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Mathura News: हाथी टीला पर चहारदीवारी से गरमाया विवाद, प्रशासन ने रुकवाया कार्य
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मथुरा। धार्मिक मान्यताओं में कंस के हाथी को जिस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा पछाड़े जाने से जोड़ा जाता है, वहां शनिवार को चहारदीवारी के निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया। एएसआई, प्रशासन और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची, इसके बाद निर्माण कार्य रुका। हालांकि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। अब प्रशासन दोनों पक्षों को बुलाकर बैठक कर सकता है।
निर्माण कराने वाले शाकिर हुसैन ने भूमि को वक्फ बोर्ड की बताते हुए दावा किया कि खसरा संख्या 628 और 629 कब्रिस्तान में दर्ज है। वहीं एएसआई के वरिष्ठ संरक्षण सहायक नितिन प्रिय के अनुसार, हाथी टीला के नाम से करीब पांच एकड़ भूमि एएसआई की संरक्षित संपत्तियों में शामिल है। इस क्षेत्र में पूर्व में पुरातात्विक खुदाई भी कराई जा चुकी है। ऐसे में संरक्षित क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण कार्य नियमों के विपरीत है। शाकिर हुसैन का कहना है कि यहां लंबे समय से कब्रिस्तान मौजूद है। कुछ दिनों से भूमि की चारदीवारी का काम कराया जा रहा था। शनिवार को इसकी जानकारी प्रशासन और एएसआई को हुई तो अधिकारी मौके पर पहुंच गए। सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्रा का कहना है कि विवादित भूमि के राजस्व और पुरातात्विक अभिलेखों के साथ न्यायालय में लंबित प्रकरण के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है। फिलहाल निर्माण कार्य को रुकवा दिया है।
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- पहले भी सुर्खियों में आया था हाथी टीला
हाथी टीले की भूमि को लेकर इससे पहले भी विवाद सामने आ चुका है। वर्ष 2021 और 2023 में भूमि के स्वामित्व और कब्जे को लेकर विवाद हुआ था। शनिवार को दोबारा दीवार का निर्माण शुरू होने के बाद विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है।
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जून में भी खुर्द-बुर्द की गई थी कब्रिस्तान
इसी कब्रिस्तान में बीती जून को सफाई के लिए पहुंचे नगर निगम के लिए काम करने वाली कंपनी के बुलडोजर (बैकहो-लोडर) से नौ कब्रें खोद डाली थीं। वहीं छह पेड़ गिराते हुए सीमेंट के कई खंभे भी तोड़ दिए थे। कब्रिस्तान कमेटी ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की तो कंपनी ने एक कब्र की मरम्मत के लिए सौ रुपये का मुआवजा दिया था। पेड़ और खंभे के लिए भी मुआवजा सौ रुपये के हिसाब तय करते हुए 3300 रुपये का चेक दिया।
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निर्माण कराने वाले शाकिर हुसैन ने भूमि को वक्फ बोर्ड की बताते हुए दावा किया कि खसरा संख्या 628 और 629 कब्रिस्तान में दर्ज है। वहीं एएसआई के वरिष्ठ संरक्षण सहायक नितिन प्रिय के अनुसार, हाथी टीला के नाम से करीब पांच एकड़ भूमि एएसआई की संरक्षित संपत्तियों में शामिल है। इस क्षेत्र में पूर्व में पुरातात्विक खुदाई भी कराई जा चुकी है। ऐसे में संरक्षित क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण कार्य नियमों के विपरीत है। शाकिर हुसैन का कहना है कि यहां लंबे समय से कब्रिस्तान मौजूद है। कुछ दिनों से भूमि की चारदीवारी का काम कराया जा रहा था। शनिवार को इसकी जानकारी प्रशासन और एएसआई को हुई तो अधिकारी मौके पर पहुंच गए। सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्रा का कहना है कि विवादित भूमि के राजस्व और पुरातात्विक अभिलेखों के साथ न्यायालय में लंबित प्रकरण के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है। फिलहाल निर्माण कार्य को रुकवा दिया है।
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- पहले भी सुर्खियों में आया था हाथी टीला
हाथी टीले की भूमि को लेकर इससे पहले भी विवाद सामने आ चुका है। वर्ष 2021 और 2023 में भूमि के स्वामित्व और कब्जे को लेकर विवाद हुआ था। शनिवार को दोबारा दीवार का निर्माण शुरू होने के बाद विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है।
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जून में भी खुर्द-बुर्द की गई थी कब्रिस्तान
इसी कब्रिस्तान में बीती जून को सफाई के लिए पहुंचे नगर निगम के लिए काम करने वाली कंपनी के बुलडोजर (बैकहो-लोडर) से नौ कब्रें खोद डाली थीं। वहीं छह पेड़ गिराते हुए सीमेंट के कई खंभे भी तोड़ दिए थे। कब्रिस्तान कमेटी ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की तो कंपनी ने एक कब्र की मरम्मत के लिए सौ रुपये का मुआवजा दिया था। पेड़ और खंभे के लिए भी मुआवजा सौ रुपये के हिसाब तय करते हुए 3300 रुपये का चेक दिया।