{"_id":"649341c6020279623a071946","slug":"congressmen-clash-with-each-other-over-cabinet-formation-mathura-news-c-29-1-mtr1009-92851-2023-06-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: कैबिनेट गठन को लेकर आपस में भिड़े कांग्रेसी, धक्कामुक्की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: कैबिनेट गठन को लेकर आपस में भिड़े कांग्रेसी, धक्कामुक्की
Thu, 22 Jun 2023 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Updated Thu, 22 Jun 2023 12:00 AM IST
विज्ञापन
मथुरा। नगर निगम की पहली बोर्ड बैठक में आम सहमति से सभी प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद कैबिनेट गठन के मुद्दे पर कांग्रेसी आपस में भिड़ गए। इस दौरान तू-तू, मैं-मैं के साथ धक्कामुक्की भी हुई। बात बढ़ती देख सुरक्षाकर्मी और नगर आयुक्त महापौर को अपने साथ कार्यालय से लेकर चले गए। दरअसल निर्धारित व्यवस्था के तहत पहली बैठक के साथ ही कैबिनेट का गठन भी किया गया।
बैठक की कार्यवाही पूरी होने के बाद महापौर विनोद अग्रवाल ने कैबिनेट गठन की घोषणा की। इसमें भाजपा से वार्ड पांच भरतपुर गेट के पार्षद हनुमान, वार्ड 40 राजकुमार से धनंजय सिंह लोधी, वार्ड 52 चंद्रपुरी से सरस्वती देवी, वार्ड 45 बिरला मंदिर से उमा, वार्ड 51 गोशाला नगर से मुकेश सारस्वत, वार्ड 70 बिहारीपुरा से वैभव अग्रवाल और वार्ड 36 जयसिंहपुरा से राकेश भाटिया को स्थान दिया गया है। वार्ड 24 सराय आजमाबाद से निर्दलीय पार्षद अंकुर गुर्जर और वार्ड 25 छरौरा से निर्दलीय पार्षद ओमवती को भी शामिल किया इनके अलावा कांग्रेस से वार्ड 47 से पार्षद रेनू चौधरी, वार्ड 43 गणेशरा से राष्ट्रीय लोकदल से लीला और वार्ड 16 बाकलपुर से बहुजन समाज पार्टी के पार्षद गुलशन को कैबिनेट में लिया गया। इस घोषणा पर कांग्रेस के कुछ पार्षदों ने विरोध जाहिर किया।
उनका कहना था कि पार्टी संगठन ने कृष्णापुरी से धनंजय चौधरी को नामित किया है। इसलिए कैबिनेट में उन्हीं को शामिल किया जाए। इस बीच धनंजय गुट के पार्षद व समर्थक महापौर का घेराव करने लगे। वहीं रेनू चौधरी पक्ष के समर्थक महापौर के फैसले का समर्थन करने लगे। इससे कांग्रेस के दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। एक दूसरे से भिड़ गए। तू-तू, मैं-मैं और धक्कामुक्की हो गई। इधर, सपा से पार्षद मुन्ना मलिक ने भी कार्यकारिणी के गठन के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे महापौर की मनमानी करार दिया है।
विज्ञापन
वरिष्ठता का नहीं रखा ध्यान
वरिष्ठ पार्षद राजवीर चौधरी ने कहा कि वरिष्ठता और अनुभव को दरकिनार करते हुए कार्यकारणी बनाई गई है। इससे उनके सहित कई पार्षदों में असंतोष है। यदि वोटिंग करवाकर कार्यकारिणी बनाई जाती तो यह समस्या नहीं आती। हर बोर्ड मीटिंग से पहले संगठन द्वारा भाजपा पार्षदों की बैठक बुलाई जाती रही है। उसमें सभी पार्षदों की भावना और वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाता रहा है, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नही किया गया।
विज्ञापन
बैठक की कार्यवाही पूरी होने के बाद महापौर विनोद अग्रवाल ने कैबिनेट गठन की घोषणा की। इसमें भाजपा से वार्ड पांच भरतपुर गेट के पार्षद हनुमान, वार्ड 40 राजकुमार से धनंजय सिंह लोधी, वार्ड 52 चंद्रपुरी से सरस्वती देवी, वार्ड 45 बिरला मंदिर से उमा, वार्ड 51 गोशाला नगर से मुकेश सारस्वत, वार्ड 70 बिहारीपुरा से वैभव अग्रवाल और वार्ड 36 जयसिंहपुरा से राकेश भाटिया को स्थान दिया गया है। वार्ड 24 सराय आजमाबाद से निर्दलीय पार्षद अंकुर गुर्जर और वार्ड 25 छरौरा से निर्दलीय पार्षद ओमवती को भी शामिल किया इनके अलावा कांग्रेस से वार्ड 47 से पार्षद रेनू चौधरी, वार्ड 43 गणेशरा से राष्ट्रीय लोकदल से लीला और वार्ड 16 बाकलपुर से बहुजन समाज पार्टी के पार्षद गुलशन को कैबिनेट में लिया गया। इस घोषणा पर कांग्रेस के कुछ पार्षदों ने विरोध जाहिर किया।
विज्ञापन
उनका कहना था कि पार्टी संगठन ने कृष्णापुरी से धनंजय चौधरी को नामित किया है। इसलिए कैबिनेट में उन्हीं को शामिल किया जाए। इस बीच धनंजय गुट के पार्षद व समर्थक महापौर का घेराव करने लगे। वहीं रेनू चौधरी पक्ष के समर्थक महापौर के फैसले का समर्थन करने लगे। इससे कांग्रेस के दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। एक दूसरे से भिड़ गए। तू-तू, मैं-मैं और धक्कामुक्की हो गई। इधर, सपा से पार्षद मुन्ना मलिक ने भी कार्यकारिणी के गठन के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे महापौर की मनमानी करार दिया है।
विज्ञापन
वरिष्ठता का नहीं रखा ध्यान
वरिष्ठ पार्षद राजवीर चौधरी ने कहा कि वरिष्ठता और अनुभव को दरकिनार करते हुए कार्यकारणी बनाई गई है। इससे उनके सहित कई पार्षदों में असंतोष है। यदि वोटिंग करवाकर कार्यकारिणी बनाई जाती तो यह समस्या नहीं आती। हर बोर्ड मीटिंग से पहले संगठन द्वारा भाजपा पार्षदों की बैठक बुलाई जाती रही है। उसमें सभी पार्षदों की भावना और वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाता रहा है, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नही किया गया।