्र राणा, उसके साथी सोनू गौतम को माना। बाद में पुलिस ने इस मामले में फिरोज खान और वीनेश उर्फ दिनेश कुमार, पंकज उर्र्फ भोला को हत्या में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मौजूदा समय में हरेंद्र गाजियाबाद जेल में बंद है। वह एमपी पुलिस में सिपाही था। आपराधिक घटनाओं के कारण ही बर्खास्त किया गया था।
कुल 35 गवाह कोर्ट आए
तीन दिन तक केस की जांच जीआरपी निरीक्षक रमेश चंद्र राठौर ने की थी। इसके बाद यह जांच सीओ रोहित मिश्रा को दी गई। रोहित मिश्रा ने करीब दस दिन बाद ही वारदात में सोनू गौतम और हरेंद्र राणा का नाम खोल दिया। जीआरपी ने करीब एक वर्ष बाद सोनू गौतम, हरेन्द्र राणा और उसके साथी उसके साथी फिरोज खान और वीनेश उर्फ दिनेश कुमार आदि को भी गिरफ्तार किया।हमले में घायल दो सिपाहियों सहित कुल 35 लोगों को जीआरपी ने गवाह बनाया। आरोपी हरेन्द्र राणा के अधिवक्ता रवि शर्मा के मुताबिक घायल दोनों सिपाहियों के सामने बदमाशों की पहचान कराने के लिए जांच अधिकारी सीओ ने पहचान परेड तक नहीं कराई क्योंकि हमलावार पुलिस वर्दी में थे। इसलिए उन्हें पहचानना संभव नहीं था।
पुलिस ने कोई भी गवाह ऐसा नहीं बनाया जो कि वारदात का मुख्य गवाह बन सके। कई गवाह तो हरेंद्र के साथ पढ़े हुए और उसके साथ पुलिस ट्रेनिंग किए हुए लोगों को बनाया, जिनका दूर-दूर तक वारदात से कोई वास्ता नहीं था। जीआरपी ने हरेंद्र के साथ गिरफ्तार साथियों में से एक के इकबालिया बयान में अवश्य दर्ज किया, जो कि पर्याप्त आधार नहीं बना।
किसी भी यात्री को नहीं बनाया गवाह
जीआरपी के सीओ द्वारा जो विवेचना की गई, उसमें वारदात स्थल ट्रेन की बोगी के किसी भी यात्री को गवाह नहीं बनाया गया। ट्रेन में सिपाहियों के अलावा अन्य यात्री भी सवार थे जो कि वारदात के चश्मदीद थे। बदमाशों के बारे में अन्य जानकारी भी रखते थे। लूटी हुई कारबाइन पुलिस ने 4 अक्तूबर 2012 को बुलंदशहर से लावारिस हालत में खेत से बरामद दिखाई। जिस असलहे का वारदात में प्रयोग किया गया, वह भी बरामद नहीं हो सका।
जीआरपी के अधिकारी ने हरेंद्र राणा या सोनू गौतम को जेल भेजने के बाद इतनी बड़ी वारदात में रिमांड तक पर नहीं लिया। जिस अभियुक्त मोहित भारद्वाज की हत्या की गई, उससे कोई लिंक जीआरपी नहीं बता सकी। सुपारी लिए जाने संबंधी भी कोई सबूत अदालत में पेश नहीं हो सका। एडीजीसी अवनीश उपाध्याय ने बताया कि अदालत ने 22 सितंबर 2022 को हरेन्द्र राणा सहित अन्य अभियुक्त को हत्या में बरी कर दिया था। उन्होंने इस संबंध में नौ नवंबर को हाईकोर्ट में अपील की है।